NDA सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही-राजेश राम:पूर्णिया में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोले- उपजाऊ जमीनों पर जबरन कब्जा किया जा रहा

NDA सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही-राजेश राम:पूर्णिया में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बोले- उपजाऊ जमीनों पर जबरन कब्जा किया जा रहा

बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम ने राज्य की NDA सरकार पर किसानों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। सीमांचल के जिलों के सांगठनिक दौरे पर पूर्णिया पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार नई शहरीकरण नीति की आड़ में किसानों की इच्छा के खिलाफ उनकी उपजाऊ जमीनों पर जबरन कब्जा कर रही है। उन्होंने इसे किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन करार देते हुए इसके खिलाफ प्रदेश स्तर पर एक अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। गोकुल कृष्ण आश्रम कांग्रेस कार्यालय में मीडिया को राजेश राम ने संबोधित किया। इन्होंने बताया कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य के ज्वलंत और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रखरता से उठाने के लिए ‘प्रेस से मिलिए’ नाम की एक विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। “इस कार्यक्रम की विधिवत लॉन्चिंग जल्द ही की जाएगी। वर्तमान में मैं सीमांचल के जिलों (अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार) के भ्रमण पर हूं। इस अभियान के तहत हमारे जिला अध्यक्ष अपने-अपने जिलों की शीर्ष 3 मुख्य समस्याओं का चयन कर प्रदेश मुख्यालय (सदाकत आश्रम) को भेजेंगे। इसके बाद रिसर्च टीम के इनपुट के आधार पर प्रदेश नेतृत्व, जिला अध्यक्ष, जिले के प्रभारी और स्थानीय वरिष्ठ नेता संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन ‘ज्वलंत और ब्रेकिंग न्यूज़’ वाले मुद्दों को उजागर करेंगे।” किसानों के 5 मौजों की जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप राजेश राम ने पूर्णिया का विशेष उदाहरण देते हुए सरकार की नई शहरीकरण नीति (New Urbanization Policy) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पूर्णिया में शहरीकरण के विस्तार के नाम पर किसानों की मर्जी के बिना, उनसे पूछे बिना भूमि अधिग्रहण का खेल चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने उन संभावित क्षेत्रों (मौजवार) का भी जिक्र किया, जो इस नीति से सीधे प्रभावित हो रहे हैं । जिनमें मुख्य रूप से बायसी, सतकोदरिया, रहुआ, जांझा जैसे मौजों का जिक्र करते हुए कहा कि, “इन 4-5 मौजों का नाम हमारे सामने आया है, जहां के किसान अपनी मर्जी से एक इंच जमीन भी सरकार को नहीं देना चाहते। लेकिन यहां के प्रशासनिक अधिकारी और सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। यह पूरी तरह से तानाशाही है।” सीमांचल में मक्का किसानों की बदहाली पर घेरा ज़मीनी मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने सीमांचल की मुख्य फसल मक्के की खेती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहां का किसान बेहद खून-पसीना बहाकर और कड़ी मेहनत से मक्के की बम्पर पैदावार करता है, लेकिन सरकारी नीतियों की उदासीनता के कारण उन्हें अपनी ही फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम ने राज्य की NDA सरकार पर किसानों के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। सीमांचल के जिलों के सांगठनिक दौरे पर पूर्णिया पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार नई शहरीकरण नीति की आड़ में किसानों की इच्छा के खिलाफ उनकी उपजाऊ जमीनों पर जबरन कब्जा कर रही है। उन्होंने इसे किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन करार देते हुए इसके खिलाफ प्रदेश स्तर पर एक अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। गोकुल कृष्ण आश्रम कांग्रेस कार्यालय में मीडिया को राजेश राम ने संबोधित किया। इन्होंने बताया कि बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने राज्य के ज्वलंत और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रखरता से उठाने के लिए ‘प्रेस से मिलिए’ नाम की एक विशेष कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है। “इस कार्यक्रम की विधिवत लॉन्चिंग जल्द ही की जाएगी। वर्तमान में मैं सीमांचल के जिलों (अररिया, किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार) के भ्रमण पर हूं। इस अभियान के तहत हमारे जिला अध्यक्ष अपने-अपने जिलों की शीर्ष 3 मुख्य समस्याओं का चयन कर प्रदेश मुख्यालय (सदाकत आश्रम) को भेजेंगे। इसके बाद रिसर्च टीम के इनपुट के आधार पर प्रदेश नेतृत्व, जिला अध्यक्ष, जिले के प्रभारी और स्थानीय वरिष्ठ नेता संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन ‘ज्वलंत और ब्रेकिंग न्यूज़’ वाले मुद्दों को उजागर करेंगे।” किसानों के 5 मौजों की जमीन पर जबरन कब्जे का आरोप राजेश राम ने पूर्णिया का विशेष उदाहरण देते हुए सरकार की नई शहरीकरण नीति (New Urbanization Policy) को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पूर्णिया में शहरीकरण के विस्तार के नाम पर किसानों की मर्जी के बिना, उनसे पूछे बिना भूमि अधिग्रहण का खेल चल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने उन संभावित क्षेत्रों (मौजवार) का भी जिक्र किया, जो इस नीति से सीधे प्रभावित हो रहे हैं । जिनमें मुख्य रूप से बायसी, सतकोदरिया, रहुआ, जांझा जैसे मौजों का जिक्र करते हुए कहा कि, “इन 4-5 मौजों का नाम हमारे सामने आया है, जहां के किसान अपनी मर्जी से एक इंच जमीन भी सरकार को नहीं देना चाहते। लेकिन यहां के प्रशासनिक अधिकारी और सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। यह पूरी तरह से तानाशाही है।” सीमांचल में मक्का किसानों की बदहाली पर घेरा ज़मीनी मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने सीमांचल की मुख्य फसल मक्के की खेती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यहां का किसान बेहद खून-पसीना बहाकर और कड़ी मेहनत से मक्के की बम्पर पैदावार करता है, लेकिन सरकारी नीतियों की उदासीनता के कारण उन्हें अपनी ही फसल का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है।  

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