पटना नगर निगम सशक्त स्थाई समिति चुनाव 30 मई को:7 सदस्यों का होना है इलेक्शन, 75 पार्षद करेंगे गुप्त मतदान

पटना नगर निगम सशक्त स्थाई समिति चुनाव 30 मई को:7 सदस्यों का होना है इलेक्शन, 75 पार्षद करेंगे गुप्त मतदान

बिहार के नगर निकायों में सशक्त स्थाई समिति के चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। पटना नगर निगम का चुनाव 30 मई को होगा। 7 सदस्यों के चुनाव के लिए 75 पार्षद गुप्त मतदान करेंगे। मेयर गुट फिर से समिति का सदस्य बनने के लिए जुटे हुए हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक दूसरी ओर डिप्टी मेयर के नेतृत्व में मेयर के सशक्त स्थाई समिति के खिलाफ प्रत्याशी को चुनाव में खड़ा करने की तैयारी है। ये चुनाव पहली बार हो रहा है। इससे पहले मेयर ही सदस्यों को चुनती थी। मेयर ने दो पार्षदों को समिति के सदस्य से हटाया था पिछले साल मेयर सीता साहू ने अपने खेमे में रहने वाले पार्षद डॉ. आशीष कुमार सिन्हा और डॉ. इंद्रदीप चंद्रवंशी को सशक्त स्थायी समिति से हटा दिया था। मेयर ने इन दोनों पार्षदों पर बैठक में पूर्व नियोजित तरीके से व्यवधान डालने और निगम का कामकाज बाधित करने का आरोप लगाया था। समिति से हटाए जाने के बाद दोनों पार्षदों ने महापौर सीता साहू पर नियमों की अवहेलना करने का आरोप लगाया था। इसके बाद नगर निगम की बोर्ड बैठक में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस दिखी थी। धक्का-मुक्की और कपड़े फटने तक की नौबत आ गई थी। इनके जगह पर वार्ड नं- 22 की अनिता देवी और वार्ड नं- 34 के कुमार संजीत को मेयर द्वारा समिति का सदस्य बनाया गया था। बिहार विधानसभा सत्र के दौरान गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था अभी तक मेयर, मुख्य पार्षद या अध्यक्ष अपनी पसंद से सदस्यों को नामित करती थी। लेकिन अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया गया है। समिति के सदस्यों का चुनाव निर्वाचित वार्ड पार्षदों की ओर से गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है, जिससे इसकी जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे। बिहार नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2025 का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इस संशोधन के अध्यादेश पर कैबिनेट ने पहले ही मुहर लगा दी थी। छह महीने में सशक्त स्थायी समिति के गठन के लिए निर्वाचन कराने की प्रक्रिया पूरी करने की बात थी। जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि नगर विकास विभाग समय-समय पर मतदान की कार्रवाई से संबंधित प्रक्रिया के बारे में दिशा-निर्देश जारी कर सकेगा। मेयर तानाशाह हो गए थे उनको पार्षद से कोई मतलब नहीं था सशक्त स्थाई समिति के सदस्य रह चुके वार्ड पार्षद इंद्रदीप चंद्रवंशी ने कहा कि इस चुनाव के लिए हम राज्य सरकार को धन्यवाद देंगे। मेयर तानाशाह हो गए थे उनको पार्षद से कोई मतलब नहीं था। उन्हें अपने शहर से कोई मतलब नहीं था। ज्यादातर लोग लूट खसोट में लग गए। बिहार में नगर पालिकाओं के काम करने का स्तर गिरता जा रहा है और लुटेरे हावी हो रहे हैं। पहले सशक्त स्थाई समिति के सदस्य मेयर के डमी लोग होते थे, जो खुले में सांस तक नहीं ले सकते थे, तो खुले में आखिर अपना विचार कैसे प्रकट करते। उन्हें हर हाल में वही बात करना होता था, जो मेयर को अच्छा लगे।
मेयर सीता साहू को लगता था कि सदस्य उनके गुलाम हैं उन्होंने आगे कहा कि ये लोग मेयर की ओर से ही नॉमिनेटेड होते हैं, इसलिए उनके कृपा के पात्र बन जाते हैं। ऐसे में गुलामों का समूह बन जाता है। ये लोग बस मेयर की परिक्रमा करते हैं और शहर के समग्र विकास की बात सिर्फ फाइलों में रह जाती है। अब जहां डिप्टी मेयर का बात नहीं चलता है, वहां किसी और की बात क्या सुनी जाएगी। मेयर सीता साहू को इस बात का गुमान हो गया है कि सशक्त स्थाई समिति उनके गुलाम के तौर पर काम करे। उनके लूटपाट पर अंकुश ना लगाए और हर बुरे कृतियों में समर्थन करें। मैंने और डॉ आशीष सिन्हा ने इस चीज का प्रतिरोध किया था। मेयर का पद सेवा का पद होता है। अब मेयर की कठपुतली नहीं चुनी जाएगी इंद्रदीप चंद्रवंशी ने कहा कि हमें कहा जाता था कि हमने पार्षदों का काम रोका है। जबकि हम तो खुद मेयर के कृपा पात्र थे। हमारे पास उनसे ज्यादा शक्तियां नहीं है। इसका मतलब ये है कि पटना की मेयर निकम्मी है, इसलिए वो हमें रोक नहीं पाई। ये आरोप