दरभंगा में सांप के डसने से 3 साल के बच्ची की मौत हो गई। एक महीने पहले ही उसका मुंडन हुआ था। मृतक शिवराम गांव निवासी विनय झा का बेटा अनुराग कुमार झा है। बताया जा रहा कि अनुराग मंगलवार को घर में सोया था। इसी दौरन उसे सांप ने डस लिया। जब तक परिजन को पता चलता उसकी तबीयत बिगड़ चुकी थी। ग्रामीणों के कहने पर पिता विनय झा बच्चे को झाड़-फूंक के लिए सुपौल ले गए। जब तबीयत और बिगड़ने लगी तो डीएमसीएच ले जाने का फैसला किया, पर रास्ते में मौत हो गई। मामला बहेड़ थाना क्षेत्र के शिवराम गांव का है। मेरा पोता नहीं, मेरी जिंदगी चला गया
मृतक के दादा रामचंद्र झा अपने पोते को याद करते हुए बार-बार रोह रहे थे। उन्होंने कहा, “अनुराग मेरे बड़े बेटे का एकमात्र संतान था। वह मुझे बहुत प्यार करता था। हमेशा मेरे साथ रहता था। इतना चंचल और समझदार बच्चा था कि पूरे घर की रौनक वही था। रामचंद्र झा ने कहा कि यदि उन्हें पता होता कि बच्चे को बचाने के लिए क्या करना है, तो वे अपनी जमीन-जायदाद, घर-द्वार सब कुछ बेच देते। मेरा पोता नहीं, मेरी जिंदगी चला गया। वह मुझे ‘बाबा’ कहकर जिस प्यार से बुलाता था, वैसा पोता फिर कभी नहीं मिलेगा। आज मेरे लिए पूरी दुनिया अंधेरे में डूब गई है।
समय पर अस्पताल पहुंचने पर जान बचाई जा सकती डॉ. निर्मल कुमार लाल ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर एंटी-वेनम उपचार मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। दरभंगा में सांप के डसने से 3 साल के बच्ची की मौत हो गई। एक महीने पहले ही उसका मुंडन हुआ था। मृतक शिवराम गांव निवासी विनय झा का बेटा अनुराग कुमार झा है। बताया जा रहा कि अनुराग मंगलवार को घर में सोया था। इसी दौरन उसे सांप ने डस लिया। जब तक परिजन को पता चलता उसकी तबीयत बिगड़ चुकी थी। ग्रामीणों के कहने पर पिता विनय झा बच्चे को झाड़-फूंक के लिए सुपौल ले गए। जब तबीयत और बिगड़ने लगी तो डीएमसीएच ले जाने का फैसला किया, पर रास्ते में मौत हो गई। मामला बहेड़ थाना क्षेत्र के शिवराम गांव का है। मेरा पोता नहीं, मेरी जिंदगी चला गया
मृतक के दादा रामचंद्र झा अपने पोते को याद करते हुए बार-बार रोह रहे थे। उन्होंने कहा, “अनुराग मेरे बड़े बेटे का एकमात्र संतान था। वह मुझे बहुत प्यार करता था। हमेशा मेरे साथ रहता था। इतना चंचल और समझदार बच्चा था कि पूरे घर की रौनक वही था। रामचंद्र झा ने कहा कि यदि उन्हें पता होता कि बच्चे को बचाने के लिए क्या करना है, तो वे अपनी जमीन-जायदाद, घर-द्वार सब कुछ बेच देते। मेरा पोता नहीं, मेरी जिंदगी चला गया। वह मुझे ‘बाबा’ कहकर जिस प्यार से बुलाता था, वैसा पोता फिर कभी नहीं मिलेगा। आज मेरे लिए पूरी दुनिया अंधेरे में डूब गई है।
समय पर अस्पताल पहुंचने पर जान बचाई जा सकती डॉ. निर्मल कुमार लाल ने बताया कि सर्पदंश की स्थिति में बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाना ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर एंटी-वेनम उपचार मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।


