कानपुर और आसपास के जिलों से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एलएलआर (हैलट) अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है। अस्पताल की इमरजेंसी पैथोलॉजी को पूरी तरह से मॉडर्नाइज यानी हाईटेक कर दिया गया है। अब यहां मरीजों को प्राइवेट लैब के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पैथोलॉजी विभाग में बेहद आधुनिक और लेटेस्ट मशीनें इंस्टॉल की गई हैं, जिससे अब हार्मोनल, इनफर्टिलिटी (बांझपन) और कैंसर मार्कर जैसी महंगी जांचें भी अस्पताल में ही हो सकेंगी। पैथोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. लुबना खान ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला के साथ मिलकर लंबे समय से इमरजेंसी पैथोलॉजी को अपग्रेड करने का प्रयास चल रहा था, जो अब पूरा हो गया है। पुरानी मशीनों को हटाकर उनकी जगह एडवांस मशीनें लगाई गई हैं, ताकि गरीब मरीजों को महंगी जांचों के लिए भारी-भरकम पैसे न खर्च करने पड़ें। अब AI तकनीक से होगी जांच, कहीं से भी मॉनिटरिंग कर सकेंगे डॉक्टर्स इमरजेंसी पैथोलॉजी में हुए इस बड़े बदलाव में सबसे खास बात यह है कि अब खून की जांचों के लिए ‘नाइन-पार्ट हीमैटोलॉजी एनालाइजर’ मशीन लगाई गई है। पहले यह जांच ‘थ्री-पार्ट एनालाइजर’ से होती थी। इस नई मशीन के साथ एक स्पेशल स्लाइड स्कैनर भी लगाया गया है, जो बहुत जल्द सीधे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक से जुड़ जाएगा। इस हाईटेक स्कैनर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर जैसे ही रिपोर्टिंग करेगा, सीनियर डॉक्टर्स अपने लैपटॉप या कंप्यूटर के जरिए कहीं भी बैठकर उस रिपोर्ट को लाइव देख सकेंगे। आपस में बेहतर तालमेल होने से मरीज को सटीक और बिल्कुल सही रिपोर्ट मिलेगी। इन गंभीर और महंगी बीमारियों का तुरंत चलेगा पता डॉ. लुबना खान ने बताया कि,नई मशीनों के आने से पैथोलॉजी का दायरा काफी बढ़ गया है। अब अस्पताल में ये खास जांचें आसानी से हो सकेंगी। कैंसर मार्कर: महिलाओं में होने वाले ओवरी (अंडाशय) और गर्भाशय के कैंसर के साथ-साथ गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) के कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में हो सकेगी। इनफर्टिलिटी और हार्मोन: जिन दंपत्तियों को गर्भधारण करने में परेशानी आ रही है, उनके इलाज के लिए जरूरी सभी हार्मोनल टेस्ट अब यहीं होंगे। इसके अलावा थायराइड की जांच भी आसानी से होगी।
मैन्युअल सिस्टम खत्म, लाखों मरीजों को चंद घंटों में मिलेगी रिपोर्ट
हैलट अस्पताल में हर महीने लाखों की संख्या में टेस्ट होते हैं, जिसके कारण वर्कलोड बहुत ज्यादा रहता है। पहले कई जांचें डॉक्टरों और स्टाफ को मैन्युअल (हाथ से) करनी पड़ती थीं, जिसकी वजह से मरीजों को रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब मैन्युअल सिस्टम को पूरी तरह खत्म करने के लिए ‘ईएसआर एनालाइजर’ और ‘फाइव-पार्ट एनालाइजर’ जैसी मशीनें आ चुकी हैं। बायोकेमिस्ट्री का भी एक लेटेस्ट एनालाइजर लग गया है और एक और मशीन जल्द आने वाली है। इन ऑटोमेटिक मशीनों की मदद से अब जांचें बेहद कम समय में पूरी हो जाएंगी और मरीजों को रिपोर्ट के लिए घंटों भटकना नहीं पड़ेगा।