लगाने के बाद उन्होंने कारण भी नहीं बताया कि हमने क्या गलती की थी। सीता साहू ये नहीं बता सकती थी कि हम उनके बुरे कृत्यों में समर्थन नहीं करते हैं, उनके लूटपाट में अंकुश लगाते हैं, उनके जाहिलपन को उजागर कर देते थे, उनके बेटे का नगर निगम में नाजायज हस्तक्षेप था। अब इस सशक्त स्थाई समिति के चुनाव से सरकार ने हम जैसे लोगों को ताकत दिया है कि काबिल लोग चुनाव लड़े और जीतकर लोगों की सेवा करें। सरकार ने बेबाकी से काम करने और मेयर की गुलामी नहीं करने का मौका दिया है। अब मेयर की कठपुतली नहीं चुनी जाएगी। क्या होता है सशक्त स्थायी समिति बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत सशक्त स्थायी समिति नगर निकाय (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) की सर्वोच्च कार्यकारी निकाय होती है। यह निकाय के सभी वित्तीय, प्रशासनिक और विकास कार्यों के संचालन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार और शक्तिशाली होती है। सशक्त स्थायी समिति की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से बुलाई जाती है, जिसकी अध्यक्षता मेयर या अध्यक्ष करते हैं।
सशक्त स्थायी समिति का मुख्य काम और शक्तियां प्रशासनिक नियंत्रण: नगरपालिका प्रशासन मुख्य रूप से सशक्त स्थायी समिति के निगरानी और मार्गदर्शन में चलता है। नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी इसी समिति के अधीन रहकर कार्य करते हैं। वित्तीय अधिकार: निकाय के बजट प्रस्तावों को तैयार करना, वित्तीय स्वीकृतियां देना और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना इसी समिति का कार्य है। टेंडर और अनुबंध: विकास कार्यों, निर्माण परियोजनाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए टेंडर (निविदा) पास करने और अनुबंध करने का अंतिम अधिकार इसी के पास होता है। योजना और नीति निर्माण: शहर के विकास, स्वच्छता, जलापूर्ति, सड़क निर्माण और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना। नियम और उप-विधियां: नगरपालिका अधिनियम के अंतर्गत शहर के सुचारू संचालन के लिए उप-विधियां बनाने का प्रस्ताव तैयार करना। कर और शुल्क निर्धारण: विभिन्न नागरिक सेवाओं, व्यापार लाइसेंस और संपत्ति कर का प्रस्ताव तैयार कर लागू करना। बिहार के नगर निकायों में सशक्त स्थाई समिति के चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। पटना नगर निगम का चुनाव 30 मई को होगा। 7 सदस्यों के चुनाव के लिए 75 पार्षद गुप्त मतदान करेंगे। मेयर गुट फिर से समिति का सदस्य बनने के लिए जुटे हुए हैं। वहीं, सूत्रों के मुताबिक दूसरी ओर डिप्टी मेयर के नेतृत्व में मेयर के सशक्त स्थाई समिति के खिलाफ प्रत्याशी को चुनाव में खड़ा करने की तैयारी है। ये चुनाव पहली बार हो रहा है। इससे पहले मेयर ही सदस्यों को चुनती थी। मेयर ने दो पार्षदों को समिति के सदस्य से हटाया था पिछले साल मेयर सीता साहू ने अपने खेमे में रहने वाले पार्षद डॉ. आशीष कुमार सिन्हा और डॉ. इंद्रदीप चंद्रवंशी को सशक्त स्थायी समिति से हटा दिया था। मेयर ने इन दोनों पार्षदों पर बैठक में पूर्व नियोजित तरीके से व्यवधान डालने और निगम का कामकाज बाधित करने का आरोप लगाया था। समिति से हटाए जाने के बाद दोनों पार्षदों ने महापौर सीता साहू पर नियमों की अवहेलना करने का आरोप लगाया था। इसके बाद नगर निगम की बोर्ड बैठक में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस दिखी थी। धक्का-मुक्की और कपड़े फटने तक की नौबत आ गई थी। इनके जगह पर वार्ड नं- 22 की अनिता देवी और वार्ड नं- 34 के कुमार संजीत को मेयर द्वारा समिति का सदस्य बनाया गया था। बिहार विधानसभा सत्र के दौरान गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था अभी तक मेयर, मुख्य पार्षद या अध्यक्ष अपनी पसंद से सदस्यों को नामित करती थी। लेकिन अब इस प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया गया है। समिति के सदस्यों का चुनाव निर्वाचित वार्ड पार्षदों की ओर से गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है, जिससे इसकी जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे। बिहार नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2025 का गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इस संशोधन के अध्यादेश पर कैबिनेट ने पहले ही मुहर लगा दी थी। छह महीने में सशक्त स्थायी समिति के