लखनऊ में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) और सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) ने एक हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में ‘सीएसआईआर-अरोमा मिशन’ के प्रभाव और भविष्य की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सीमैप के सुगंध संदेश सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में 50 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें वैज्ञानिक, किसान, उद्योग प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल थे। कार्यशाला का शुभारंभ पंजीकरण और स्वागत सत्र के साथ हुआ। अगले चरण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक एनपीसी के निदेशक एवं समूह प्रमुख (कृषि व्यवसाय) एस.पी सिंह ने स्वागत भाषण दिया। सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि प्रभाव आकलन अध्ययन से प्राप्त सुझाव मिशन के अगले चरण को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होंगे। एनपीसी के निदेशक (कृषि व्यवसाय) सुनील कुमार सिंह और उप निदेशक डॉ. बजरंग लाल ने प्रभाव आकलन अध्ययन के निष्कर्षों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद, डॉ. संजय कुमार के मार्गदर्शन में सगंध आधारित प्रौद्योगिकी विकास पर एक तकनीकी सत्र आयोजित हुआ। इसमें किसानों, उद्योग संघों और आसवन इकाई संचालकों ने अपने अनुभव साझा किए। महत्वपूर्ण सुझाव पेश किए चर्चा सत्र के दौरान वैज्ञानिक जानकारी की कमी, फसल प्रबंधन, तकनीकी उन्नयन, बाजार पहुंच, मूल्य निर्धारण, बिचौलियों की भूमिका, परिवहन और भंडारण जैसी प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए मजबूत कटाई-पश्चात प्रबंधन, बेहतर प्रसंस्करण एवं भंडारण सुविधाएं, खरीद-वापसी व्यवस्था और वास्तविक समय मूल्य जानकारी हेतु ‘सीएसआईआर-अरोमा मोबाइल ऐप’ जैसे महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। कार्यशाला का एक विशेष आकर्षण सीमैप द्वारा विकसित खस की आसवित जड़ों से उच्च मूल्य वाले सक्रिय बायोचार के निर्माण की तकनीक रही। डॉ. पूजा खरे, डॉ. सुदीप टंडन और उनकी टीम द्वारा विकसित इस तकनीक का हस्तांतरण तमिलनाडु की कंपनी एम/एस सेंटेड रूट्स को किया गया।


