बागपत में बकरीद की नमाज के बाद उठी बड़ी मांग:गाय को मिले राष्ट्रीय माता का दर्जा, सरकार से की सख्त कानून बनाने की अपील

बागपत में बकरीद की नमाज के बाद उठी बड़ी मांग:गाय को मिले राष्ट्रीय माता का दर्जा, सरकार से की सख्त कानून बनाने की अपील

बागपत के खेकड़ा तहसील क्षेत्र के नूरपुर मुज़बिदा गांव में ईद की नमाज के बाद आयोजित एक विशेष बैठक में ग्रामीणों ने गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग उठाई। बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था में गौवंश की अहम भूमिका रही है, इसलिए इसके संरक्षण के लिए केंद्र और राज्य सरकार को ठोस नीति बनानी चाहिए। ईद के बाद जुटे ग्रामीण, गौसंरक्षण पर हुई चर्चा गांव में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए। सभी ने शांतिपूर्ण माहौल में गौवंश संरक्षण, गौशालाओं की स्थिति और बेसहारा पशुओं की समस्या पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि गाय केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय जीवनशैली और खेती-किसानी की रीढ़ भी है। ‘गाय भारतीय संस्कृति की पहचान’ बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सदियों से भारतीय समाज में गाय को पूजनीय माना जाता रहा है। ग्रामीणों का कहना था कि बदलते समय में गौवंश संरक्षण की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गाय को राष्ट्रीय माता घोषित कर उसके संरक्षण के लिए सख्त और प्रभावी कानून बनाए जाएं। गौशालाओं की स्थिति सुधारने की मांग बैठक में बेसहारा गौवंश की समस्या भी प्रमुख मुद्दा रही। ग्रामीणों ने कहा कि कई क्षेत्रों में गौशालाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिससे पशुओं को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही। लोगों ने प्रशासन से गौशालाओं की व्यवस्था बेहतर करने और सड़कों पर घूम रहे बेसहारा गौवंश के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की। ‘देशभर में जागरूकता जरूरी’ उपस्थित लोगों ने कहा कि गौसंरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी भागीदारी जरूरी है। वक्ताओं ने देशभर में गौवंश सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो गौवंश संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है। प्रशासन के जरिए सरकार तक पहुंचेगी मांग बैठक के अंत में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उनकी मांग प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई जाएगी। लोगों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी दिया गया। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और गौवंश संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाएगी।

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