मुजफ्फरपुर हॉस्पिटल अग्निकांड: जिंदा जले 6 लोगों की कहानी:शादी से पहले क्लर्क की दम घुटकर मौत, किडनी, ब्रेन सर्जरी के पेशेंट की भी गई जान

मुजफ्फरपुर हॉस्पिटल अग्निकांड: जिंदा जले 6 लोगों की कहानी:शादी से पहले क्लर्क की दम घुटकर मौत, किडनी, ब्रेन सर्जरी के पेशेंट की भी गई जान

‘शशांक 7 दिन पहले पटना से लौट रहा था। इस दौरान बोचहां में सड़क हादसे का शिकार बन गया। उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, फिर प्रसाद अस्पताल में एडमिट कराया गया था। सफल ऑपरेशन के बाद ICU में था, लेकिन आग लगने की घटना ने मेरे बेटे को उसकी शादी से पहले ही छीन लिया।’ संजय चौधरी, शशांक के पिता पापा की तबीयत ठीक नहीं थी। 22 मई को उन्होंने सीने और पेट में तकलीफ बताई थी। इसके बाद उन्हें प्रसाद अस्पताल में एडमिट कराया था। शुरुआत में डॉक्टरों ने उनकी तबीयत ठीक बताई, लेकिन धीरे-धीरे पापा की हालत गंभीर हो गई, इसलिए उन्हें आईसीयू में रखा गया था।’ अनिल सिंह, कृष्णनंदन सिंह के बेटे दरअसल, गुरुवार तड़के मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में भीषण आग लगी, जिसमें 6 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 1 युवा, 3 बुजुर्ग और 2 महिलाएं शामिल हैं। इन सभी मृतकों का आईसीयू वार्ड में इलाज चल रहा था। मृतक के आश्रितों को तत्काल बिहार सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपए की मुआवजा राशि सौंप दी गई है। हादसे के शिकार मृतकों की क्या कहानी है? उन्हें क्या बीमारी थी? उनका कब से इलाज चल रहा था? घटना के बाद मृतक के परिजन ने क्या बताया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। आग पर काबू पाए जाने के बाद अस्पताल के अंदर की तस्वीरें देखिए अब हादसे के शिकार मृतकों की कहानी जानिए गांव के लोगों ने ब्लड डोनेट कर जान बचाई, हादसे में जान गंवाई औराई थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव के रहने वाले 30 साल के शशांक कुमार उर्फ सुमित कुमार के पिता संजय चौधरी ने बताया कि मेरा बेटा वित्त विभाग में लोवर डिविजन क्लर्क था। वह पटना में रहता था। 29 मई को शशांक पटना से ड्यूटी के बाद घर आ रहा था। इसी दौरान बोचहां में सड़क हादसे का शिकार हो गया और उसके सिर में गंभीर चोटें आई। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण पहले एसकेएमसीएच और फिर प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दो जून को उनके ब्रेन का ऑपरेशन भी हुआ था। बेटे की स्थिति ठीक नहीं थी, उसे खून की जरूरत थी, गांव के लोगों ने ब्लड डोनेट कर मेरे बेटे की जान बचाई थी। इसके बाद बेटे का ऑपरेशन सक्सेसफुल हो गया था। संजय चौधरी ने आगे बताया कि ऑपरेशन के बाद बेटे को बुधवार को आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। गुरुवार सुबह हादसे ने मेरे बेटे की जान ले ली। शशांक की शादी की तैयारी चल रही थी। लड़की वालों से बातचीत पक्की हो चुकी थी। शशांक को अस्पताल से छुट्टी मिलती तो लड़की वाले उससे मिलने आने वाले थे। 22 मई से इलाज चल रहा था, हालत गंभीर हुई तो आईसीयू में रखा मीनापुर प्रखंड के रामपुरहरी थाना क्षेत्र के गोरिगामा गांव के रहने वाले 76 साल के कृष्ण नंदन सिंह भी इस अग्निकांड के शिकार हो गए। उनके बेटे अनिल सिंह ने बताया कि 22 मई को पिता ने अपने सीने और पेट में दर्द की शिकायत बताई थी। इसके बाद हम लोगों ने उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में एडमिट कराया था। शुरुआती इलाज में उनकी तबीयत ठीक हो रही थी। डॉक्टरों ने कहा था- जल्द ही उन्हें घर ले जा सकेंगे, लेकिन दो-चार दिनों बाद डॉक्टरों ने पापा की हालत गंभीर बताकर आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि आग लगने के बाद अस्पताल प्रशासन ने हम लोगों को पिता की मौत की जानकारी नहीं दी। सुबह जब अस्पताल में आग की खबर मिली तो हम लोग अस्पताल आए। यहां पिता नहीं थे। फिर हम लोग एसकेएमसीएच पहुंचे, पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर पिता की लाश पड़ी थी। 