गौतम बुद्ध के प्रधान शिष्य अरहंत सारिपुत्र और महामोग्गलान की पवित्र अस्थियां शुक्रवार रात विशेष विमान से मंगोलिया भेजी गईं। यह पहली बार है जब बुद्ध की अस्थियों के बिना उनके दोनों प्रमुख शिष्यों की अस्थियां किसी दूसरे देश की यात्रा पर भेजी गई हैं। इससे पहले, दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में बुद्ध और उनके दोनों परम शिष्यों की अस्थियों का संगम देखने को मिला। सैकड़ों बौद्ध अनुयायी दिनभर इनके दर्शन के लिए पहुंचे। सांची के बौद्ध भिक्षुओं ने अस्थि कलशों का पूजन किया
सांची स्थित चेतियागिरी विहार से पहुंचे बौद्ध भिक्षुओं ने अस्थि कलशों का विधिवत पूजन किया। देर रात भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर विमान से इन्हें मंगोलिया के लिए रवाना किया गया। महाबोधि सोसायटी श्रीलंका के अध्यक्ष वानगल उपतिस्स नायक थेरो और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन (आईबीसी) के निदेशक कर्नल यश सक्सेना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मंगोलिया गया है। अस्थि कलशों को उलानबाटार स्थित गंडन तेगचेनलिंग मठ में 10 दिनों तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा। मंगोलिया सरकार ने राजकीय अतिथि का दर्जा दिया
मंगोलिया सरकार ने इन अस्थि कलशों को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। जानकारी के अनुसार, मंगोलिया के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वहां के प्रमुख बौद्ध धर्मगुरु भी इन पवित्र अवशेषों के दर्शन करेंगे। भारत सरकार ने अगस्त 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति के साथ हुई चर्चा के दौरान इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया भेजने का आश्वासन दिया था। प्रतिनिधिमंडल में शामिल लेखक शकील सिद्दीकी ने बताया कि मंगोलिया के लोगों के लिए सारिपुत्र और महामोग्गलान केवल बुद्ध के शिष्य नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म के जीवंत प्रमाण हैं। उनके अवशेषों का आगमन वहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। मंगोलिया में इन्हें ऐतिहासिक धरोहर के साथ-साथ आध्यात्मिक शक्ति और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक माना जाता है।


