धौलपुर. बाइपास निर्माण किसी शहर को बाहरी ट्रेफिक से निजात दिलाने के लिए होते हैं, जिससे शहरी क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही न हो और स्थानीय ट्रेफिक भी न बिगड़े…। इसको ध्यान में रखते हुए धौलपुर शहर में दो बाइपासों का निर्माण होना है। दोनों की बाइपास आपस में राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ेगे। लेकिन फिलहाल बाइपास के लिए जमीन के बदले जमीन की उपलब्धता को लेकर पेच फंसा हुआ है।
शहर के नजदीक करोड़ों की जगह उपलब्ध कराने को अब जिम्मेदारी पहले से ही डमाडोल चल रही नगर परिषद प्रशासन को दी है। वहीं, सूत्रों के अनुसार एनएच 123 और एनएच 11बी को जोडऩे के लिए बन रहे बाइपास के अलाइमेंट भी चर्चा का विषय बना हुआ है। खास बात ये है कि नवीन बाइपास को भी करीब एक किलोमीटर तक हाइवे के सामांतर निकाला जा रहा है, जिससे भरतपुर की तरफ से आने वाले वाहनों को अतिरिक्त घूूमना होगा, जिससे वाहन चालकों पर भविष्य में अतिरिक्त बोझ पडऩे वाला है। सूत्रों के अनुसार बाइपास के अलाइमेंट को लेकर उच्चाधिकारी ज्यादा कुछ बोलने से कतरा रहे हैं।
कंसलटेंसी टीम ने अधिकारियों के साथ की चर्चा
उधर, गत दिनों मुख्यालय पर बाइपास निर्माण को लेकर बाहर से आई कंसलटेंसी टीम ने चर्चा की। बैठक में सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, नगर परिषद समेत अन्य विभागों के अधिकारी भी सम्मिलित हुए थे। इसमें एनएच 123 को एनएच 11बी से जोडऩा वाले बाइपास विशेष है। सूत्रों के अनुसार बाइपास का कुछ हिस्सा जो करीब एक किलोमीटर होगा वह सामांतर है जबकि यह पहले थर्मल पावर की चारदीवारी से चांदपुर द्वितीय रेलवे पुलिया के पास जोडऩा था। लेकिन अब इसको आगे ले जाया गया है। इस बदलाव से भविष्य में वाहनों को अतिरिक्त फेरा काटना होगा।
जमीन की जिम्मेदारी परिषद पर, इंतजाम मुुश्किल
उधर, बाइपास निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी नगर परिषद प्रशासन को सौंपी है। लेकिन नगर परिषद की हालत पहले ही पतली है। खास बात ये है कि बाइपास बजट घोषणा के चलते प्रशासनिक अधिकारी खासा माथापच्ची कर रहे हैं। वहीं, नगर परिषद के पास जमीन का संकट है और पूर्व में परिषद की ओर से चंबल परियोजना के 132 केवी जीएसएस निर्माण के लिए जगह उपलब्ध करवाई थी लेकिन उसके बदले में परिषद का कोई फायदा नहीं हुआ। इसी तरह परियोजना के लिए लाइन डाली गई थी, उसमें भी परिषद को दूसरी एजेंसी से कोई लाभ नहीं मिला। ऐसे में अब बाइपास के लिए जमीन उपलब्ध करवाना ढेड़ी खीर साबित होता नजर आ रहा है। करोड़ों की जमीन के बदले उतनी की कीमत जमीन संबंधित काश्तकार या भूमि मालिक को देनी होगी।
आपस में कनेक्ट होंगे बाइपास
शहर के बाहरी इलाके में बनने वाले दोनों बाइपास तीन राष्ट्रीय राजमार्गों से भी जुड़ेंगे। इसमें एनएच 123 (धौलपुर.भरतपुर) से एनएच 11बी (धौलपुर-लालसोट) को जोड़ इससे जयपुर और भरतपुर की तरफ से आने वाला ट्रेफिक जो विशेष कर करौली की तरफ जाना है। वह इस बाइपास से गुजर सकेगा। इसी तरह बाइपास एनएच 44 (आगरा.मुंबई हाइवे) से स्टेट हाइवे 2ए (धौलपुर-राजाखेड़ा) को कनेक्ट करेगा। इससे राजाखेड़ा की तरफ जाने वाला यातायात शहर में बिना प्रवेश के जा सकेगा। दोनों परियोजना पर करीब 286 करोड़ से अधिक की लागत आनी है।
बाइपास का ये है बजट
एनएच 123 से एनएच 11बी को जोडऩे वाले बाइपास के लिए करीब 154.64 करोड़ रुपए और दूसरे बाइपास एनएच 44 से स्टेट हाइवे 2 को कनेक्ट करने के लिए 131.70 करोड़ रुपए सडक़ निर्माण पर खर्च होंगे। धौलपुर उपखंड क्षेत्र में बनने वाले दोनों बाइपास क्षेत्र के लिए करीब 29 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। उधर, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन ने बताया कि बैठक में चर्चा हुई थी। अब नगर परिषद को जमीन उपलब्ध करानी है।
– बाइपास निर्माण के लिए जमीन समेत अन्य विषयों पर चर्चा हुई है। इस योजना में जमीन के बदले जमीन देनी है, ऐसे में संबंधित विभाग को भूमि की जानकारी देने के लिए कहा है।
– श्रीनिधि बी टी, जिला कलक्टर धौलपुर


