कटनी जिले के शहीद भारतीय सेना के जवान प्रदीप पटेल के माता-पिता अपनी मांगों को लेकर कटनी कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उनका आरोप है कि बेटे के अंतिम संस्कार के समय नेताओं ने जो वादे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। शहीद के माता-पिता का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे धरने से नहीं उठेंगे। धरने पर बैठीं शहीद की मां सखी पटेल ने नेताओं और प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हो गया। अंतिम संस्कार के समय बड़े-बड़े नेताओं ने हाथ जोड़कर वादे किए थे, लेकिन आज उन्हें पूरा कराने के लिए हमें धूप में धरने पर बैठना पड़ रहा है। हम कई बार अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, पर किसी ने हमारी सुध नहीं ली।” क्या हैं परिवार की मुख्य मांगें? क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल का नाम शहीद प्रदीप पटेल के नाम पर रखा जाए। गांव हरदुआ कलां में जहां शहीद का अंतिम संस्कार हुआ था, वहां ‘शहीद स्मारक’ बनाया जाए। स्थानीय स्कूल कैंपस के अंदर शहीद जवान की मूर्ति (प्रतिमा) लगाई जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरणा ले सके। इन नेताओं ने किए थे वादे परिजनों के मुताबिक, सितंबर 2024 में जब प्रदीप पटेल का पार्थिव शरीर आया था, तब मध्य प्रदेश के कई बड़े नेताओं ने बड़े-बड़े दावे किए थे- वे खुद शहीद के गांव हरदुआ कलां पहुंचे थे और अंतिम यात्रा में शामिल होकर इन घोषणाओं को पूरा करने का भरोसा दिया था। इन्होंने भी अंतिम संस्कार के दौरान जनता के सामने इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की बात कही थी। शहादत के समय मुख्यमंत्री ने खजुराहो एयरपोर्ट पर शहीद को श्रद्धांजलि दी थी। साथ ही कटनी जिले के तत्कालीन प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह और प्रशासन ने राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी थी, लेकिन समय बीतने के साथ ही सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया। सिक्किम हादसे में गंवाई थी जान भारतीय सेना के जवान प्रदीप पटेल 5 सितंबर 2024 को सिक्किम के पाक्योंग जिले में सिल्क रूट के पास तैनात थे। ड्यूटी के दौरान सेना की एक गाड़ी अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई थी, जिसमें प्रदीप पटेल की जान चली गई थी। पिछले कई महीनों से आश्वासन मिलने से परेशान होकर आखिरकार माता-पिता को ओबीसी महासभा के साथ मिलकर धरने का रास्ता चुनना पड़ा।


