किसान ने नींबू की खेती से बदली तस्वीर:पूर्वी चंपारण के 400 पौधों से कमा रहे अच्छा मुनाफा, ड्रिप सिंचाई से बढ़ा उत्पादन

किसान ने नींबू की खेती से बदली तस्वीर:पूर्वी चंपारण के 400 पौधों से कमा रहे अच्छा मुनाफा, ड्रिप सिंचाई से बढ़ा उत्पादन

पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल अनुमंडल के राजेपुर नवादा पंचायत के किसान संजय सिंह ने पारंपरिक खेती से हटकर नींबू की खेती में सफलता हासिल की है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है, जिससे वे भी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। संजय सिंह ने लगभग तीन से चार एकड़ भूमि पर 400 से अधिक नींबू के पौधे लगाए हैं। ये सभी पौधे अब फल देने लगे हैं, जो उनकी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों की सफलता को दर्शाते हैं। 400 नींबू के पौधे उपलब्ध कराए गए थे
वे बताते हैं कि नींबू की खेती में लागत कम आती है, जबकि मुनाफा अधिक होता है। यही कारण है कि वे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फलदार पौधों की खेती अपनाने की सलाह देते हैं। उन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी और वर्तमान पथ निर्माण विभाग के सचिव कपिल अशोक की पहल पर लगभग 400 नींबू के पौधे उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही, उनके खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे पानी की बचत होती है और उत्पादन में वृद्धि हुई है। संजय सिंह के खेतों में उत्पादित नींबू की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी है। व्यापारी सीधे उनके खेतों से नींबू खरीदते हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिलता है। पपीते की खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा चुके
नींबू के अलावा, संजय सिंह पहले पपीते की खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा चुके हैं, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर भी सराहना हुई थी। उनकी सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक और बागवानी को अपनाकर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। पूर्वी चंपारण जिले के पकड़ीदयाल अनुमंडल के राजेपुर नवादा पंचायत के किसान संजय सिंह ने पारंपरिक खेती से हटकर नींबू की खेती में सफलता हासिल की है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है, जिससे वे भी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। संजय सिंह ने लगभग तीन से चार एकड़ भूमि पर 400 से अधिक नींबू के पौधे लगाए हैं। ये सभी पौधे अब फल देने लगे हैं, जो उनकी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों की सफलता को दर्शाते हैं। 400 नींबू के पौधे उपलब्ध कराए गए थे
वे बताते हैं कि नींबू की खेती में लागत कम आती है, जबकि मुनाफा अधिक होता है। यही कारण है कि वे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फलदार पौधों की खेती अपनाने की सलाह देते हैं। उन्हें तत्कालीन जिलाधिकारी और वर्तमान पथ निर्माण विभाग के सचिव कपिल अशोक की पहल पर लगभग 400 नींबू के पौधे उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही, उनके खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली भी स्थापित की गई है, जिससे पानी की बचत होती है और उत्पादन में वृद्धि हुई है। संजय सिंह के खेतों में उत्पादित नींबू की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी है। व्यापारी सीधे उनके खेतों से नींबू खरीदते हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिलता है। पपीते की खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा चुके
नींबू के अलावा, संजय सिंह पहले पपीते की खेती से भी अच्छा मुनाफा कमा चुके हैं, जिसकी प्रशासनिक स्तर पर भी सराहना हुई थी। उनकी सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक और बागवानी को अपनाकर खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।  

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