फैक्ट्री गैस कांड में प्रबंधन की लापरवाही आई सामने:रात में काम करवाया, परिवार व प्रशासन को नहीं दी सूचना, प्रबंधक गायब

फैक्ट्री गैस कांड में प्रबंधन की लापरवाही आई सामने:रात में काम करवाया, परिवार व प्रशासन को नहीं दी सूचना, प्रबंधक गायब

पंजाब के औद्योगिक केंद्र लुधियाना के आरके रोड स्थित ‘दीप टूल्स’ फैक्ट्री में हुआ गैस रिसाव हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर की गई अमानवीय लापरवाही है। पाना-चाबी बनाने वाली इस फैक्ट्री के भीतर बिना किसी कानूनी मंजूरी के एक अवैध केमिकल स्टोरेज टैंक बनाया गया था। रात के करीब 2:00 बजे जब बिना किसी सेफ्टी गियर, मास्क या दस्तानों के मजदूरों को जबरन इस जहरीले गटर की सफाई करवाई गई, तो उसमें से निकली घातक गैस ने पिता-पुत्र समेत तीन मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं दिया और उनकी मौके पर ही दम घुटने से मौत हो गई। इस भयावह हादसे के बाद फैक्ट्री प्रबंधन का रवैया और भी संदेहास्पद रहा; उन्होंने न तो तड़पते मजदूरों के परिजनों को सूचित किया और न ही पुलिस-प्रशासन को इसकी जानकारी दी। घटना के करीब 10 घंटे बाद जब मीडिया के जरिए जिला प्रशासन तक बात पहुँची, तब जाकर राहत कार्य शुरू हो सका। एसडीएम जसलीन कौर भुल्लर की प्राथमिक जांच में सुरक्षा उपकरणों का पूरी तरह अभाव पाया गया है। फिलहाल, डीसी हिमांशु जैन के कड़े रुख के बाद मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं और लापरवाह फैक्ट्री मालिकों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। फैक्ट्री प्रबंधन की कारगुजारी पर पांच बड़े सवाल, जानिए.. 1. फैक्ट्री के अंदर ‘अवैध’ केमिकल स्टोरेज टैंक: फैक्ट्री के भीतर बिना किसी कानूनी अनुमति और सुरक्षा मानकों के एक अवैध स्टोरेज टैंक (गटर) बनाया गया था। इस टैंक का इस्तेमाल टूल्स (पाना-चाबी) बनाने के बाद बचने वाले खतरनाक और जहरीले वेस्ट केमिकल को स्टोर करने के लिए किया जा रहा था। इसी टैंक के भीतर समय के साथ बेहद विषैली गैस जमा हो गई, जो ढक्कन खोलते ही काल बन गई। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कैमिकल युक्त वेस्ट को इस तरह क्यों स्टोर किया गया? 2. दिन का काम… रात के अंधेरे में ‘खतरनाक खेल’: प्रबंधन ने इस जहरीले स्टोरेज टैंक को साफ करवाने का काम दिन के उजाले के बजाय जानबूझकर मध्यरात्रि (रात करीब 2:00 बजे) चुना। रात में काम कराने का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि जब गैस रिसाव से मजदूर बेहोश हुए, तो उन्हें समय पर न तो कोई देखने वाला था और न ही तुरंत कोई मेडिकल इमरजेंसी सुविधा मिल सकी। परिजनों का सवाल है कि आखिर प्रबंधन ने रात को क्यों करवाया यह काम? 3. तड़पते रहे मजदूर, परिवार से छुपाया सच: हादसे का शिकार हुए पिता-पुत्र (मान सिंह और अमित) का परिवार रात 2:00 बजे से लेकर सुबह तक लगातार उनके नंबरों पर फोन करता रहा, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने न तो कोई फोन रिसीव किया और न ही खुद परिवार को हादसे की कोई खबर दी। मृतक मान सिंह की बेटी रेनू ने रोते हुए बताया कि सुबह होने के बाद भी प्रबंधन उनके पिता और भाई के बारे में सच छुपाता रहा। परिवार का कहना है कि जब प्रबंधन की गलती थी नहीं थी तो उसने घटना क्यों छुपाई गई? 4. 8 घंटे तक प्रशासन को रखा ‘अंधेरे’ में: प्रशासनिक जांच के मुताबिक, यह भयानक हादसा रात 2:00 बजे हुआ, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने पुलिस या जिला प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। जिला प्रशासन और पुलिस के पास यह सूचना घटना के करीब 10 घंटे बाद मीडिया और स्थानीय लोगों के जरिए पहुंची। लुधियाना के डीसी हिमांशु जैन ने प्रबंधन की इस हरकत को पूरी तरह अस्वीकार्य और अक्षम्य माना है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन 8-10 घंटों में सबूतों को मिटाने या मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही थी? 