प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों को पात्रता परीक्षा देनी ही पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दायर रिव्यू पिटीशन पर फैसला देते हुए कहा है कि बच्चों के बेहतर शैक्षिक विकास के लिए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा पास होना जरूरी है। कोर्ट ने अपने फैसले में पात्रता परीक्षा के लिए तय अवधि दो साल में एक साल की और वृद्धि कर दी है। यानी अब 1 सितम्बर 2025 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के पात्रता परीक्षा संबंधी आदेश के आधार पर तीन साल तक शिक्षक पात्रता परीक्षा दे सकेंगे। उत्तीर्ण करने की समय सीमा 3 वर्ष की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में दायर समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सेवा में कार्यरत शिक्षकों (In-service Teachers) के लिए टीईटी यानी टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट पास करना अनिवार्य रखा है। हालांकि कोर्ट ने शिक्षकों को कुछ राहत देते हुए टीईटी उत्तीर्ण करने की समय सीमा को 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी है और नई अंतिम तिथि 31 अगस्त 2028 निर्धारित की है। ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोर ने इस फैसले को लेकर कहा कि ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन इस आदेश की गंभीर समीक्षा कर रहा है। एसोसिएशन का मानना है कि पुराने शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता उनके सेवा अधिकारों के साथ अन्यायपूर्ण है। शिक्षकों ने कहा- फैसला पूरी तरह स्वीकार नहीं हम इस फैसले को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते हैं। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा इस निर्णय के विरुद्ध विधायिका (संसद ) द्वारा आरटीई एक्ट में संशोधन कराने हेतु सड़क से लेकर संसद तक हर संभव प्रयास करेगा। साथ ही, इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका दायर करने के साथ-साथ अन्य सभी संभव न्यायिक उपायों (Judicial Remedies) से भी लड़ाई लड़ेगा। हमारा उद्देश्य केवल शिक्षकों के हितों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी न्यायपूर्ण और व्यावहारिक बनाना है।


