कलझरानी सरपंच सतवीर कौर को अग्रिम जमानत नहीं:भ्रष्टाचार मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं, काम के बदले रिश्वत केस

कलझरानी सरपंच सतवीर कौर को अग्रिम जमानत नहीं:भ्रष्टाचार मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से राहत नहीं, काम के बदले रिश्वत केस

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरीं बठिंडा के कलझरानी गाँव की सरपंच और आम आदमी पार्टी (AAP) की पूर्व ज़िला अध्यक्ष सतवीर कौर सिद्धू को कानून से बड़ा झटका लगा है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अग्रिम ज़मानत (Anticipatory Bail) की अर्ज़ी को सिरे से खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि हाई कोर्ट से पहले बठिंडा की स्थानीय अदालत भी उन्हें राहत देने से इनकार कर चुकी थी। सरपंच पर रिश्वत काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। विजिलेंस ब्यूरो बठिंडा यह शिकायत गाँव भगवंतगढ़ के निवासी जतिंदर सिंह सोहल की है। उसको आरोप है कि सरपंच सतवीर कौर सिद्धू ने उनसे अपने किसी काम के बदले में रिश्वत की माँग की थी। इस पर विजिलेंस ने 25 जनवरी, 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 7-A के तहत FIR नंबर 2 दर्ज की थी। बचाव पक्ष की दलील: कर्ज की किश्त मांग रही थीं, देरी ​से शिकायत क्यों हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सतवीर कौर सिद्धू के वकीलों ने उन्हें बेकसूर साबित करने के लिए कई तर्क रखे। बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि शिकायतकर्ता से जिस रकम की माँग की जा रही थी, वह कोई रिश्वत नहीं थी। असल में, आरोपी ने शिकायतकर्ता को पहले ₹1.30 लाख का कर्ज़ दिया था, और वह उसी कर्ज़ की एक किस्त वसूल रही थीं। उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि यह शिकायत साल 2023 में की गई थी, जबकि पुलिस ने FIR जनवरी 2026 में दर्ज की। इतनी लंबी देरी इस पूरी शिकायत की विश्वसनीयता और सच्चाई पर बड़े सवाल खड़े करती है। शिकायतकर्ता पक्ष का पलटवार: ‘ऑडियो-वीडियो’ के रूप में पुख्ता सबूत दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता के वकील ने देरी की वजह बताते हुए अदालत के सामने आरोपी के रसूख का हवाला दिया। वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी महिला के बड़े राजनीतिक प्रभाव के चलते मामले को दबाने की कोशिश की गई, जिसके कारण कार्यवाही में इतनी देरी हुई। FIR दर्ज कराने के लिए पीड़ित को बकायदा अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। पीड़ित पक्ष ने जाँच एजेंसी (विजिलेंस) को 11 ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग सौंपी हैं, जो इस केस में भ्रष्टाचार के सबसे महत्वपूर्ण और पुख्ता सबूत माने जा रहे हैं। हिरासत में पूछताछ क्यों है ज़रूरी? सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत के सामने ज़ोर देकर कहा कि आरोपी सरपंच से कथित तौर पर प्राप्त हुए 10 हज़ार रुपये की रकम के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ना बेहद ज़रूरी है। इस पूरे मामले की तह तक जाने और पैसों के अवैध लेन-देन के बाकी पहलुओं का पर्दाफाश करने के लिए आरोपी को पुलिस कस्टडी (हिरासत) में लेकर पूछताछ करना अनिवार्य है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद अब आरोपी पूर्व आप नेता पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

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