सहरसा में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई:डीबी रोड स्थित प्रतिष्ठान से नाबालिग बालक रेस्क्यू, प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

सहरसा में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई:डीबी रोड स्थित प्रतिष्ठान से नाबालिग बालक रेस्क्यू, प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी

सहरसा शहर में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे “धावा दल अभियान” के तहत मंगलवार को एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की गई। श्रम विभाग और जिला हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने शहर के डीबी रोड स्थित एक प्रतिष्ठान में छापेमारी कर एक बाल श्रमिक को मुक्त कराया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और कई प्रतिष्ठान संचालकों में डर का माहौल देखा गया। जानकारी के अनुसार, प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि डीबी रोड स्थित एक दुकान में लंबे समय से एक नाबालिग बालक से मजदूरी कराई जा रही है। सूचना मिलते ही श्रम विभाग, जिला प्रशासन और चाइल्डलाइन की संयुक्त टीम सक्रिय हो गई। जिला हेल्पलाइन की समन्वयक टुसी कुमारी के नेतृत्व में टीम ने संबंधित प्रतिष्ठान पर पहुंचकर जांच शुरू की। ऑडियो-वीडियो साक्ष्य के आधार पर हुई पुष्टि छापेमारी के दौरान टीम ने मौके पर मौजूद बालक से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में बालक के नाबालिग होने और वहां काम करने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने ऑडियो और वीडियो साक्ष्य भी जुटाए, जिसके आधार पर बाल श्रम कराए जाने का मामला स्पष्ट हो गया। जांच पूरी होने के बाद टीम ने बालक को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर प्रतिष्ठान से मुक्त कराया। अधिकारियों ने बताया कि बच्चे को आगे की प्रक्रिया के तहत सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन अभियान का नेतृत्व कर रहीं जिला हेल्पलाइन की कोऑर्डिनेटर टुसी कुमारी ने कहा कि बाल श्रम कानूनन अपराध है और इससे बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराना उनके शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रतिष्ठानों पर नजर बनाए हुए है, जहां बच्चों से काम कराए जाने की शिकायत मिलती है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा रही है। लोगों से सहयोग की अपील टुसी कुमारी ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी होटल, दुकान, फैक्ट्री, गैराज या अन्य प्रतिष्ठान में बाल श्रम होता दिखे तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन, श्रम विभाग या चाइल्डलाइन को दें, ताकि बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जा सके। उन्होंने कहा कि कई बार आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चे मजदूरी करने लगते हैं, लेकिन समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। बालक के परिवार और सामाजिक स्थिति की होगी जांच रेस्क्यू किए गए बालक के संबंध में प्रशासन आगे की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चे के परिजनों की जानकारी जुटाई जा रही है और उसकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति की भी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाल कल्याण समिति के माध्यम से बच्चे को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उसकी पढ़ाई की व्यवस्था करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। अभियान से प्रतिष्ठानों में मचा हड़कंप मंगलवार को हुई इस कार्रवाई के बाद शहर के कई प्रतिष्ठानों में हड़कंप की स्थिति देखी गई। खासकर होटल, ढाबा, चाय दुकान और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिकों को लेकर चर्चा तेज हो गई। प्रशासन की कार्रवाई के बाद कई दुकानदार सतर्क नजर आए। