West Asia Crisis: Crude Oil की कीमतों में आग से रुपया बेहाल, Dollar के मुकाबले 44 पैसे टूटा

West Asia Crisis: Crude Oil की कीमतों में आग से रुपया बेहाल, Dollar के मुकाबले 44 पैसे टूटा
बाजार में बुधवार को कोल इंडिया के ओएफएस को लेकर काफी हलचल देखने को मिली हैं। सरकार की ओर से कंपनी में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया शुरू होते ही संस्थागत निवेशकों ने बड़ी संख्या में बोलियां लगाई हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार पहले ही दिन करीब 19 हजार करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई हैं, जिसने बाजार विशेषज्ञों को भी चौंका दिया।
बता दें कि सरकार कोल इंडिया में अपनी 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही हैं। इसके तहत 12.32 करोड़ से ज्यादा शेयर बाजार में उतारे गए हैं। शेयरों का फ्लोर प्राइस 412 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। वहीं इस इश्यू में 1 प्रतिशत का ग्रीन शू विकल्प भी शामिल किया गया हैं, जिसे मजबूत मांग मिलने पर इस्तेमाल किया जा सकता हैं।
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार गैर-खुदरा यानी संस्थागत निवेशकों ने 45 करोड़ से ज्यादा शेयरों के लिए आवेदन किया हैं। यह उनके लिए आरक्षित हिस्से से आठ गुना ज्यादा बताया जा रहा हैं। खास बात यह रही कि निवेशकों ने 436.69 रुपये प्रति शेयर के संकेतात्मक भाव पर बोलियां लगाईं, जो फ्लोर प्राइस से काफी ऊपर हैं।
गौरतलब है कि इतनी मजबूत मांग के बाद अब यह संभावना बढ़ गई हैं कि सरकार ग्रीन शू विकल्प का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। अगर ऐसा होता हैं तो सरकार अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचकर और ज्यादा राशि जुटा सकती हैं।
कोल इंडिया के शेयरों में भी बाजार में तेजी देखने को मिली हैं। बुधवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर 1.01 प्रतिशत बढ़कर 462.90 रुपये पर बंद हुआ हैं। इससे पहले मंगलवार को शेयर 458.25 रुपये पर बंद हुआ था। फ्लोर प्राइस को मंगलवार के बंद भाव से करीब 10 प्रतिशत कम रखा गया था ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके हैं।
बता दें कि चालू वित्त वर्ष में यह सरकार का दूसरा बड़ा ओएफएस हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8.08 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 2266 करोड़ रुपये जुटाए थे। सरकार इस समय विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के जरिए राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण से 80 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा हैं। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान 33,837 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा माना जा रहा हैं।

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