राजस्व अमला पिछले चार सप्ताह से जमीन के रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ी की जांच कर रहा है। अभी तक डबरा-भितरवार में 5038 सर्वे नंबरों में गलतियां मिल गई हैं। शेष छह अनुविभाग में भी जांच जारी है, पर रफ्तार धीमी है। दैनिक भास्कर ने 24 अप्रैल को ‘किसानों से धोखा; जमीन का हक कागजों में बदला, कहीं ‘अ’ पुत्र ‘ब’ लिखा, कहीं शासकीय पुत्र नहर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे। भितरवार में 60 गांवों के 4241 सर्वे नंबरों के रिकॉर्ड में पटवारी-राजस्व निरीक्षकों को गड़बड़ी मिली हैं। इनमें से 3457 सर्वे नंबरों पर जमीन के मालिकों के काल्पनिक नाम लिखे हैं। यहीं 784 सर्वे नंबरों के खसरों में भूमि स्वामी का नाम खाली है। इस तरह की गड़बड़ी सर्वाधिक भितरवार क्षेत्र में ही हुई है। डबरा के भी 53 गांवों के 797 सर्वे नंबरों में भी ऐसी ही गलतियां हैं। जमीन का रिकॉर्ड देखा तो 5038 सर्वे नंबरों में मिली गड़बड़ी, संख्या और बढ़ेगी…
भितरवार के एसडीएम राजीव समाधिया ने कहा कि ऐसे मामले भी जांच में आए हैं जिनमें खातों का बंटवारा हो चुका है पर मुख्य नंबर खाली है। इन्हें केवल डिलीट करने की प्रक्रिया होगी। काल्पनिक नाम भी मिले हैं। उन्होंने कहा कि 60 में से अधिकतर गांव के प्रकरण तैयार हो चुके हैं। वहीं एडीएम सीबी प्रसाद ने कहा कि गड़बड़ी वाले सर्वे नंबरों की संख्या अभी और बढ़ सकती है, यह 7 हजार तक पहुंच सकती है। इनमें जो निजी भूमि है उनका रिकॉर्ड के आधार पर सुधार हो जाएगा। जो नंबर सरकारी हैं उनकी और जांच होगी। प्रसाद ने कहा कि किसी भी खातेदार से अभिलेख नहीं मांगा जाएगा। रिकॉर्ड राजस्व अमला ही तलाशेगा। इसके बाद खातेदार को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा। चूंकि लगभग सभी प्रकरण पांच साल से अधिक पुराने हैं, इसलिए संशोधन के लिए क्षेत्र के एसडीएम के प्रस्ताव को कलेक्टर-अपर कलेक्टर स्वीकृति के बाद ही अभिलेख ठीक होंगे। गड़बड़ी के पीछे इनका दोष
कंप्यूटर ऑपरेटर: राजस्व रिकॉर्ड वर्ष 2011-12 और 2017-18 में डिजिटल हुआ। ठेका कंपनी के कंप्यूटर ऑपरेटरों को जैसा समझ आया डिटेल भरते गए। मॉनिटरिंग नहीं थी, इसलिए बड़ी संख्या में गलतियां हो गई। पटवारी: वर्ष 2021 और 2023 में राजस्व अभियान चले। पटवारियों ने जल्दबाजी में बिना रिकॉर्ड मिलान किए प्रकरण निपटाए। इसीलिए अ, ब और नहर आदि कई जगह लिखा गया। तहसीलदार-SDM: गलतियां पकड़ में आते ही इन्हें सुधार करना था, नहीं किया। प्रकरण पुराने हुए तो ये पक्षकार को नियम बताने लगे। इसी कारण कई प्रकरण राजस्व न्यायालय में हैं, तारीख लग रही हैं। एक्सपर्ट – बीएम शर्मा, रिटायर संभाग आयुक्त
ऐसी गड़बड़ी प्रदेश भर में, ईमानदारी से हो सुधार
सर्वे नंबरों में ऐसी गलतियां लंबे समय से हो रही हैं और पूरे प्रदेश में हैं। डिजिटलाइजेशन से पहले पटवारी राज था। ऐसे कई उदाहरण हैं जब पटवारियों ने जानबूझकर तो कभी अनजाने में भूल हुई। ग्वालियर में प्रशासन को राजस्व रिकॉर्ड सुधारने का प्रयास पूरी ईमानदारी से कर मंजिल तक पहुंचाना होगा। अफसरों को यह भी देखना होगा कि इस अभियान के दौरान फिर किसी के साथ नाइंसाफी न हो। नियमों के आधार पर जांच और रिकॉर्ड में सुधार की लंबी प्रक्रिया तय है। इसमें पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर सभी के कुछ न कुछ दायित्व तय हैं। कई जिलों में ऐसे प्रकरण राजस्व अमले ने कहा कि ऐसे प्रकरण केवल ग्वालियर में ही नहीं हैं। अंचल व प्रदेश के दूसरे जिलों में भी ऐसी शिकायतें हैं और न्यायालय में इंद्राज दुरुस्ती के प्रकरण दर्ज हैं। वहां भी खातेदार के काल्पनिक नाम, रकबा कम-ज्यादा और सामलाती जैसे शब्द को हटाकर सरकारी लिखने जैसे मामले दर्ज हैं। इनके निराकरण के लिए वहां राजस्व न्यायालय में पेशियां हो रही हैं।


