हरियाणा कॉलेजों में स्नातक दाखिले के लिए 31 तक आवेदन:नई शिक्षा नीति के तहत होगी सभी कक्षाओं की पढ़ाई, अब आठ विषय पढ़ने होंगे

हरियाणा कॉलेजों में स्नातक दाखिले के लिए 31 तक आवेदन:नई शिक्षा नीति के तहत होगी सभी कक्षाओं की पढ़ाई, अब आठ विषय पढ़ने होंगे

हरियाणा के विभिन्न कॉलेजों में स्नातक कक्षाओं में दाखिले की ऑनलाइन प्रक्रिया जारी है। उच्चतर शिक्षा विभाग के एडमिशन पोर्टल पर विद्यार्थी 31 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस वर्ष भी सभी दाखिले नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत होंगे। पुरानी शिक्षा नीति के अंतिम बैच के पास आउट होने के बाद अब सभी कक्षाओं की पढ़ाई नई नीति के अनुसार होगी। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय, झज्जर के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित भारद्वाज ने बताया कि वर्ष 2024 से हरियाणा के सभी कॉलेजों में नई शिक्षा नीति पूरी तरह लागू हो गई है। इसके कारण उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों के बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। पहले स्नातक प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों को चार विषय पढ़ने होते थे, जबकि नई व्यवस्था के तहत अब आठ विषय पढ़ने होंगे। तालमेल बैठाने में आ रही दिक्कत एक ओर जहां कॉलेजों में नई शिक्षा नीति लागू हो रही है, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयों के सामने परीक्षा संचालन और परिणाम घोषित करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। नई और पुरानी दोनों शिक्षा नीतियों के तहत अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण विश्वविद्यालयों को तालमेल बैठाने में कठिनाई आ रही है। उदाहरण के तौर पर, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक में पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक परीक्षाएं शुरू हो जाती थीं। लेकिन इस बार पुरानी और नई दोनों स्कीमों के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाओं के कारण परीक्षाएं 18 मई से शुरू हो सकीं। दिसंबर में हुई परीक्षाओं के परिणाम भी मई तक जारी होते रहे। वर्तमान में नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि पिछले सत्र की परीक्षाएं अभी भी चल रही हैं। पिछले सत्र के दौरान खाली सीटों को भरने के लिए 27 अक्टूबर तक दाखिले किए गए थे और इसके एक महीने बाद ही दिसंबर में परीक्षाएं शुरू हो गई थीं। दाखिलों की दौड़ और परीक्षाओं के इस ‘चक्रव्यूह’ के बीच नई और पुरानी व्यवस्थाओं के बीच तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बदल गई है परिभाषा अब डिग्री को प्रोग्राम के नाम से जाना जाता है और सब्जेक्ट अब कोर्स के नाम से पुकारा जाता है। अब बीए (पास कोर्स) को बीए (मल्टी डिसिप्लिनरी), बीएससी (मेडिकल) को बीएससी (लाइफ साइंस) और बीएससी (नॉन मेडिकल) को बीएससी (फिजिकल साइंस ) के नाम से जाना जाता है। चार साल में मिलेगी डिग्री पुराने 03 वर्षीय यूजी प्रोग्राम को अब 04 वर्ष का कर दिया गया है। पुराना तीन वर्षीय ऑनर्स प्रोग्राम भी 04 साल के सिंगल मेजर प्रोग्राम में बदल गया है। हालांकि विद्यार्थी विभिन्न चरण पूरा करने के बाद पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं और संबंधित विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार सभी शर्तों को पूरा करने के बाद योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। एक साल के बाद यूजी सर्टिफिकेट, दो साल के बाद यूजी डिप्लोमा, तीन साल के बाद प्रमुख विषय में यूजी डिग्री, चार साल के बाद प्रमुख विषय में यूजी ऑनर्स या ऑनर्स के साथ रिसर्च डिग्री देने का प्रावधान किया गया है। पढ़ने होंगे कई विषय हर चार साल के मल्टी डिसिप्लिनरी यूजी प्रोग्राम में मेजर कोर्स (डीएससी), माइनर कोर्स (एमआईसी), मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स (एमडीसी), एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (एईसी), स्किल एन्हांसमेंट कोर्स (एसईसी), वैल्यू एडेड कोर्स (वीएसी) तथा इंटर्नशिप और शोध का प्रावधान है। स्नातक कक्षाओं के पहले सेमेस्टर में विद्यार्थियों को तीन मेजर कोर्स, एक माइनर कोर्स, एक स्किल एनहांसमेट कोर्स, एक मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स, एक एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स और एक वैल्यू एडेड कोर्स यानि कुल आठ पेपर पढ़ने पड़ते हैं। लचीली है नई शिक्षा नीति नई शिक्षा नीति बहुत लचीली है। अब कला, विज्ञान और वाणिज्य की पारम्परिक सीमायें टूट रही हैं। आर्ट्स का विद्यार्थी कॉमर्स का विषय पढ़ सकता है और विज्ञान का विद्यार्थी संगीत का ज्ञान प्राप्त कर सकता है। हर विद्यार्थी को अपनी एबीसी आईडी बनवानी पड़ती है, जिसे एकेडेमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट कहा जाता है, जिससे विद्यार्थियों का शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित हो जाता है।

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