डूंगरपुर के श्रीनाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को श्रद्धा और भक्ति का संगम देखने को मिला। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पोथी पूजन किया। कथा के दूसरे दिन बसंतलाल सुथार और माया सुथार ने पूजन का लाभ लिया। आचार्य गोपाल के सानिध्य में मुख्य यजमान शहंशाह परिवार, मदनलाल परिवार, जयेश द्विवेदी और खुशीलाल भावसार परिवार ने श्रीमद्भागवत पोथी पूजन संपन्न किया। सनातन धर्म समिति के महामंत्री मुकेश श्रीमाल ने बताया कि कथावाचक पंडित रघुनंदन दाधीच ने शुकदेव और राजा परीक्षित के जन्म प्रसंग, भगवान के चौबीस अवतारों और शिव-पार्वती की अमर कथा का विस्तार से वर्णन किया। पंडित दाधीच ने कहा कि शिव और पार्वती का दिव्य मिलन प्रेम, त्याग, समर्पण और आदर्श गृहस्थ जीवन का प्रतीक है। उन्होंने अर्धनारीश्वर स्वरूप का उल्लेख करते हुए बताया कि यह शक्ति और पुरुष के एक-दूसरे के पूरक होने का संदेश देता है।
पं. दाधीच ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि वे अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उन्होंने ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र के जाप के महत्व पर प्रकाश डाला, जिससे मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। उन्होंने यह भी बताया कि शिव-पार्वती की अमर कथा के श्रवण से अमृतत्व की प्राप्ति होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा के दौरान पंडितजी ने मधुर भजन ‘कैलाश के निवासी को नमो बार-बार’ और ‘शंकर तेरी जटाओं से बहती है गंगधारा’ प्रस्तुत किए, जिन पर श्रद्धालु झूम उठे। पूरा पंडाल शिव भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। कथा के उपरांत मुरलीधर सूरजमल शाह परिवार की ओर से प्रसाद वितरण किया गया। वहीं, देवेंद्र वर्यानी ने 60 किलो खीर का प्रसाद श्रद्धालुओं में बांटा। कथा विराम के समय मुख्य यजमान और सहयजमान परिवारों ने श्रीमद्भागवत पोथी पूजन और महाआरती का लाभ लिया। इस अवसर पर सनातन धर्म समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, सचिव भूपेश शर्मा सहित समिति के पदाधिकारी, समाजजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।


