Multibagger Stocks: शेयर बाजार में कुछ स्टॉक्स ऐसे होते हैं जो अचानक निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। दी डेवलपमेंट इंजीनियर्स उन्हीं कंपनियों में शामिल है। मंगलवार को कंपनी का शेयर 5% के अपर सर्किट के साथ 655.80 रुपये पर पहुंच गया, जो इसका नया रिकॉर्ड स्तर है। इस शेयर में पिछले 4 दिन से अपर सर्किट लग रहा है। अगर पिछले दो महीनों की परफॉर्मेंस देखें तो कंपनी के शेयर ने निवेशकों का पैसा दोगुने से भी ज्यादा कर दिया है। अप्रैल की शुरुआत में जहां यह शेयर करीब 289 रुपये के आसपास था, वहीं अब यह 650 रुपये के पार पहुंच चुका है। इस तरह करीब 2 महीनों में यह शेयर 127% रिटर्न दे चुका है।
आखिर निवेशक इतने उत्साहित क्यों हैं?
बाजार में किसी शेयर की कीमत तभी तेजी से बढ़ती है, जब उसके पीछे कोई मजबूत वजह हो। इस शेयर के मामले में सबसे बड़ा कारण हाल ही में मिले बड़े ऑर्डर हैं। कंपनी ने पिछले दो दिनों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से करीब 600 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर हासिल किए हैं। ताजा ऑर्डर की कीमत 206.55 करोड़ रुपये है, जो बिजली क्षेत्र से जुड़े एक महारत्न सरकारी EPC ग्रुप से मिला है। कंपनी ने व्यावसायिक कारणों का हवाला देते हुए ग्राहक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
इससे पहले 30 मई को कंपनी और उसकी सहयोगी इकाई को भारत पेट्रोलियम (BPCL) से 386.86 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला था। यह ऑर्डर पाइपिंग सिस्टम के निर्माण और आपूर्ति से जुड़ा है।
कंपनी फंड जुटाने की कर रही तैयारी
निवेशकों की नजर कंपनी के बोर्ड की बैठक पर भी है। 3 जून को होने वाली बैठक में प्रेफरेंशियल आधार पर इक्विटी शेयर जारी करके पूंजी जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। बाजार आमतौर पर ऐसे कदमों को कंपनी की विस्तार योजनाओं से जोड़कर देखता है।
क्या करती है कंपनी?
Dee Development Engineers तेल एवं गैस, बिजली, न्यूक्लियर ऊर्जा, केमिकल और प्रोसेस इंडस्ट्रीज के लिए विशेष पाइपिंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कंपनी हाई-प्रेशर पाइपिंग सिस्टम, इंडस्ट्रियल फिटिंग्स, प्रेशर वेसल्स और कई तरह के इंजीनियरिंग उत्पाद बनाती है। कंपनी का कहना है कि उसके पास फिलहाल करीब 1,940 करोड़ रुपये की मजबूत ऑर्डर बुक मौजूद है।
रेवेन्यू को लेकर बना है अच्छा आउटलुक
कंपनी ने एक अंतरराष्ट्रीय EPC कंपनी के साथ समझौता किया है, जिसके तहत उसकी HRSG पाइप स्पूल फैब्रिकेशन क्षमता का 60% हिस्सा पहले से बुक किया गया है। यह समझौता 2027 से 2029 तक प्रभावी रहेगा और हर साल न्यूनतम 15.27 मिलियन डॉलर का काम मिलने की संभावना है। मैनेजमेंट का मानना है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में पूंजीगत निवेश बढ़ने से कंपनी को आने वाले वर्षों में बड़ा फायदा मिल सकता है।


