मंडला के कान्हा टाइगर रिजर्व अंतर्गत खटिया इको सेंटर में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य संरक्षित क्षेत्रों के साथ-साथ बाहरी जंगलों में भी वैज्ञानिक तरीके से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखना है। इस कार्यशाला में मंडला, बालाघाट और डिंडोरी सहित कुल सात वनमंडलों के लगभग 70 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इनमें परिक्षेत्र अधिकारियों से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटरों तक को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित किया गया। डॉ. एच.एस. पंवार को दी गई श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत कान्हा टाइगर रिजर्व के पहले क्षेत्र संचालक और पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. एच.एस. पंवार को श्रद्धांजलि देकर की गई। वन्यजीव संरक्षण में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए सभी उपस्थितों ने दो मिनट का मौन रखा। एम-स्ट्राइप (M-STrIPES) एप का प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य केंद्र एम-स्ट्राइप मोबाइल एप रहा। अधिकारियों को सिखाया गया कि कैसे गश्त के दौरान इस एप के जरिए वन्यजीवों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों का डेटा दर्ज किया जाता है। इसके बाद फील्ड से मिली जानकारी को कंप्यूटर पर अपलोड कर उसकी रिपोर्ट तैयार करने और विश्लेषण करने का तरीका भी बताया गया। व्यावहारिक प्रशिक्षण और सुरक्षा उपाय प्रतिभागियों को केवल थ्योरी ही नहीं, बल्कि जंगल में पैदल भ्रमण कराकर एप का व्यावहारिक उपयोग भी सिखाया गया। प्रशिक्षण के दौरान फील्ड बायोलॉजिस्ट अजिंक्य देशमुख और कंप्यूटर प्रोग्रामर राजेश ठाकरे ने बारीकियां समझाईं। उप संचालक प्रकाश कुमार वर्मा ने वन्यजीवों में फैलने वाले केनाइन डिस्टेंपर वायरस और उससे बचाव के जरूरी उपायों की जानकारी दी। प्रभावी निगरानी की तैयारी अब ये प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने वनमंडलों में जाकर अन्य कर्मचारियों को ट्रेनिंग देंगे। इससे पूरे क्षेत्र में वन्यजीवों के संरक्षण का काम अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगा। इस दौरान सहायक संचालक आशीष पाण्डेय और सहायक वन संरक्षक हर्ष मेघवाल सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।


