हिमाचल हादसे में मौत…एक साथ उठीं चार अर्थियां:ताइक्वांडो प्रतियोगिता हुए शामिल, फिर घूमने निकला था परिवार, गहरी खाई में गिरी कार

हिमाचल हादसे में मौत…एक साथ उठीं चार अर्थियां:ताइक्वांडो प्रतियोगिता हुए शामिल, फिर घूमने निकला था परिवार, गहरी खाई में गिरी कार

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के बैरागढ़-साच पास-किलाड़ मार्ग पर में 29 मई शुक्रवार रात एक अर्टिगा कार करीब 500 मीटर गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 2 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में छत्तीसगढ़ के भिलाई के एक परिवार के 4 लोग शामिल हैं। जिसमें पति बेंगलुरु के आईटी इंजीनियर अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी प्राची और दो बेटों दर्श और अक्षद हैं। अरविंद अपनी पत्नी अपने बच्चों के साथ बेंगलुरु में रहते थे, वहीं जॉब कर रहे थे। परिवार अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद घूमने निकला था। वहीं, मृतकों के शव पांच दिन बाद मंगलवार को चार एंबुलेंसों में रायपुर से दुर्ग जिले के ग्राम कुथरेल पहुंचे। शवों के गांव पहुंचते ही वहां शोक का माहौल छा गया। ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में उमड़ पड़े। दुर्ग राज चंद्राकर समाज के अध्यक्ष प्रदीप चंद्राकर ने बताया कि 2 जून की दोपहर करीब 3:30 बजे चारों शव रायपुर एयरपोर्ट से एंबुलेंस के जरिए गांव लाए गए। उन्होंने कहा कि गांव के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब एक ही परिवार के चार लोगों की अंतिम यात्रा एक साथ निकली। यह दृश्य देखकर गांव के लोग भावुक हो गए और पूरे इलाके में शोक का माहौल छा गया। अरविंद चंद्राकर के पिता श्यामलाल चंद्राकर भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से रिटायर कर्मचारी हैं। अरविंद ने अपनी पढ़ाई भिलाई में पूरी की थी। करीब 20 साल पहले आईटी क्षेत्र में नौकरी मिलने के बाद वे बेंगलुरु में रहने लगे थे। परिजनों ने बताया कि अरविंद पिछले करीब 20 वर्षों से सिस्को आईटी कंपनी में काम कर रहे थे। उनकी शादी को लगभग 15 साल हो चुके थे। उनके दो बेटे दर्श और अक्षद थे। अरविंद दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई रविंद्र चंद्राकर दल्ली राजहरा में एक नर्सिंग कॉलेज का संचालन करते हैं। अब जानिए पूरा मामला गर्मी की छुट्टियों में आए थे गांव, फिर निकल पड़े हिमाचल अरविंद चंद्राकर 1 मई को अपने परिवार के साथ गर्मी की छुट्टियां मनाने गृह ग्राम कुथरेल आए थे। यहां उन्होंने लगभग 15 दिन घरवालों के साथ बिताए और फिर वापस बेंगलुरु लौट गए। इसी दौरान उनके बच्चों को अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में हिस्सा लेना था। प्रतियोगिता के लिए बेंगलुरु से करीब 50 बच्चे ट्रेन के माध्यम से आगरा पहुंचे और वहां से बस द्वारा हिमाचल प्रदेश के डलहौजी गए। प्रतियोगिता खत्म होने के बाद अरविंद अपने परिवार और मित्र पी.जी. कार्तिघायन के परिवार के साथ हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता और बर्फबारी देखने निकल पड़े। सुबह घूमने निकले, रात में खाई में समा गई कार जानकारी के अनुसार 29 मई को दोनों परिवार सुबह करीब 5 बजे डलहौजी से रवाना हुए थे। उन्होंने एक टैक्सी बुक की थी और साच पास क्षेत्र की ओर घूमने निकले थे। शुक्रवार रात करीब 11 बजे चंबा जिले के चुराह उपमंडल के कालावन क्षेत्र के पास वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया। देखते ही देखते कार सड़क से फिसलकर लगभग 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गहरी खाई में गिरने के कारण किसी भी यात्री को बचने का मौका नहीं मिला। जीपीएस लोकेशन से सामने आया हादसा देर रात तक टैक्सी के वापस नहीं लौटने पर वाहन मालिक को चिंता हुई। उसने वाहन की जीपीएस लोकेशन चेक की तो कार कालावन क्षेत्र के पास एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई दी। काफी देर तक कोई गतिविधि नहीं मिलने पर स्थानीय स्तर पर खोजबीन शुरू की गई। शनिवार दोपहर वाहन के खाई में गिरने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। दुर्गम पहाड़ियां बनीं चुनौती, ह्यूमन चेन से निकाले शव दुर्घटना स्थल बेहद दुर्गम था। खड़ी पहाड़ियों, गहरी खाई, पथरीले रास्तों और खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्य में भारी दिक्कतें आईं। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से समन्वय भी प्रभावित हुआ। शनिवार को शवों को निकालना संभव नहीं हो पाया। रविवार सुबह पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोगों ने संयुक्त अभियान शुरू किया। खाई की गहराई को देखते हुए लोगों ने ह्यूमन चेन बनाई और रस्सियों की मदद से एक-एक कर शवों को ऊपर पहुंचाया। कई घंटे तक चले अभियान के बाद सभी आठ शवों को बाहर निकाल लिया गया। इन आठ लोगों की हुई मौत हादसे में टैक्सी चालक विश्वास सल्होता निवासी बनीखेत (चंबा), अरविंद चंद्राकर, उनकी पत्नी प्राची, बेटे दर्श और अक्षद, पी.जी. कार्तिघायन, उनकी पत्नी मनीमाला तथा बेटे नंदन की मौत हुई है। ताइक्वांडो प्रतियोगिता में बच्चों की सफलता का जश्न मनाने निकले इन परिवारों ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि यह यात्रा उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी। हिमाचल की खूबसूरत वादियों में हुआ यह हादसा अब कुथरेल और भिलाई के लोगों की स्मृतियों में एक ऐसी त्रासदी बन गया है, जिसे लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा।

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