सड़क दुर्घटना बैंक कर्मी की मौत, जीजा-मौसेरा भाई जख्मी:नवादा से दिल्ली जाने वाला था आज, एंबुलेंस कॉल सेंटर की लंबी प्रक्रिया से परिजन परेशान

सड़क दुर्घटना बैंक कर्मी की मौत, जीजा-मौसेरा भाई जख्मी:नवादा से दिल्ली जाने वाला था आज, एंबुलेंस कॉल सेंटर की लंबी प्रक्रिया से परिजन परेशान

नवादा में बुधवार रात सड़क दुर्घटना में बाइक सवार की मौत हो गई, जबकि उसका मौसेरा भाई और जीजा गंभीर रूप से घायल हो गया है। जिन्हें बेहतर इलाज के लिए नवादा सदर अस्पताल से रेफर किया गया है। घटना हिसुआ थाना क्षेत्र में हाई स्कूल के पास हुई। मृतक की पहचान महादेव बीघा मोड़ निवासी शंभू पंडित का बेटा शिवम कुमार (30) के रूप में हुई है। वो एक बैंक में कार्यरत था। घायलों की पहचान मौसेरे भाई रोशन कुमार और जीजा मंटू कुमार के रूप में हुई है। शिवम एक महीने पहले अपने मौसेरे भाई की शादी में छुट्टी लेकर आया था। आज वो दिल्ली जाने वाला था। इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने पर 20 मिनट बर्बाद परिवार का आरोप है कि आपातकालीन नंबर 102 पर कॉल करने पर नाम, जिला, अस्पताल, रेफर नंबर, डॉक्टर का नाम, घटना का विवरण और रिश्तेदारी जैसे दर्जनों सवाल पूछे जाते हैं, जिसमें लगभग 20 मिनट से अधिक का समय बर्बाद हो जाता है। परिजनों ने बताया कि घायल व्यक्ति को इमरजेंसी वार्ड के बाहर ही छोड़ दिया गया था और उसे ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। हालांकि, एंबुलेंस कॉल सेंटर की लंबी प्रक्रिया के कारण उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सरकारी एंबुलेंस व्यवस्था बेहतर थी, लेकिन जब से स्वास्थ्य विभाग ने यह सेवा नई जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी है, तब से स्थिति और खराब हो गई है। कॉल सेंटर द्वारा ड्राइवर को फॉरवर्ड करने के बाद भी, कॉल सेंटर की अनुमति के बिना एंबुलेंस अस्पताल से बाहर नहीं निकलती है। एंबुलेंस सेवा को सरल बनाने की अपील ड्राइवर भी बिना मंजूरी के मरीज को नहीं ले जा सकते, अन्यथा उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि एंबुलेंस सेवा को और अधिक सरल, तेज और मानवीय बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से किसी की जान को खतरा न हो। परिजनों ने जोर देकर कहा कि “इमरजेंसी में हर मिनट मायने रखता है।” नवादा में बुधवार रात सड़क दुर्घटना में बाइक सवार की मौत हो गई, जबकि उसका मौसेरा भाई और जीजा गंभीर रूप से घायल हो गया है। जिन्हें बेहतर इलाज के लिए नवादा सदर अस्पताल से रेफर किया गया है। घटना हिसुआ थाना क्षेत्र में हाई स्कूल के पास हुई। मृतक की पहचान महादेव बीघा मोड़ निवासी शंभू पंडित का बेटा शिवम कुमार (30) के रूप में हुई है। वो एक बैंक में कार्यरत था। घायलों की पहचान मौसेरे भाई रोशन कुमार और जीजा मंटू कुमार के रूप में हुई है। शिवम एक महीने पहले अपने मौसेरे भाई की शादी में छुट्टी लेकर आया था। आज वो दिल्ली जाने वाला था। इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने पर 20 मिनट बर्बाद परिवार का आरोप है कि आपातकालीन नंबर 102 पर कॉल करने पर नाम, जिला, अस्पताल, रेफर नंबर, डॉक्टर का नाम, घटना का विवरण और रिश्तेदारी जैसे दर्जनों सवाल पूछे जाते हैं, जिसमें लगभग 20 मिनट से अधिक का समय बर्बाद हो जाता है। परिजनों ने बताया कि घायल व्यक्ति को इमरजेंसी वार्ड के बाहर ही छोड़ दिया गया था और उसे ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी। हालांकि, एंबुलेंस कॉल सेंटर की लंबी प्रक्रिया के कारण उन्हें काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सरकारी एंबुलेंस व्यवस्था बेहतर थी, लेकिन जब से स्वास्थ्य विभाग ने यह सेवा नई जेन प्लस प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी है, तब से स्थिति और खराब हो गई है। कॉल सेंटर द्वारा ड्राइवर को फॉरवर्ड करने के बाद भी, कॉल सेंटर की अनुमति के बिना एंबुलेंस अस्पताल से बाहर नहीं निकलती है। एंबुलेंस सेवा को सरल बनाने की अपील ड्राइवर भी बिना मंजूरी के मरीज को नहीं ले जा सकते, अन्यथा उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि एंबुलेंस सेवा को और अधिक सरल, तेज और मानवीय बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से किसी की जान को खतरा न हो। परिजनों ने जोर देकर कहा कि “इमरजेंसी में हर मिनट मायने रखता है।”  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *