गुप्त बांके बिहारी आगरा नाई की मंडी का मंदिर:कथा के छठवें दिन प्रेम निधि मंदिर के लिए बोले इंद्रेश

गुप्त बांके बिहारी आगरा नाई की मंडी का मंदिर:कथा के छठवें दिन प्रेम निधि मंदिर के लिए बोले इंद्रेश

नाई की मंडी स्थित प्रेमनिधि मंदिर आगरा के गुप्त बांके बिहारी हैं। प्रभु भले ही प्रत्यक्ष दर्शन न दें, लेकिन अपने होने का एहसास अवश्य कराते हैं और वही अनुभव जीवन का कल्याण कर देता है। यह बात विख्यात कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने शुक्रवार को बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कही। पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा आयोजित कथा में आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने प्रेमनिधि मंदिर का उल्लेख करते हुए उससे जुड़ा प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि घनघोर वर्षा की अंधेरी रात में प्रेमनिधि महाराज यमुना का जल लेने और स्नान करने गए थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण बालक के रूप में मशाल लेकर उनके आगे-आगे चले थे। उन्होंने कहा कि प्रभु अपने भक्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मोगरा, चमेली और अन्य पुष्प भी सुंदर होते हैं, लेकिन प्रभु कमल को सबसे अधिक प्रिय मानते हैं। इसका कारण यह है कि कमल कीचड़ और विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी सुंदरता और पवित्रता बनाए रखता है। मनुष्य को भी जीवन के कठिन समय में प्रभु पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। प्रभु पर अविश्वास करने से भक्ति का नाश होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत और भक्तमाल में ऐसे अनेक चरित्र मिलते हैं, जिन्होंने बड़े से बड़े दुख और कष्ट के बीच भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखा। इसी विश्वास के कारण उन्हें प्रभु की कृपा प्राप्त हुई। आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण प्रसंग सुनाया। विवाहोत्सव के वर्णन पर कथा पंडाल भक्ति और उल्लास से सराबोर हो उठा तथा श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए। गोवर्धन धारण लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि संकट के समय प्रभु की शरण ही सबसे बड़ा सहारा होती है। संत सेवा, यमुना सेवा और समाजसेवा के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कथा के साथ समाजोपयोगी सेवा प्रकल्प भी जोड़े जाएंगे। रस और रास का अंतर समझाते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करना रस है, जबकि भक्त की भावना से प्रसन्न होकर ठाकुरजी स्वयं उसके जीवन में उपस्थित हो जाएं तो वह रास है। रस से रास तक की यात्रा ही सच्चा भक्तिपथ है। इस अवसर पर महंत कपिल नागर, मुख्य यजमान हरीश अग्रवाल, तरूणा अग्रवाल, नीतेश चेन्स, आदर्श नंदन गुप्त, ऋषि अग्रवाल, बीडी अग्रवाल, टट्टू गोयल, सुरेंद्र अग्रवाल, मुकुंद सिंघल, अतुल गोयल, संजय मंगल और अजय मित्तल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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