6 महीनों से प्रसाद अस्पताल में डायलिसिस करा रही थी गीता देवी मोतीपुर प्रखंड के बिस्तौलिया गांव की रहने वाली 62 साल की गीता देवी की भी आग की चपेट में आने से मौत हो गई। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं और पिछले छह महीनों से नियमित रूप से प्रसाद हॉस्पिटल में डायलिसिस करा रही थीं। उनकी हालत भी गंभीर थी, लिहाजा उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। अचानक आईसीयू में आग लगने के बाद वे बाहर नहीं निकल सकीं और झुलसकर उनकी मौत हो गई। गीता देवी के तीनों बेटों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इलाज में अब तक लाखों रुपए खर्च हो गए थे। अस्पताल प्रबंधन की गलती ने हमसे हमारी मां को छीन लिया। ब्रेन सर्जरी के बाद आईसीयू में भर्ती थे उदय कुमार शिवहर के तरियानी के रहने वाले 57 साल के उदय कुमार भी इस हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं। उदय कुमार के साला ऋषि वत्स ने बताया कि 4 दिन पहले प्रसाद हॉस्पिटल में गुड़गांव (हरियाणा ) मेदांता से लौटे थे। उदय के ब्रेन की सर्जरी हुई थी। इसके बाद मेदांता से कहा गया था कि इन्हें होम केयर में रखा जाना चाहिए, इसलिए उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराए थे। सुबह 3:30 बजे फोन चोरी हो गया था, इसकी शिकायत करने काउंटर पर जा रहे थे। इसी दौरान भगदड़ जैसी स्थिति मची। पता चला कि अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगी है। जब मैं ऊपर की ओर भागा तो देखा कि गार्ड मरीजों की मदद के बजाए भाग रहे हैं। ये आईसीयू इंचार्ज और स्टाफ की लापरवाही का नतीजा है। जमीन बेच कर इलााज करा रहे थे बृजनंदन राय मनियारी थाना क्षेत्र के पकाही बाघी गांव निवासी बृजनंदन राय को लेकर सबसे ज्यादा सस्पेंस बना रहा। उनकी मौत पटना के एक निजी अस्पताल में गुरुवार देर शाम हो गई। मौत के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, लेकिन परिजन पटना में पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। वे मुजफ्फरपुर में ही पोस्टमॉर्टम की मांग पर अड़ गए। इसे लेकर परिजनों ने डीएम को भी फोन कर हस्तक्षेप की गुहार लगाई। परिजनों कहना था कि जमीन बेचकर इलाज में 5 लाख रुपए लगाए थे। इससे पहले सुबह से शाम तक करीब आठ घंटे तक परिजनों का हंगामा चलता रहा, जिससे अस्पताल प्रशासन और पुलिस के लिए स्थिति संभालनी मुश्किल हो गई। इस दौरान परिजनों ने कांग्रेस की महिला नेता की मौजूदगी में अस्पताल परिसर में हंगामा किया और तोड़फोड़ भी की। आक्रोशित भीड़ ने डॉ. उपेंद्र प्रसाद के चैंबर के गेट को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला टेबल से गेट तोड़ते हुए नजर आ रही है। हंगामे के दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इस दौरान डीएम ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया था। परिजन के अनुसार, सुबह में करीब 10 बजे के बाद पता चला था कि बृजनंदन राय का इलाज प्रशांत हॉस्पिटल में चल रहा है। उससे पहले पटना के मेदांता अस्पताल से वापस कर दिया गया था। ‘ICU में एसी चल रहे थे, इसलिए तेजी से फैली आग’ प्रसाद अस्पताल के कर्मियों की ओर