गठन के लिए निर्वाचन कराने की प्रक्रिया पूरी करने की बात थी। जारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि नगर विकास विभाग समय-समय पर मतदान की कार्रवाई से संबंधित प्रक्रिया के बारे में दिशा-निर्देश जारी कर सकेगा। मेयर तानाशाह हो गए थे उनको पार्षद से कोई मतलब नहीं था सशक्त स्थाई समिति के सदस्य रह चुके वार्ड पार्षद इंद्रदीप चंद्रवंशी ने कहा कि इस चुनाव के लिए हम राज्य सरकार को धन्यवाद देंगे। मेयर तानाशाह हो गए थे उनको पार्षद से कोई मतलब नहीं था। उन्हें अपने शहर से कोई मतलब नहीं था। ज्यादातर लोग लूट खसोट में लग गए। बिहार में नगर पालिकाओं के काम करने का स्तर गिरता जा रहा है और लुटेरे हावी हो रहे हैं। पहले सशक्त स्थाई समिति के सदस्य मेयर के डमी लोग होते थे, जो खुले में सांस तक नहीं ले सकते थे, तो खुले में आखिर अपना विचार कैसे प्रकट करते। उन्हें हर हाल में वही बात करना होता था, जो मेयर को अच्छा लगे।
मेयर सीता साहू को लगता था कि सदस्य उनके गुलाम हैं उन्होंने आगे कहा कि ये लोग मेयर की ओर से ही नॉमिनेटेड होते हैं, इसलिए उनके कृपा के पात्र बन जाते हैं। ऐसे में गुलामों का समूह बन जाता है। ये लोग बस मेयर की परिक्रमा करते हैं और शहर के समग्र विकास की बात सिर्फ फाइलों में रह जाती है। अब जहां डिप्टी मेयर का बात नहीं चलता है, वहां किसी और की बात क्या सुनी जाएगी। मेयर सीता साहू को इस बात का गुमान हो गया है कि सशक्त स्थाई समिति उनके गुलाम के तौर पर काम करे। उनके लूटपाट पर अंकुश ना लगाए और हर बुरे कृतियों में समर्थन करें। मैंने और डॉ आशीष सिन्हा ने इस चीज का प्रतिरोध किया था। मेयर का पद सेवा का पद होता है। अब मेयर की कठपुतली नहीं चुनी जाएगी इंद्रदीप चंद्रवंशी ने कहा कि हमें कहा जाता था कि हमने पार्षदों का काम रोका है। जबकि हम तो खुद मेयर के कृपा पात्र थे। हमारे पास उनसे ज्यादा शक्तियां नहीं है। इसका मतलब ये है कि पटना की मेयर निकम्मी है, इसलिए वो हमें रोक नहीं पाई। ये आरोप लगाने के बाद उन्होंने कारण भी नहीं बताया कि हमने क्या गलती की थी। सीता साहू ये नहीं बता सकती थी कि हम उनके बुरे कृत्यों में समर्थन नहीं करते हैं, उनके लूटपाट में अंकुश लगाते हैं, उनके जाहिलपन को उजागर कर देते थे, उनके बेटे का नगर निगम में नाजायज हस्तक्षेप था। अब इस सशक्त स्थाई समिति के चुनाव से सरकार ने हम जैसे लोगों को ताकत दिया है कि काबिल लोग चुनाव लड़े और जीतकर लोगों की सेवा करें। सरकार ने बेबाकी से काम करने और मेयर की गुलामी नहीं करने का मौका दिया है। अब मेयर की कठपुतली नहीं चुनी जाएगी। क्या होता है सशक्त स्थायी समिति बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत सशक्त स्थायी समिति नगर निकाय (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) की सर्वोच्च कार्यकारी निकाय होती है। यह निकाय के सभी वित्तीय, प्रशासनिक और विकास कार्यों के संचालन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार और शक्तिशाली होती है। सशक्त स्थायी समिति की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से बुलाई जाती है, जिसकी अध्यक्षता मेयर या अध्यक्ष करते हैं।
सशक्त स्थायी समिति का मुख्य काम और शक्तियां प्रशासनिक नियंत्रण: नगरपालिका प्रशासन मुख्य रूप से सशक्त स्थायी समिति के निगरानी और मार्गदर्शन में चलता है। नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी इसी समिति के अधीन रहकर कार्य करते हैं। वित्तीय अधिकार: निकाय के बजट प्रस्तावों को तैयार करना, वित्तीय स्वीकृतियां देना और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना इसी समिति का कार्य है। टेंडर और अनुबंध: विकास कार्यों, निर्माण परियोजनाओं और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए टेंडर (निविदा) पास करने और अनुबंध करने का अंतिम अधिकार इसी के पास होता है। योजना और नीति निर्माण: शहर के विकास, स्वच्छता, जलापूर्ति, सड़क निर्माण और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए योजनाएं बनाना और उन्हें लागू करना। नियम और उप-विधियां: नगरपालिका अधिनियम के अंतर्गत शहर के सुचारू संचालन के लिए उप-विधियां बनाने का प्रस्ताव तैयार करना। कर और शुल्क निर्धारण: विभिन्न नागरिक सेवाओं, व्यापार लाइसेंस और संपत्ति कर का प्रस्ताव तैयार कर लागू करना।  

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