यूपी की टीम ने किया हरित खाद मॉडल का अध्ययन:एनआरएलएम की टीम पहुंची बेगूसराय; UP में भी लागू करने की जताई इच्छा

यूपी की टीम ने किया हरित खाद मॉडल का अध्ययन:एनआरएलएम की टीम पहुंची बेगूसराय; UP में भी लागू करने की जताई इच्छा

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से आए चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बेगूसराय में संचालित हरित खाद मॉडल का तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण किया। 2 से 4 जून तक चले इस एक्सपोजर विजिट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने हरित खाद के निर्माण, विपणन और उपयोग की प्रक्रिया को विस्तार से समझा। टीम ने विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर इसके व्यावहारिक पहलुओं को देखा। प्रतिनिधिमंडल में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह बड़ापुर टांडा की सदस्य सुमित्रा यादव, साधना स्वयं सहायता समूह जौतजैना टांडा की सदस्य इन्द्रावती, विकास खंड टांडा के ब्लॉक मिशन मैनेजर दुर्गेश कुमार सिंह और अंबेडकरनगर के जिला मिशन प्रबंधक (आजीविका) आशीष कुमार शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत बेगूसराय जीविका जिला कार्यालय में हुई। जहां जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अविनाश कुमार ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने हरित खाद की अवधारणा, निर्माण प्रक्रिया, विशेषताओं व इसके समक्ष आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी। खेती के तरीकों में सकारात्मक बदलाव अविनाश कुमार ने बताया कि हरित खाद की शुरुआत केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की पहल एवं नवाचार का परिणाम है। आज हरित खाद स्थानीय किसान दीदियों के खेती के तरीकों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने हरित खाद के प्रचार-प्रसार में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के सहयोग की भी सराहना की। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बलिया प्रखंड में स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं कृषि संसाधन सेवियों द्वारा एनटीपीसी से निकलने वाले बॉटम ऐश और गोबर के मिश्रण से हरित खाद तैयार करने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान किसानों एवं कृषि संसाधन सेवियों ने हरित खाद के निर्माण, उपयोग, लाभ व कृषि उत्पादन में इसके प्रभाव से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझा प्रतिनिधिमंडल ने हरित खाद निर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर संपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझा। टीम के सदस्यों ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिसे अन्य राज्यों एवं क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जीविका संकुल संघ की बैठक में भाग लिया और दीदी की रसोई सहित अन्य सामुदायिक गतिविधियों का भी अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल ने बेगूसराय में हरित खाद के सफल क्रियान्वयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की इच्छा जताई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से आए चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बेगूसराय में संचालित हरित खाद मॉडल का तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण किया। 2 से 4 जून तक चले इस एक्सपोजर विजिट के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने हरित खाद के निर्माण, विपणन और उपयोग की प्रक्रिया को विस्तार से समझा। टीम ने विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर इसके व्यावहारिक पहलुओं को देखा। प्रतिनिधिमंडल में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह बड़ापुर टांडा की सदस्य सुमित्रा यादव, साधना स्वयं सहायता समूह जौतजैना टांडा की सदस्य इन्द्रावती, विकास खंड टांडा के ब्लॉक मिशन मैनेजर दुर्गेश कुमार सिंह और अंबेडकरनगर के जिला मिशन प्रबंधक (आजीविका) आशीष कुमार शामिल थे। कार्यक्रम की शुरुआत बेगूसराय जीविका जिला कार्यालय में हुई। जहां जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) अविनाश कुमार ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने हरित खाद की अवधारणा, निर्माण प्रक्रिया, विशेषताओं व इसके समक्ष आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी। खेती के तरीकों में सकारात्मक बदलाव अविनाश कुमार ने बताया कि हरित खाद की शुरुआत केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की पहल एवं नवाचार का परिणाम है। आज हरित खाद स्थानीय किसान दीदियों के खेती के तरीकों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। रासायनिक उर्वरकों पर उनकी निर्भरता कम करने में सहायक सिद्ध हो रही है। उन्होंने हरित खाद के प्रचार-प्रसार में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग के सहयोग की भी सराहना की। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बलिया प्रखंड में स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं कृषि संसाधन सेवियों द्वारा एनटीपीसी से निकलने वाले बॉटम ऐश और गोबर के मिश्रण से हरित खाद तैयार करने की प्रक्रिया का अवलोकन किया। इस दौरान किसानों एवं कृषि संसाधन सेवियों ने हरित खाद के निर्माण, उपयोग, लाभ व कृषि उत्पादन में इसके प्रभाव से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए। उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझा प्रतिनिधिमंडल ने हरित खाद निर्माण इकाइयों का निरीक्षण कर संपूर्ण उत्पादन प्रक्रिया को नजदीक से समझा। टीम के सदस्यों ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिसे अन्य राज्यों एवं क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जीविका संकुल संघ की बैठक में भाग लिया और दीदी की रसोई सहित अन्य सामुदायिक गतिविधियों का भी अवलोकन किया। प्रतिनिधिमंडल ने बेगूसराय में हरित खाद के सफल क्रियान्वयन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे उत्तर प्रदेश में भी लागू करने की इच्छा जताई है।  

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