High Heart Rate in Heat: भीषण गर्मी और लू का थपेड़ा सिर्फ हमारी त्वचा को ही नहीं झुलसाता, बल्कि यह हमारे दिल पर भी बहुत भारी पड़ता है। मई-जून की इस तपती गर्मी के बीच अचानक दिल का दौरा (Cardiac Arrest) पड़ने और हार्ट रेट अनियंत्रित होने के मामले तेजी से बढ़े हैं।
गर्मियों में हमारा दिल अचानक इतनी तेजी से क्यों धड़कने लगता है? हीटस्ट्रोक (लू लगना) कैसे देखते ही देखते कार्डियक अरेस्ट की वजह बन जाता है? इन बेहद संवेदनशील और जरूरी सवालों के जवाब गोरखपुर के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रोहित गुप्ता से समझते हैं:
भीषण गर्मी में क्यों अचानक बढ़ जाता है हार्ट रेट?
डॉ. रोहित गुप्ता बताते हैं कि हमारे शरीर का सामान्य तापमान लगभग 37°C होता है। जब बाहर का तापमान 40°C से ऊपर जाता है, तो शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए संघर्ष शुरू कर देता है। शरीर को ठंडा करने के लिए हमारा दिमाग त्वचा की तरफ ब्लड सर्कुलेशन (रक्त प्रवाह) को बढ़ा देता है ताकि पसीने के जरिए गर्मी बाहर निकल सके। इस प्रक्रिया में दिल को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए दिल को सामान्य से दो से तीन गुना अधिक तेजी से पंप करना पड़ता है, जिसके कारण अचानक हार्ट रेट (Heart Rate) बढ़ जाता है और धड़कनें तेज हो जाती हैं।
हीटस्ट्रोक और कार्डियक अरेस्ट का कनेक्शन
डॉ. रोहित गुप्ता ने हीटस्ट्रोक और कार्डियक अरेस्ट के बीच के संबंध को बहुत ही सरल शब्दों में समझाया है:
ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना: तेज गर्मी में लगातार पसीना बहने से शरीर में पानी और नमक की भारी कमी (Dehydration) हो जाती है। इसके कारण ब्लड वॉल्यूम गिर जाता है और ब्लड प्रेशर अचानक बहुत कम हो जाता है, जिससे दिल पर अचानक दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
खून का गाढ़ा होना: डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर में खून गाढ़ा होने लगता है। गाढ़े खून के कारण धमनियों (Arteries) में क्लॉट (खून के थक्के) जमने का खतरा बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर करता है।
मल्टी-ऑर्गन फेलियर: जब कोई व्यक्ति हीटस्ट्रोक (Heatstroke) का शिकार होता है, तो उसके शरीर का तापमान 104°F (40°C) के पार चला जाता है। इस स्थिति में शरीर का थर्मल रेगुलेटरी सिस्टम पूरी तरह फेल हो जाता है। दिल की धड़कनें इतनी तेज हो जाती हैं कि वह शरीर के जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता, जिससे अचानक कार्डियक अरेस्ट आ जाता है।
इन 4 लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, अगर धूप या गर्मी में रहने के दौरान आपको नीचे दिए गए लक्षण महसूस हों, तो यह दिल पर बढ़ते दबाव का इशारा हैं:
- छाती में भारीपन, दर्द या बेचैनी होना।
- अचानक बहुत तेज पसीना आना और चक्कर खाकर गिर जाना।
- सांस लेने में तकलीफ होना या बहुत ज्यादा हांफना।
- धड़कन का अचानक बहुत तेज (Palpitations) या अनियमित हो जाना।
दिल को बचाने के उपाय
- हाइड्रेशन को बनाए रखें
धूप में निकलने से पहले और लौटने के बाद पर्याप्त पानी पिएं। सादे पानी के साथ शिकंजी, छाछ, या ओआरएस (ORS) का घोल लें ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन न बिगड़े।
- पीक ऑवर्स में बाहर न निकलें
जब धूप और लू सबसे तेज हो, तब बाहर जाने से बचें। खासकर जो लोग पहले से ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी के मरीज हैं, उन्हें इस समय सख्त एहतियात बरतनी चाहिए।
- शारीरिक श्रम को सीमित करें
भीषण गर्मी के दिनों में कड़कती धूप या उमस वाले बंद कमरों में भारी एक्सरसाइज या मेहनत वाला काम न करें। इससे दिल पर अचानक कार्डियक वर्कलोड बढ़ जाता है।
- नियमित जांच और दवाइयां
हार्ट और बीपी के मरीज अपनी दवाइयां समय पर लें। अगर गर्मी में लगातार बीपी फ्लक्चुएट (उतार-चढ़ाव) हो रहा हो, तो खुद से दवा बदलने की जगह तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


