बक्सर के सारिमपुर-अहिरौली स्थित मां गंगा के पावन तट पर मंगलवार को श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा श्रीवरदराज मंदिर परिसर से शुरू हुई। श्रद्धालु गाजे-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ मां गंगा के घाट पहुंचे, जहां विधि-विधान से गंगाजल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालु कलश लेकर वापस मंदिर पहुंचे। पूरे रास्ते वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति गीत और जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा। महायज्ञ 26 मई से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान के साथ महायज्ञ की शुरुआत हुई। कलश यात्रा के दौरान महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली, जबकि युवाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। श्रद्धालुओं में खासा उत्साह था। इस धार्मिक आयोजन में विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे भी शामिल हुए। उन्होंने संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराएं भारत की पहचान हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और लोगों में धर्म व संस्कृति के प्रति आस्था को मजबूत बनाते हैं। कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे आयोजकों ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित यह महायज्ञ 26 मई से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा। इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा, अष्टोत्तर-सहस्र ताम्र कलशाभिषेक, हवन-पूजन और कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंतिम दिन पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कलश यात्रा को लेकर पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल रहा। जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए शिविर लगाए गए थे और ग्रामीणों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। गंगा घाट और मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। आयोजन को लेकर प्रशासन और समिति की ओर से व्यवस्था भी की गई थी। बक्सर के सारिमपुर-अहिरौली स्थित मां गंगा के पावन तट पर मंगलवार को श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कलश यात्रा श्रीवरदराज मंदिर परिसर से शुरू हुई। श्रद्धालु गाजे-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ मां गंगा के घाट पहुंचे, जहां विधि-विधान से गंगाजल भरा गया। इसके बाद श्रद्धालु कलश लेकर वापस मंदिर पहुंचे। पूरे रास्ते वैदिक मंत्रोच्चार, भक्ति गीत और जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा। महायज्ञ 26 मई से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और वैदिक अनुष्ठान के साथ महायज्ञ की शुरुआत हुई। कलश यात्रा के दौरान महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा निकाली, जबकि युवाओं और बुजुर्गों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। श्रद्धालुओं में खासा उत्साह था। इस धार्मिक आयोजन में विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे भी शामिल हुए। उन्होंने संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया और श्रद्धालुओं के साथ यात्रा में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और वैदिक परंपराएं भारत की पहचान हैं। ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं और लोगों में धर्म व संस्कृति के प्रति आस्था को मजबूत बनाते हैं। कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे आयोजकों ने बताया कि पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित यह महायज्ञ 26 मई से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा। इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा, अष्टोत्तर-सहस्र ताम्र कलशाभिषेक, हवन-पूजन और कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अंतिम दिन पूर्णाहुति के साथ विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कलश यात्रा को लेकर पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल रहा। जगह-जगह श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए शिविर लगाए गए थे और ग्रामीणों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। गंगा घाट और मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। आयोजन को लेकर प्रशासन और समिति की ओर से व्यवस्था भी की गई थी।


