इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बेसिक शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपये के कथित गबन मामले में फैसला सुनाते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। अदालत ने अमेठी के गौरीगंज थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 97/2025 की आगे की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया है। गबन की रकम की वसूली के लिए जारी रिकवरी आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शिक्षक श्रवण कुमार द्विवेदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। CBI को सौंपी गई जांच हाईकोर्ट ने CBI लखनऊ के संयुक्त निदेशक को निर्देश दिया है कि वह एफआईआर की जांच अपने हाथ में लें और इसके लिए एक जिम्मेदार टीम गठित करें। अदालत ने अगली सुनवाई तक मामले की स्टेटस रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है। साथ ही अमेठी के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया गया है कि केस डायरी और जांच से जुड़े सभी दस्तावेज तत्काल CBI को सौंपे जाएं। रिकवरी आदेश पर कोर्ट ने उठाए सवाल याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वित्त एवं लेखा कार्यालय तथा कोषागार के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी धन विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया था। मामला सामने आने के बाद एफआईआर दर्ज हुई और जांच शुरू हुई। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने भू-राजस्व की तरह वसूली का आदेश जारी कर दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और संबंधित पक्षों के अधिवक्ता अदालत को यह नहीं बता सके कि किस कानूनी प्रावधान के तहत जिलाधिकारी ने रिकवरी आदेश जारी किया। इस पर अदालत ने कहा कि जब किसी मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज हो चुका है, तब कथित गबन की रकम की वसूली सीधे भू-राजस्व के रूप में नहीं की जा सकती। ऐसी वसूली केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही संभव है। अमेठी के डीएम से मांगा जवाब हाईकोर्ट ने अमेठी के जिलाधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उन्होंने किस कानूनी प्रावधान के तहत रिकवरी आदेश जारी किया। तब तक विवादित रिकवरी आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी। कोर्ट ने जताई व्यापक गड़बड़ी की आशंका सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखा कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी की कथित मिलीभगत से करीब चार करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर किए गए थे। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रकार का अपराध केवल एक जिले तक सीमित नहीं भी हो सकता है और अन्य जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हुई हों, इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 6 करोड़ तक पहुंच सकता है गबन प्रारंभिक जांच में करीब 3.13 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई थी। बाद में जांच में यह राशि बढ़कर 4.34 करोड़ रुपये से अधिक पाई गई। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले में गबन की कुल रकम 6 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है। मामले में शिक्षकों, लेखा लिपिकों और आउटसोर्स कर्मचारियों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद पूरे मामले की जांच CBI करेगी और अदालत को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी।


