5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर जल्द ही जी 5 की वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आने वाली हैं। अभिनय देव के निर्देशन में बनी यह सीरीज 5 जून को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। इस नियो-नोयर क्राइम थ्रिलर सीरीज में करिश्मा के साथ जिस्सू सेनगुप्ता, सूर्या शर्मा, सोनी राजदान और अनुभवी अभिनेत्री हेलेन शामिल हैं। वहीं परेश पाहुजा, मेघना मलिक, अजिंक्य देव, के.के. रैना और गायक शान भी विशेष भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस सीरीज और इसकी शूटिंग के अनुभव को लेकर अभिनय देव ने दैनिक भास्कर से बातचीत की।
अपराध से ज्यादा किरदारों की कहानी बताएगी यह सीरीज इस कहानी की सबसे अच्छी बात को लेकर अभिनय ने कहा कि जब मैंने इस पर बेस्ड किताब पढ़ी थी, तब मुझे यह बात बहुत पसंद आई कि यह एक क्राइम स्टोरी की तरह लिखी गई है, लेकिन इसके सभी किरदार बेहद बेहतरीन हैं। किताब में इन पात्रों को बहुत गहराई से लिखा गया है और हमने सीरीज में भी उन्हें उसी संवेदनशीलता के साथ दिखाने की कोशिश की है। ये ऐसे किरदार हैं, जो हमें रोजमर्रा की जिंदगी में तो दिखाई देते हैं, लेकिन फिल्मों में कम नजर आते हैं। कोलकाता की अनदेखी गलियों में हुई इस वेब सीरीज की शूटिंग अभिनय ने बताया कि पूरी सीरीज की शूटिंग वास्तविक लोकेशनों पर की गई है और इसके लिए एक भी सेट नहीं बनाया गया। हमने पूरी शूटिंग कोलकाता में की, लेकिन जानबूझकर शहर के उन हिस्सों को चुना जो आमतौर पर फिल्मों में दिखाई नहीं देते। इसमें आपको कोलकाता का ऐसा चेहरा देखने को मिलेगा, जिसे शायद पहले किसी फिल्म या सीरीज में नहीं दिखाया गया है। कई लोकेशन इतनी रहस्यमयी और भयावह थीं कि अगर किसी को वहां आधे घंटे खड़े रहने के लिए भी कहा जाए, तो वह सहज महसूस नहीं करेगा। सस्पेंस और ड्रामा का संतुलन सबसे बड़ी चुनौती रही क्राइम थ्रिलर बनाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात क्या होती है, इस पर अभिनय ने कहा कि ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट में सस्पेंस और ड्रामा दोनों को साथ लेकर चलना पड़ता है। एक निर्देशक की पकड़ इन दोनों पहलुओं पर समान रूप से मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि दर्शकों को कहानी से जोड़े रखने के लिए रहस्य और भावनात्मक जुड़ाव, दोनों जरूरी हैं। उनके मुताबिक, अगर कोई निर्देशक इन दोनों तत्वों को बराबर महत्व देने की कोशिश करता है, तो वह अपने लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर लेता है, क्योंकि दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता।

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