जैसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका ने उठाया, वैसा ही कुछ ताइवान में भी होने जा रहा? सामने आया चीन का खतरनाक प्लान

जैसे वेनेजुएला के राष्ट्रपति को अमेरिका ने उठाया, वैसा ही कुछ ताइवान में भी होने जा रहा? सामने आया चीन का खतरनाक प्लान

China-Taiwan Conflict: ताइवान और चीन के बीच तनाव बढ़ता दिख रहा है। हाल ही में ताइवान की नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (NSB) ने दावा किया है कि सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाई जा रही जानकारी के जरिए एक संगठित अभियान चल रहा है, जिसका मकसद लोगों की सोच को प्रभावित करना है। साथ ही NSB ने चीन और अमेरिका के संबंधों और प्लान को लेकर बड़ा खुलासा किया है।

शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बैठक के बाद चीन का नया खेल शुरू

ताइवान की नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो (NSB) ने कहा है कि उसने लगभग 100 संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट ग्रुप्स की पहचान की है, जिन्होंने चीन के बीजिंग में हुई शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की बैठक के बाद 9,000 से ज्यादा पोस्ट शेयर किए।

NSB के डायरेक्टर त्साई मिंग-येन के मुताबिक, इन पोस्टों में यह दिखाने की कोशिश की गई कि चीन और अमेरिका के रिश्तों में बदलाव आ रहा है और ताइवान को लेकर अमेरिका का समर्थन कमजोर हो रहा है। इन संदेशों में यह भी दावा किया गया कि दोनों देशों (चीन-अमेरिका) के बीच रीयूनिफिकेशन से शांति आएगी।

NSB ने आगे बताया कि ये अकाउंट्स आपस में सामान्य तरीके से जुड़े नहीं थे, लेकिन वे एक ही समय पर और एक जैसी बातें पोस्ट कर रहे थे, जिससे शक बढ़ा कि यह किसी संगठित अभियान का हिस्सा है। एजेंसी ने इस जानकारी को कई सरकारी विभागों के साथ साझा किया और ताइवान के राष्ट्रपति को भी इसकी जानकारी दी।

बैठक के बाद ताइवान के लिए पीछे हटते दिखे थे ट्रंप

इस महीने चीन में हुई अपनी यात्रा और शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान को लेकर पीछे हटते दिखे थे। उनका रुख स्पष्ट नजर नहीं आ रहा था।

अमेरिका लौटने के बाद एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि वह चाहते हैं कि चीन और ताइवान के बीच तनाव कम हो और दोनों देश शांति बनाए रखें। जब उनसे पूछा गया कि इस बैठक के बाद ताइवान को ज्यादा सुरक्षित महसूस करना चाहिए या कम, तो उन्होंने जवाब दिया कि स्थिति न्यूट्रल है और अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि वह किसी तरह का युद्ध नहीं चाहते, क्योंकि अमेरिका को लड़ाई के लिए 9,500 मील का सफर करना पड़ेगा। इसलिए उनका फोकस शांति बनाए रखने पर है। वहीं चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा बताता है और उसे मुख्य भूमि से जोड़ना चाहता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र मानता है और अपनी सुरक्षा पर जोर देता है। यही कारण है कि इसके लिए वह अमेरिका का साथ भी चाहता है। लेकिन ट्रंप और शी जिनपिंग के बैठक के बाद नजारा बदला हुआ दिखाई दे रहा है।

अब सवाल यही है कि ताइवान के लिए अमेरिका का पीछे हटना चीन के लिए बड़ा मौका है। ऐसे में वह आगे ताइवान के साथ क्या करने वाला है, देखना होगा?

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