पूर्णिया में 7 दिन में 4 मजदूरों की मौत:आंध्र प्रदेश की फैक्ट्री में जहरीली धूल से हुए थे बीमार, इलाज के लिए जमीन बेचनी पड़ी

पूर्णिया में 7 दिन में 4 मजदूरों की मौत:आंध्र प्रदेश की फैक्ट्री में जहरीली धूल से हुए थे बीमार, इलाज के लिए जमीन बेचनी पड़ी

पूर्णिया में पिछले सात दिनों में 4 मजदूरों की मौत हो गई है। 8 का इलाज एक महीने से चल रहा है। जिनकी इलाज के लिए परिजन को जमीन तक बेचनी पड़ी है। ये लोग आंध्र प्रदेश में मजदूरी के लिए गए थे। वहां फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। फैक्ट्री में पत्थरों से‎ टैल्कम पाउडर बनाने का काम होता था। पत्थरों को पीसकर पाउडर बनाया जाता था। मजदूरों का कहना है कि वहां जहरीली धूल उड़ती है। सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे जिस वजह से तबीयत खराब हो गई। धूल भरे माहौल में रोज 12-12 घंटे काम कराया जाता था। धीरे-धीरे सांस लेने में परेशानी, कमजोरी होने लगी। फेफड़े में संक्रमण के बाद हालत बिगड़ने लगी। परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद किसी तरह उन्हें वापस घर लाया गया। बीमार मरीजों में मंगलवार को जियनगंज निवासी मो. मसद (22) की मौत हुई थी। इससे पहले तारानगर निवासी कुंदन कुमार, सर्रा बथना के अरविंद कुमार ऋषि और जियनगंज के मो. मुस्तफा की जान जा चुकी है। मृतक कसबा प्रखंड के जियनगंज, तारानगर के रहने वाले थे। इन लोगों का चल रहा इलाज
मजदूर मो. दानिश का इलाज पटना एम्स और श्रवण‎ कुमार का इलाज जीएमसीएच में चल रहा है। वहीं,‎ सितेश, विक्रम, रंजीत, राजिक और गांगुली का इलाज‎ घर पर ही हो रहा है, जिनकी सांसें ऑक्सीजन सिलेंडर‎ के भरोसे हैं। परिजनों ने बताया कि बच्चों को बचाने ‎के लिए वे अपनी जमीन और मवेशी तक बेच चुके‎ हैं, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा है।​
अधिक रुपए के लालच में गए थे आंध्र प्रदेश से लौटे एक मजदूर मो. सादिक बताते हैं कि करीब एक साल पहले इलाके के दर्जनों युवकों को अधिक वेतन और बेहतर नौकरी का लालच देकर आंध्र प्रदेश के एक मिनरल फैक्ट्री में काम करने के लिए भेजा गया था। धीरे-धीरे सभी मजदूरों की तबीयत बिगड़ने लगी और शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि इलाज में अब तक काफी पैसे खर्च हो चुके है। कई परिवारों ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए जमीन बेच दी, मवेशी तक बेच दिए, लेकिन बीमारी कम होने का नाम नहीं ले रही। आर्थिक तंगी और इलाज का बढ़ता खर्च अब परिवारों के लिए नई मुसीबत बन गई है। मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री में काम के दौरान जब उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्होंने घर लौटने की इच्छा जताई तो उनके साथ मारपीट की भी गई। कसबा विधायक ने परिजन से की मुलाकात कसबा विधायक नितेश सिंह पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे और मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता दिलाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गंभीर रूप से बीमार मजदूरों का बयान लेना शुरू कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पूरे मामले में मजदूरों और उनके परिजनों ने स्थानीय ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि आरोपों के बीच ठेकेदार ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। वो खुद भी उसी फैक्ट्री में काम करता था। पूर्णिया में पिछले सात दिनों में 4 मजदूरों की मौत हो गई है। 8 का इलाज एक महीने से चल रहा है। जिनकी इलाज के लिए परिजन को जमीन तक बेचनी पड़ी है। ये लोग आंध्र प्रदेश में मजदूरी के लिए गए थे। वहां फैक्ट्री में मजदूरी करते थे। फैक्ट्री में पत्थरों से‎ टैल्कम पाउडर बनाने का काम होता था। पत्थरों को पीसकर पाउडर बनाया जाता था। मजदूरों का कहना है कि वहां जहरीली धूल उड़ती है। सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे जिस वजह से तबीयत खराब हो गई। धूल भरे माहौल में रोज 12-12 घंटे काम कराया जाता था। धीरे-धीरे सांस लेने में परेशानी, कमजोरी होने लगी। फेफड़े में संक्रमण के बाद हालत बिगड़ने लगी। परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद किसी तरह उन्हें वापस घर लाया गया। बीमार मरीजों में मंगलवार को जियनगंज निवासी मो. मसद (22) की मौत हुई थी। इससे पहले तारानगर निवासी कुंदन कुमार, सर्रा बथना के अरविंद कुमार ऋषि और जियनगंज के मो. मुस्तफा की जान जा चुकी है। मृतक कसबा प्रखंड के जियनगंज, तारानगर के रहने वाले थे। इन लोगों का चल रहा इलाज
मजदूर मो. दानिश का इलाज पटना एम्स और श्रवण‎ कुमार का इलाज जीएमसीएच में चल रहा है। वहीं,‎ सितेश, विक्रम, रंजीत, राजिक और गांगुली का इलाज‎ घर पर ही हो रहा है, जिनकी सांसें ऑक्सीजन सिलेंडर‎ के भरोसे हैं। परिजनों ने बताया कि बच्चों को बचाने ‎के लिए वे अपनी जमीन और मवेशी तक बेच चुके‎ हैं, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा है।​
अधिक रुपए के लालच में गए थे आंध्र प्रदेश से लौटे एक मजदूर मो. सादिक बताते हैं कि करीब एक साल पहले इलाके के दर्जनों युवकों को अधिक वेतन और बेहतर नौकरी का लालच देकर आंध्र प्रदेश के एक मिनरल फैक्ट्री में काम करने के लिए भेजा गया था। धीरे-धीरे सभी मजदूरों की तबीयत बिगड़ने लगी और शरीर ने जवाब देना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि इलाज में अब तक काफी पैसे खर्च हो चुके है। कई परिवारों ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए जमीन बेच दी, मवेशी तक बेच दिए, लेकिन बीमारी कम होने का नाम नहीं ले रही। आर्थिक तंगी और इलाज का बढ़ता खर्च अब परिवारों के लिए नई मुसीबत बन गई है। मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री में काम के दौरान जब उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और उन्होंने घर लौटने की इच्छा जताई तो उनके साथ मारपीट की भी गई। कसबा विधायक ने परिजन से की मुलाकात कसबा विधायक नितेश सिंह पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे और मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता दिलाई जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी गंभीर रूप से बीमार मजदूरों का बयान लेना शुरू कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पूरे मामले में मजदूरों और उनके परिजनों ने स्थानीय ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि आरोपों के बीच ठेकेदार ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है कि उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। वो खुद भी उसी फैक्ट्री में काम करता था।  

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