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी इस तरह का अभियान लगातार जारी रहेगा। हर मंगलवार चलाया जाता है धावा दल अभियान जिला प्रशासन द्वारा बाल श्रम उन्मूलन के उद्देश्य से प्रत्येक मंगलवार को “धावा दल अभियान” चलाया जाता है। इस अभियान के तहत श्रम विभाग, जिला प्रशासन, चाइल्डलाइन और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम विभिन्न प्रतिष्ठानों में छापेमारी करती है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाना भी है, ताकि बच्चे मजदूरी के बजाय स्कूल जाएं और उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। प्रशासन ने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी लगातार अभियान चलाकर ऐसे मामलों पर कार्रवाई की जाएगी। सहरसा शहर में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे “धावा दल अभियान” के तहत मंगलवार को एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की गई। श्रम विभाग और जिला हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने शहर के डीबी रोड स्थित एक प्रतिष्ठान में छापेमारी कर एक बाल श्रमिक को मुक्त कराया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और कई प्रतिष्ठान संचालकों में डर का माहौल देखा गया। जानकारी के अनुसार, प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि डीबी रोड स्थित एक दुकान में लंबे समय से एक नाबालिग बालक से मजदूरी कराई जा रही है। सूचना मिलते ही श्रम विभाग, जिला प्रशासन और चाइल्डलाइन की संयुक्त टीम सक्रिय हो गई। जिला हेल्पलाइन की समन्वयक टुसी कुमारी के नेतृत्व में टीम ने संबंधित प्रतिष्ठान पर पहुंचकर जांच शुरू की। ऑडियो-वीडियो साक्ष्य के आधार पर हुई पुष्टि छापेमारी के दौरान टीम ने मौके पर मौजूद बालक से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में बालक के नाबालिग होने और वहां काम करने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने ऑडियो और वीडियो साक्ष्य भी जुटाए, जिसके आधार पर बाल श्रम कराए जाने का मामला स्पष्ट हो गया। जांच पूरी होने के बाद टीम ने बालक को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर प्रतिष्ठान से मुक्त कराया। अधिकारियों ने बताया कि बच्चे को आगे की प्रक्रिया के तहत सुरक्षित स्थान पर भेजा गया है। बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का हनन अभियान का नेतृत्व कर रहीं जिला हेल्पलाइन की कोऑर्डिनेटर टुसी कुमारी ने कहा कि बाल श्रम कानूनन अपराध है और इससे बच्चों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराना उनके शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रतिष्ठानों पर नजर बनाए हुए है, जहां बच्चों से काम कराए जाने की शिकायत मिलती है। प्रशासन की ओर से समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर ऐसे मामलों में कार्रवाई की जा रही है। लोगों से सहयोग की अपील टुसी कुमारी ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी होटल, दुकान, फैक्ट्री, गैराज या अन्य प्रतिष्ठान में बाल श्रम होता दिखे तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन, श्रम विभाग या चाइल्डलाइन को दें, ताकि बच्चों को शोषण से मुक्त कराया जा सके। उन्होंने कहा कि कई बार आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चे मजदूरी करने लगते हैं, लेकिन समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। बालक के परिवार और सामाजिक स्थिति की होगी जांच रेस्क्यू किए गए बालक के संबंध में प्रशासन आगे की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चे के परिजनों की जानकारी जुटाई जा रही है और उसकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति की भी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर बाल कल्याण समिति के माध्यम से बच्चे को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उसकी पढ़ाई की व्यवस्था करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। अभियान से प्रतिष्ठानों में मचा हड़कंप मंगलवार को हुई इस कार्रवाई के बाद शहर के कई प्रतिष्ठानों में हड़कंप की स्थिति देखी गई। खासकर होटल, ढाबा, चाय दुकान और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बाल श्रमिकों को लेकर चर्चा तेज हो गई। प्रशासन की कार्रवाई के बाद कई दुकानदार सतर्क नजर आए। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी इस तरह का अभियान लगातार जारी रहेगा। हर मंगलवार चलाया जाता है धावा दल अभियान जिला प्रशासन द्वारा बाल श्रम उन्मूलन के उद्देश्य से प्रत्येक मंगलवार को “धावा दल अभियान” चलाया जाता है। इस अभियान के तहत श्रम विभाग, जिला प्रशासन, चाइल्डलाइन और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम विभिन्न प्रतिष्ठानों में छापेमारी करती है। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाना भी है, ताकि बच्चे मजदूरी के बजाय स्कूल जाएं और उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। प्रशासन ने कहा कि बच्चों से मजदूरी कराने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और आगे भी लगातार अभियान चलाकर ऐसे मामलों पर कार्रवाई की जाएगी।  

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