Bangladesh Interim Government: शेख हसीना के बांग्लादेश से भागने व रहमान सरकार बनने के बाद अब हसीना समर्थकों के लिए एक खुशखबरी है। अवामी लीग की एक प्रमुख नेता और नारायणगंज नगर निगम की पूर्व महापौर सेलिना हयात आइवी को कासिमपुर जेल से रिहा कर दिया गया है। आइवी की रिहाई पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के जमानत हासिल करने की एक और उल्लेखनीय मिसाल है, इससे पहले संसद की पूर्व अध्यक्ष शिरीन शर्मिन चौधरी को भी जमानत मिल चुकी थी। रिहाई के बाद, आइवी ने मौजूदा प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया और शासन में समावेशी दृष्टिकोण की वकालत की। आइवी ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं चाहती हूं कि सभी मिल कर एक मानवीय सरकार की स्थापना करें’ और साथ ही सरकार से अपील की कि हिरासत में रखे गए अन्य निर्दोष व्यक्तियों के प्रति दया दिखाई जाए।
यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी गिरफ्तारी
ध्यान रहे कि आइवी को पिछले साल सितंबर में एक रात के दौरान चलाए गए अभियान में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी,जिसने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत भागने के बाद सत्ता संभाली थी। असल में 12 फरवरी को हुए चुनाव और उसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद ,आइवी उन कुछ अवामी लीग हस्तियों में से हैं जिन्होंने अदालती प्रणाली के माध्यम से सफलतापूर्वक जमानत प्राप्त की है।
आईसीजी ने नए प्रशासन से पार्टी के भविष्य पर ध्यान देने का आग्रह किया
जैसे-जैसे नई सरकार सत्ता में आ रही है, अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक अवामी लीग की स्थिति पर विचार करना शुरू कर रहे हैं, जिसकी राजनीतिक गतिविधियां अभी भी प्रतिबंधित हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (आईसीजी) ने गुरुवार को एक बयान जारी कर नए प्रशासन से पार्टी के भविष्य पर ध्यान देने का आग्रह किया और कहा कि बांग्लादेशी राजनीति में अवामी लीग के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए मौजूदा प्रतिबंध टिकाऊ होने की संभावना नहीं है ।
बीएनपी सरकार को अवामी लीग के मुद्दे पर विचार करना होगा: थॉमस कीन
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के बांग्लादेश और म्यांमार मामलों के वरिष्ठ सलाहकार थॉमस कीन ने कहा, ‘बीएनपी सरकार को अवामी लीग के भविष्य के राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर भी विचार करना होगा। स्वतंत्रता के बाद से बांग्लादेश की राजनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, पार्टी पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।” (इनपुट : ANI )