से लापरवाही करने के आरोपों पर हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने सफाई दी है। उन्होंने कहा गया है कि आग लगते ही अस्पताल के कर्मियों, सुरक्षा गार्ड्स और जिला प्रशासन की टीम ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अस्पताल के एक ही फ्लोर पर स्थित आईसीयू (ICU) और सीसीयू (CCU) वार्ड है। शॉर्ट सर्किट की वजह से आईसीयू वार्ड में आग लग गई। चूंकि आईसीयू वार्ड में एयर कंडीशनर (AC) चल रहे थे, इसलिए आग तेजी से फैल गई। हॉस्पिटल मैनेजमेंट की ओर से बताया गया कि घटना के वक्त दोनों वार्डों में कुल 27 मरीज भर्ती थे। कुल 18 मरीजों को सुरक्षित निकाल कर तुरंत अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। 4 मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपने घर जा चुके हैं। हादसे में 5 मरीजों की असामयिक मृत्यु हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अस्पताल परिसर में आए कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से अस्पताल की संपत्ति में तोड़फोड़ की गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में ब्रह्मपुरा थाना में एक लिखित शिकायत (FIR) दर्ज कराई गई है। मेदांता में एडमिट तीन मरीजों से स्वास्थ्य मंत्री ने की मुलाकात मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में हुए अग्निकांड की जानकारी के बाद बिहार के स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली का दौरा बीच में छोड़कर देर शाम पटना लौटे। उन्होंने मेदांता अस्पताल में एडमिट 3 मरीजों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि सभी मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि मरीजों के बेहतर उपचार और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक प्रभावित मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। ‘शशांक 7 दिन पहले पटना से लौट रहा था। इस दौरान बोचहां में सड़क हादसे का शिकार बन गया। उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। एसकेएमसीएच में भर्ती कराया गया, फिर प्रसाद अस्पताल में एडमिट कराया गया था। सफल ऑपरेशन के बाद ICU में था, लेकिन आग लगने की घटना ने मेरे बेटे को उसकी शादी से पहले ही छीन लिया।’ संजय चौधरी, शशांक के पिता पापा की तबीयत ठीक नहीं थी। 22 मई को उन्होंने सीने और पेट में तकलीफ बताई थी। इसके बाद उन्हें प्रसाद अस्पताल में एडमिट कराया था। शुरुआत में डॉक्टरों ने उनकी तबीयत ठीक बताई, लेकिन धीरे-धीरे पापा की हालत गंभीर हो गई, इसलिए उन्हें आईसीयू में रखा गया था।’ अनिल सिंह, कृष्णनंदन सिंह के बेटे दरअसल, गुरुवार तड़के मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में भीषण आग लगी, जिसमें 6 मरीजों की मौत हो गई। इनमें 1 युवा, 3 बुजुर्ग और 2 महिलाएं शामिल हैं। इन सभी मृतकों का आईसीयू वार्ड में इलाज चल रहा था। मृतक के आश्रितों को तत्काल बिहार सरकार की ओर से 4-4 लाख रुपए की मुआवजा राशि सौंप दी गई है। हादसे के शिकार मृतकों की क्या कहानी है? उन्हें क्या बीमारी थी? उनका कब से इलाज चल रहा था? घटना के बाद मृतक के परिजन ने क्या बताया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। आग पर काबू पाए जाने के बाद अस्पताल के अंदर की तस्वीरें देखिए अब हादसे के शिकार मृतकों की कहानी जानिए गांव के लोगों ने ब्लड डोनेट कर जान बचाई, हादसे में जान गंवाई औराई थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव के रहने वाले 30 साल के शशांक कुमार उर्फ सुमित कुमार के पिता संजय चौधरी ने बताया कि मेरा बेटा वित्त विभाग में लोवर डिविजन क्लर्क था। वह पटना में रहता था। 