ग्वालियर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की तैयारी:तिघरा डैम में बचा सिर्फ 90 दिन का पानी, 17 मोहल्लों में 15 दिन से नहीं पहुंच रहा

ग्वालियर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की तैयारी:तिघरा डैम में बचा सिर्फ 90 दिन का पानी, 17 मोहल्लों में 15 दिन से नहीं पहुंच रहा

ग्वालियर में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में पानी की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं। 17 इलाके तो ऐसे हैं, जिनमें पिछले 15 दिन से प्रेशर से पानी नहीं आ रहा है। उधर, ग्वालियर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले तिघरा डैम भी तेजी से खाली हो रहा है। जल संसाधन विभाग का अनुमान है कि अगले 90 दिन में डैम खाली हो जाएगा, ऐसे में नगर निगम एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई की तैयारी में जुट गया है। हालांकि इसे जुलाई से लागू किया जाएगा। निगम ने एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जो जल्द ही मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) और निगम परिषद की बैठक में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि यह हालात तभी बनेंगे, जब मानसून समय से नहीं आएगा। विभाग ने नगर निगम को आगाह किया जल संसाधन विभाग ने नगर निगम को पत्र लिखकर आगाह किया है कि इस वर्ष अल-नीनो प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। ऐसे में उपलब्ध जल भंडारण का बेहद सावधानी से उपयोग करना जरूरी हो गया है। विभाग के कार्यपालन यंत्री पंकज कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी बढ़ने के साथ पानी की मांग लगातार बढ़ रही है और तिघरा का जलस्तर तेजी से घट रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में पानी अक्टूबर तक चल सकता है, लेकिन एक दिन छोड़कर सप्लाई करने का अंतिम निर्णय नगर निगम को लेना है। टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भर पा रहीं शहर में जल संकट के शुरुआती असर अब साफ दिखाई देने लगे हैं। कई इलाकों में पानी की टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भर पा रही हैं, जिससे अंतिम छोर तक बसे क्षेत्रों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। लोगों को कम प्रेशर से पानी मिलने की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने राहत के तौर पर 30 निजी टैंकर किराए पर लेने की मंजूरी दे दी है। फिलहाल निगम के 52 सरकारी टैंकर पहले से ही अलग-अलग क्षेत्रों में जलापूर्ति कर रहे हैं। निगम ने जलापूर्ति के लिए पानी की मात्रा बढ़ाई इस मामले में एक विरोधाभासी स्थिति भी सामने आई है। एक ओर नगर निगम पानी बचाने के लिए एक दिन छोड़कर सप्लाई की योजना बना रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर में रोजाना जलापूर्ति की मात्रा बढ़ा दी गई है। पहले प्रतिदिन 12.20 एमसीएफडी पानी सप्लाई किया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 12.90 एमसीएफडी कर दिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब पानी सीमित है तो सप्लाई बढ़ाने का फैसला किस आधार पर लिया गया। वैकल्पिक जल स्रोतों पर तत्काल काम करना जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून समय पर नहीं आया या बारिश सामान्य से कम हुई तो आने वाले महीनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में जल संरक्षण, लीकेज रोकने और वैकल्पिक जल स्रोतों पर तत्काल काम करना जरूरी हो गया है। इन क्षेत्रों में पानी की किल्लत शहर के शिंदे की छावनी, घोसीपुरा, सिंधिया नगर, हनुमान घाटी, क्रेशर कॉलोनी, टावर कॉलोनी, किलागेट, आरामील, रेशममिल, चंदनपुरा, गुड़ी-गुड़ा का नाका, आदित्यपुरम, शताब्दी पुरम, किला तलहटी, गिरवाई, मोतीझील और किशनबाग सहित कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। कई क्षेत्रों में नलों में पानी नहीं पहुंच रहा और लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कई-कई दिन पानी नहीं आता प्रगति नगर निवासी गीता राजपूत का कहना है कि अभी रोज सप्लाई होने के बावजूद कई-कई दिन पानी नहीं आता। ऐसे में एक दिन छोड़कर सप्लाई शुरू होने से परेशानी और बढ़ जाएगी। वहीं वार्ड-2 निवासी नर्मदा यादव ने बताया कि कम प्रेशर के कारण पानी घर तक नहीं पहुंचता और लोगों को घंटों मोटर चलानी पड़ती है, जिससे बिजली बिल भी बढ़ रहा है। सुरेंद्र चौहान ने कहा कि उनके वार्ड का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण हर साल पानी की समस्या रहती है। समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं किरण वर्मा ने कहा कि जनता सुबह से पानी के लिए फोन करती है, लेकिन पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल पा रही है। टैंकर से पानी दे रहे, दुरुपयोग रोकने कार्रवाई कर रहे नगर निगम के अपर आयुक्त प्रदीप तोमर ने बताया कि जहां भी पानी की समस्या सामने आ रही है वहां टैंकर और सप्लाई के माध्यम से व्यवस्था की जा रही है। साथ ही पानी की बर्बादी रोकने के लिए धुलाई सेंटर जैसे स्थानों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई का प्रस्ताव अभी तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द एमआईसी में रखा जाएगा।

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