5. घटना स्थल और अस्पताल में नहीं पहुंचे प्रबंधक: तीन मजदूरों के मरने की बात जब साने आई तो मीडिया से लेकर प्रशासन सभी मौके पर पहुंच गए लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन की तरफ से कोई भी न तो घटना स्थल पर पहुंचा और न ही अस्पताल में। मृतक मान सिंह की बेटी रेनू का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन की तरफ से कोई भी उनके पास नहीं आया। उनका सवाल है कि आखिर प्रबंधन के लोग कहां गायब हो गए? 6. बिना उपकरणों के करवाया काम: फैक्ट्री के भीतर श्रम और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ी हुई थीं। जब एसडीएम जसलीन कौर भुल्लर ने घटनास्थल का जायजा लिया, तो पाया कि फैक्ट्री के अंदर सेफ्टी रूल्स का दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। जहरीली गैस वाले टैंक की सफाई करवाते समय मजदूरों को न तो गैस मास्क दिए गए, न दस्ताने और न ही कोई लाइफ-सपोर्ट उपकरण।
क्या बोले लुधियाना के डीसी हिमांशु जैन? मजिस्ट्रेट जांच के आदेश: डीसी हिमांशु जैन ने बताया कि इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एसडीएम ईस्ट को इस जांच का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो अगले 2 से 4 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे। फैक्ट्री प्रबंधन की बड़ी लापरवाही: डीसी ने बेहद नाराजगी जताते हुए कहा कि रात करीब 2:00 बजे हुए इस हादसे की जानकारी फैक्ट्री प्रबंधन ने प्रशासन या पुलिस को नहीं दी। प्रशासन को इसकी सूचना सुबह करीब साढ़े 10 बजे मीडिया और स्थानीय लोगों के माध्यम से मिली। फैक्ट्री मालिकों की इस प्रशासनिक चूक और लापरवाही पर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। CCTV फुटेज और बयानों की होगी जांच:डीसी के अनुसार हादसे की रात वास्तव में क्या हुआ था, यह जानने के लिए फैक्ट्री के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। और फैक्ट्री के सीसीटीवी डीवीआर कब्जे में लेकर साथ ही वहां मौजूद अन्य मजदूरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। प्रदूषण बोर्ड को सख्त निर्देश: पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) और नगर निगम की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। टीमें यह पता लगाएंगी कि फैक्ट्री के अंदर बने उस गटर या टैंक में कौन सा घातक केमिकल स्टोर किया गया था, जिसके कारण इतनी विषैली गैस बनी। औद्योगिक सुरक्षा पर कड़े आदेश: डीसी ने स्पष्ट किया कि जिले में किसी भी फैक्ट्री में खतरनाक केमिकल या विस्फोटक सामग्री के रख-रखाव में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी फैक्ट्री मालिकों को अपने स्तर पर मॉक ड्रिल करने, औद्योगिक सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखने और आपातकाल के लिए नजदीकी अस्पतालों को पहले से चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। गटर का ढक्कन खोलते ही काल बनकर निकली गैस मृतक मान सिंह (46) की बेटी रेनू ने इस हादसे के पीछे छिपी फैक्ट्री प्रबंधन की मनमानी को उजागर किया है। रेनू के अनुसार, फैक्ट्री के भीतर वेस्टेज केमिकल का एक गटर (टैंक) था। उसके पिता और भाई अमित (28) का मुख्य काम कुछ और था, लेकिन रात के समय फैक्ट्री प्रबंधन उनसे जबरन मलबा उठवाने और सफाई का काम भी करवाता था। घटना वाली रात करीब 2:00 बजे जैसे ही बाप-बेटे ने सफाई के लिए उस गटर का ढक्कन खोला, उसमें से अत्यधिक जहरीली गैस का रिसाव हुआ। गैस इतनी खतरनाक थी कि दोनों को संभलने या बाहर भागने का मौका तक नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनके साथ वहां मौजूद एक अन्य मजदूर श्री राम (56) की भी मौत हो गई। जबकि गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी दीपक और राजिंदर बेहोश हो गए, जिनका इलाज फिलहाल ओसवाल अस्पताल में चल रहा है।

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