29 मई को शशांक पटना से ड्यूटी के बाद घर आ रहा था। इसी दौरान बोचहां में सड़क हादसे का शिकार हो गया और उसके सिर में गंभीर चोटें आई। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण पहले एसकेएमसीएच और फिर प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। दो जून को उनके ब्रेन का ऑपरेशन भी हुआ था। बेटे की स्थिति ठीक नहीं थी, उसे खून की जरूरत थी, गांव के लोगों ने ब्लड डोनेट कर मेरे बेटे की जान बचाई थी। इसके बाद बेटे का ऑपरेशन सक्सेसफुल हो गया था। संजय चौधरी ने आगे बताया कि ऑपरेशन के बाद बेटे को बुधवार को आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। गुरुवार सुबह हादसे ने मेरे बेटे की जान ले ली। शशांक की शादी की तैयारी चल रही थी। लड़की वालों से बातचीत पक्की हो चुकी थी। शशांक को अस्पताल से छुट्टी मिलती तो लड़की वाले उससे मिलने आने वाले थे। 22 मई से इलाज चल रहा था, हालत गंभीर हुई तो आईसीयू में रखा मीनापुर प्रखंड के रामपुरहरी थाना क्षेत्र के गोरिगामा गांव के रहने वाले 76 साल के कृष्ण नंदन सिंह भी इस अग्निकांड के शिकार हो गए। उनके बेटे अनिल सिंह ने बताया कि 22 मई को पिता ने अपने सीने और पेट में दर्द की शिकायत बताई थी। इसके बाद हम लोगों ने उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में एडमिट कराया था। शुरुआती इलाज में उनकी तबीयत ठीक हो रही थी। डॉक्टरों ने कहा था- जल्द ही उन्हें घर ले जा सकेंगे, लेकिन दो-चार दिनों बाद डॉक्टरों ने पापा की हालत गंभीर बताकर आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। अनिल सिंह ने आरोप लगाया कि आग लगने के बाद अस्पताल प्रशासन ने हम लोगों को पिता की मौत की जानकारी नहीं दी। सुबह जब अस्पताल में आग की खबर मिली तो हम लोग अस्पताल आए। यहां पिता नहीं थे। फिर हम लोग एसकेएमसीएच पहुंचे, पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर पिता की लाश पड़ी थी। 6 महीनों से प्रसाद अस्पताल में डायलिसिस करा रही थी गीता देवी मोतीपुर प्रखंड के बिस्तौलिया गांव की रहने वाली 62 साल की गीता देवी की भी आग की चपेट में आने से मौत हो गई। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं और पिछले छह महीनों से नियमित रूप से प्रसाद हॉस्पिटल में डायलिसिस करा रही थीं। उनकी हालत भी गंभीर थी, लिहाजा उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था। अचानक आईसीयू में आग लगने के बाद वे बाहर नहीं निकल सकीं और झुलसकर उनकी मौत हो गई। गीता देवी के तीनों बेटों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि इलाज में अब तक लाखों रुपए खर्च हो गए थे। अस्पताल प्रबंधन की गलती ने हमसे हमारी मां को छीन लिया। ब्रेन सर्जरी के बाद आईसीयू में भर्ती थे उदय कुमार शिवहर के तरियानी के रहने वाले 57 साल के उदय कुमार भी इस हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल हैं। उदय कुमार के साला ऋषि वत्स ने बताया कि 4 दिन पहले प्रसाद हॉस्पिटल में गुड़गांव (हरियाणा ) मेदांता से लौटे थे। उदय के ब्रेन की सर्जरी हुई थी। इसके बाद मेदांता से कहा गया था कि इन्हें होम केयर में रखा जाना चाहिए, इसलिए उन्हें प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराए थे। सुबह 3:30 बजे फोन चोरी हो गया था, इसकी शिकायत करने काउंटर पर जा रहे थे। इसी दौरान भगदड़ जैसी स्थिति मची। पता चला कि अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगी है। जब मैं ऊपर की ओर भागा तो देखा कि गार्ड मरीजों की मदद के बजाए भाग रहे हैं। ये