Iran Suspends Indirect Talks US: गाजा और लेबनान में इजराइल की चल रही सैन्य कार्रवाई के बीच ईरान ने बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष संदेशों के आदान-प्रदान पर रोक लगा दी है। तेहरान का कहना है कि बातचीत तब तक दोबारा शुरू नहीं होगी, जब तक इजराइल अपना सैन्य अभियान बंद नहीं कर देता और लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से अपनी सेना वापस नहीं बुला लेता।
अमेरिका से शांति वार्ता पर लगा ब्रेक
सोमवार को ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, ईरान ने लेबनान में इजरायल के लगातार हमलों के विरोध में मध्यस्थों के माध्यम से अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान निलंबित कर दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्णय लेबनान में इजरायल द्वारा युद्धविराम के लगातार उल्लंघन के जवाब में लिया गया है। ईरान इसे क्षेत्र में व्यापक युद्धविराम व्यवस्थाओं की प्रमुख शर्तों में से एक मानता है।
मांगें पूरी होने तक रहेगी रोक
तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि गाजा और लेबनान के संबंध में जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक ईरानी वार्ता टीम मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान रोके रखेगी।
ईरानी अधिकारियों और वार्ताकारों ने साफ किया है कि गाजा और लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों को तत्काल रोका जाए और लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी हो।
इजरायली हमलों का दिया जाएगा करारा जवाब
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक इन मुद्दों पर ईरान और ‘प्रतिरोध मोर्चे’ (Resistance Front) का रुख स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी।
इसके साथ ही, ईरान और तथाकथित प्रतिरोध धुरी में शामिल उसके सहयोगी समूहों ने इजरायली हमलों का करारा जवाब देने की तैयारी करने और अतिरिक्त मोर्चे खोलने पर विचार करने का फैसला किया है।
रणनीतिक उपायों के तहत इजरायल और उसके समर्थकों पर दबाव बनाने के लिए ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से बंद करने और ‘बाब अल-मंडाब’ (Bab al-Mandab) जलडमरूमध्य सहित अन्य मोर्चों को सक्रिय करने पर विचार किया जा रहा है।
आपको बता दें कि रविवार को इजरायली सेना ने लेबनान के भीतर करीब 700 मीटर की ऊंचाई पर बने एक बेहद प्राचीन किले ‘बीफोर्ट’ (अल-शकीफ) पर अपना कब्जा जमा लिया है।


