नालंदा में स्कूली शिक्षा को रोजगार से जोड़ने और छात्र-छात्राओं को प्रारंभिक स्तर से ही आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत राज्य के 555 और नालंदा जिले के 10 हाई स्कूलों में आगामी एक जुलाई से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों(वोकेशनल कोर्स) की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए पूरे सूबे में कुल 739 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें सामान्य शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण देना है, ताकि भविष्य में उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते आसानी से खुल सकें। आधुनिक प्रयोगशाला का हो रहा निर्माण इन चयनित विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने और कक्षाओं के सुचारु संचालन का जिम्मा दो एजेंसियों को सौंपा गया है। शिक्षा विभाग के राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को पत्र भेजकर हर हाल में एक जुलाई से पहले स्कूलों में प्रयोगशालाएं स्थापित करने का कार्य पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। ये एजेंसियां स्कूलों में आवश्यक उपकरण, फर्नीचर और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगी। पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी कौशल की जरूरत सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ मो. शहनवाज और डीईओ आनंद विजय ने संयुक्त तौर पर बताया कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। तकनीकी और व्यावसायिक कौशल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालय स्तर पर यह शुरुआत की जा रही है, जिससे विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को काफी लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन, हार्डवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), रिटेल, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और कृषि आधारित तकनीक जैसे रोजगारपरक विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। रेलटेल एजेंसी के प्रतिनिधि अमित श्रीवास्तव के अनुसार, यह फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसके तहत 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को उनकी रुचि के आधार पर विद्यालय के प्रधानाध्यापकों द्वारा चुने गए दो-दो ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। नालंदा के इन स्कूलों में शुरू होगी पढ़ाई जिले के जिन 10 विद्यालयों में यह सुविधा शुरू होने जा रही है, वहां अलग-अलग ट्रेड निर्धारित किए गए हैं। कल्याणबिगहा प्लस टू हाई स्कूल में टूरिज्म और आतिथ्य (हॉस्पिटलिटी) के साथ इलेक्ट्रॉनिक और हार्डवेयर की पढ़ाई होगी। इसी तरह राजकुमार संत बल्लभाचार्य और मोहमदपुर हाई स्कूल में इलेक्ट्रॉनिक, हार्डवेयर, पोशाक निर्माण और घर की सजावट (होम फर्निशिंग) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बिहारशरीफ के बड़ी पहाड़ी और अकौना हाई स्कूल में कृषि, जबकि इस्लामपुर के नेता जी सुभाष स्कूल में टेलीकॉम, पोशाक निर्माण और घर की सजावट की पढ़ाई होगी। इसके अलावा हिलसा आरबी प्लस टू स्कूल व सिलाव के श्री गांधी हाई स्कूल में टूरिज्म, आतिथ्य और कृषि, रहुई के पतासंग हाई स्कूल में इनफॉर्मेशन एंड टेक्नोलोजी (आईटी) तथा सरमेरा प्लस टू स्कूल में प्लंबिंग व इलेक्ट्रॉनिक की शिक्षा दी जाएगी। राज्य भर में बनाए गए हैं 739 प्रशिक्षण केंद्र पूरे बिहार में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग जिलों में केंद्रों का आवंटन किया गया है। राज्य में सीतामढ़ी में सर्वाधिक 45, पटना व पश्चिम चंपारण में 41-41, नवादा में 40, मुजफ्फरपुर में 36, बांका में 33, मधुबनी व समस्तीपुर में 32-32, सिवान व वैशाली में 30-30, पूर्णिया, रोहतास व सहरसा में 28-28 तथा शिवहर में 26 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा मुंगेर में 24, शेखपुरा-सुपौल में 22-22, सारण-नालंदा में 20-20, मधेपुरा में 19, कटिहार में 17, गया-भागलपुर में 13-13, पूर्वी चंपारण में 12, खगड़िया में 11, अररिया में 10, बेगूसराय, जमुई-लखीसराय में 9-9, दरभंगा-किशनगंज में 8-8, औरंगाबाद में 7, गोपालगंज में 6, जहानाबाद में 4, कैमूर में 2 और बक्सर में 1 केंद्र स्थापित किया गया है। नालंदा में स्कूली शिक्षा को रोजगार से जोड़ने और छात्र-छात्राओं को प्रारंभिक स्तर से ही आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत राज्य के 555 और नालंदा जिले के 10 हाई स्कूलों में आगामी एक जुलाई से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों(वोकेशनल कोर्स) की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए पूरे सूबे में कुल 739 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें सामान्य शिक्षा के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण देना है, ताकि भविष्य में उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते आसानी से खुल सकें। आधुनिक प्रयोगशाला का हो रहा निर्माण इन चयनित विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित करने और कक्षाओं के सुचारु संचालन का जिम्मा दो एजेंसियों को सौंपा गया है। शिक्षा विभाग के राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को पत्र भेजकर हर हाल में एक जुलाई से पहले स्कूलों में प्रयोगशालाएं स्थापित करने का कार्य पूरा करने का सख्त निर्देश दिया है। ये एजेंसियां स्कूलों में आवश्यक उपकरण, फर्नीचर और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही प्रशिक्षण की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेंगी। पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी कौशल की जरूरत सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ मो. शहनवाज और डीईओ आनंद विजय ने संयुक्त तौर पर बताया कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। तकनीकी और व्यावसायिक कौशल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए विद्यालय स्तर पर यह शुरुआत की जा रही है, जिससे विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को काफी लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर एप्लीकेशन, हार्डवेयर, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), रिटेल, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और कृषि आधारित तकनीक जैसे रोजगारपरक विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। रेलटेल एजेंसी के प्रतिनिधि अमित श्रीवास्तव के अनुसार, यह फिलहाल एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसके तहत 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को उनकी रुचि के आधार पर विद्यालय के प्रधानाध्यापकों द्वारा चुने गए दो-दो ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। नालंदा के इन स्कूलों में शुरू होगी पढ़ाई जिले के जिन 10 विद्यालयों में यह सुविधा शुरू होने जा रही है, वहां अलग-अलग ट्रेड निर्धारित किए गए हैं। कल्याणबिगहा प्लस टू हाई स्कूल में टूरिज्म और आतिथ्य (हॉस्पिटलिटी) के साथ इलेक्ट्रॉनिक और हार्डवेयर की पढ़ाई होगी। इसी तरह राजकुमार संत बल्लभाचार्य और मोहमदपुर हाई स्कूल में इलेक्ट्रॉनिक, हार्डवेयर, पोशाक निर्माण और घर की सजावट (होम फर्निशिंग) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बिहारशरीफ के बड़ी पहाड़ी और अकौना हाई स्कूल में कृषि, जबकि इस्लामपुर के नेता जी सुभाष स्कूल में टेलीकॉम, पोशाक निर्माण और घर की सजावट की पढ़ाई होगी। इसके अलावा हिलसा आरबी प्लस टू स्कूल व सिलाव के श्री गांधी हाई स्कूल में टूरिज्म, आतिथ्य और कृषि, रहुई के पतासंग हाई स्कूल में इनफॉर्मेशन एंड टेक्नोलोजी (आईटी) तथा सरमेरा प्लस टू स्कूल में प्लंबिंग व इलेक्ट्रॉनिक की शिक्षा दी जाएगी। राज्य भर में बनाए गए हैं 739 प्रशिक्षण केंद्र पूरे बिहार में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग जिलों में केंद्रों का आवंटन किया गया है। राज्य में सीतामढ़ी में सर्वाधिक 45, पटना व पश्चिम चंपारण में 41-41, नवादा में 40, मुजफ्फरपुर में 36, बांका में 33, मधुबनी व समस्तीपुर में 32-32, सिवान व वैशाली में 30-30, पूर्णिया, रोहतास व सहरसा में 28-28 तथा शिवहर में 26 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा मुंगेर में 24, शेखपुरा-सुपौल में 22-22, सारण-नालंदा में 20-20, मधेपुरा में 19, कटिहार में 17, गया-भागलपुर में 13-13, पूर्वी चंपारण में 12, खगड़िया में 11, अररिया में 10, बेगूसराय, जमुई-लखीसराय में 9-9, दरभंगा-किशनगंज में 8-8, औरंगाबाद में 7, गोपालगंज में 6, जहानाबाद में 4, कैमूर में 2 और बक्सर में 1 केंद्र स्थापित किया गया है।