आईसीयू इंचार्ज और स्टाफ की लापरवाही का नतीजा है। जमीन बेच कर इलााज करा रहे थे बृजनंदन राय मनियारी थाना क्षेत्र के पकाही बाघी गांव निवासी बृजनंदन राय को लेकर सबसे ज्यादा सस्पेंस बना रहा। उनकी मौत पटना के एक निजी अस्पताल में गुरुवार देर शाम हो गई। मौत के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया, लेकिन परिजन पटना में पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। वे मुजफ्फरपुर में ही पोस्टमॉर्टम की मांग पर अड़ गए। इसे लेकर परिजनों ने डीएम को भी फोन कर हस्तक्षेप की गुहार लगाई। परिजनों कहना था कि जमीन बेचकर इलाज में 5 लाख रुपए लगाए थे। इससे पहले सुबह से शाम तक करीब आठ घंटे तक परिजनों का हंगामा चलता रहा, जिससे अस्पताल प्रशासन और पुलिस के लिए स्थिति संभालनी मुश्किल हो गई। इस दौरान परिजनों ने कांग्रेस की महिला नेता की मौजूदगी में अस्पताल परिसर में हंगामा किया और तोड़फोड़ भी की। आक्रोशित भीड़ ने डॉ. उपेंद्र प्रसाद के चैंबर के गेट को क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला टेबल से गेट तोड़ते हुए नजर आ रही है। हंगामे के दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इस दौरान डीएम ने परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया था। परिजन के अनुसार, सुबह में करीब 10 बजे के बाद पता चला था कि बृजनंदन राय का इलाज प्रशांत हॉस्पिटल में चल रहा है। उससे पहले पटना के मेदांता अस्पताल से वापस कर दिया गया था। ‘ICU में एसी चल रहे थे, इसलिए तेजी से फैली आग’ प्रसाद अस्पताल के कर्मियों की ओर से लापरवाही करने के आरोपों पर हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने सफाई दी है। उन्होंने कहा गया है कि आग लगते ही अस्पताल के कर्मियों, सुरक्षा गार्ड्स और जिला प्रशासन की टीम ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। अस्पताल के एक ही फ्लोर पर स्थित आईसीयू (ICU) और सीसीयू (CCU) वार्ड है। शॉर्ट सर्किट की वजह से आईसीयू वार्ड में आग लग गई। चूंकि आईसीयू वार्ड में एयर कंडीशनर (AC) चल रहे थे, इसलिए आग तेजी से फैल गई। हॉस्पिटल मैनेजमेंट की ओर से बताया गया कि घटना के वक्त दोनों वार्डों में कुल 27 मरीज भर्ती थे। कुल 18 मरीजों को सुरक्षित निकाल कर तुरंत अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। 4 मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं और अपने घर जा चुके हैं। हादसे में 5 मरीजों की असामयिक मृत्यु हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अस्पताल परिसर में आए कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से अस्पताल की संपत्ति में तोड़फोड़ की गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में ब्रह्मपुरा थाना में एक लिखित शिकायत (FIR) दर्ज कराई गई है। मेदांता में एडमिट तीन मरीजों से स्वास्थ्य मंत्री ने की मुलाकात मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में हुए अग्निकांड की जानकारी के बाद बिहार के स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली का दौरा बीच में छोड़कर देर शाम पटना लौटे। उन्होंने मेदांता अस्पताल में एडमिट 3 मरीजों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। स्वास्थ्य मंत्री ने मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि सभी मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि मरीजों के बेहतर उपचार और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि प्रत्येक प्रभावित मरीज को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *