अस्थाई सपा कार्यालय में बिना अनुमति बकरों की कुर्बानी:पीलीभीत में जिला महासचिव नफीस अहमद पर FIR दर्ज, बोले- यह मेरी निजी संपत्ति

अस्थाई सपा कार्यालय में बिना अनुमति बकरों की कुर्बानी:पीलीभीत में जिला महासचिव नफीस अहमद पर FIR दर्ज, बोले- यह मेरी निजी संपत्ति

पीलीभीत में बकरीद के बाद एक मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिख रहा है। शहर की केजीएन कॉलोनी स्थित एक परिसर में बकरों के वध को लेकर समाजवादी पार्टी के जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने उन पर पशु क्रूरता और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। वहीं, नफीस अहमद ने पूरे मामले को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए आरोपों से इनकार किया है। मामला तब सामने आया जब सिविल लाइन चौकी प्रभारी प्रीतम सिंह ने शहर कोतवाली में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। पुलिस के अनुसार, 1 जून को गश्त के दौरान सूचना मिली कि केजीएन कॉलोनी में स्थित एक परिसर, जहां अस्थायी रूप से समाजवादी पार्टी का कार्यालय संचालित होने की बात सामने आई, वहां बकरीद के अवसर पर बकरों का वध किया गया था। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि 28 से 30 मई के बीच बकरों को रस्सियों से बांधकर रखा गया और बिना प्रशासनिक अनुमति के सार्वजनिक रूप से उनका वध किया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी। ‘अस्थायी कार्यालय’ बना जांच का केंद्र, कई सवाल खड़े पूरे मामले में जिस स्थान को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, वह जांच का अहम बिंदु बन गया है। पुलिस का कहना है कि संबंधित परिसर में सपा का अस्थायी कार्यालय संचालित हो रहा था, जबकि आरोपित पक्ष इस दावे को खारिज कर रहा है। जांच अधिकारी अब यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि जिस स्थान पर कथित रूप से वध किया गया, उसकी वास्तविक स्थिति क्या थी और क्या वहां किसी प्रकार की प्रशासनिक अनुमति ली गई थी। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। सपा नेता बोले- यह मेरा निजी गैराज, पार्टी कार्यालय नहीं मुकदमा दर्ज होने के बाद सपा जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी ने अपनी सफाई भी दी है। उनका कहना है कि जिस जगह का उल्लेख किया जा रहा है, वह उनकी निजी संपत्ति और गैराज है। उसे न तो पार्टी कार्यालय के लिए किराए पर दिया गया है और न ही किसी आधिकारिक अनुबंध के तहत इस्तेमाल किया जाता है। नफीस अहमद का कहना है कि प्रशासन द्वारा पुराना कार्यालय खाली कराए जाने के बाद कार्यकर्ताओं के बैठने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में कभी-कभी उनके निजी परिसर में बैठकें हो जाती थीं, लेकिन उसे पार्टी कार्यालय नहीं कहा जा सकता। ‘महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया, इसलिए निशाना बनाया गया’ सपा नेता ने कार्रवाई के पीछे राजनीतिक कारण होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाल ही में समाजवादी पार्टी ने महंगाई समेत विभिन्न जनहित मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद सत्ता पक्ष के दबाव में उन्हें निशाना बनाकर मुकदमा दर्ज कराया गया है। उधर, पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच के दौरान जुटाए जाने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने जिले की राजनीतिक और सामाजिक हलचल को तेज कर दिया है।

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