Accident Insurance: आजकल शादियों में लोग लग्जरी डेकोरेशन और महंगे गिफ्ट्स में करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं। लेकिन महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले की एक शादी ने लोगों को कुछ अलग सोचने पर मजबूर कर दिया। यहां दूल्हे ने ऐसा रिटर्न गिफ्ट दिया, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। मराठवाड़ा के बहादरपुरा गांव में रहने वाले सिद्धेश्वर पेठकर और उनके परिवार ने शादी के मौके पर पूरे गांव को दुर्घटना बीमा का तोहफा दे दिया। गांव के 3465 लोगों के लिए 1-1 लाख रुपये का एक्सीडेंट इंश्योरेंस कराया गया। यानी कुल बीमा कवर करीब 34.6 करोड़ रुपये का हुआ।
मिलिंद देवड़ा को याद आई अपनी शादी
शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने भी इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि आज के युवा अगर फिजूल खर्च की जगह संवेदनशील सोच को महत्व दे रहे हैं, तो यह समाज के लिए अच्छी बात है। साथ ही उन्हें इस पहल से अपनी शादी याद आ गई। दरअसल उन्होंने भी अपनी शादी में कुछ ऐसा ही किया था।
देवड़ा ने दान दिये थे मेडिकल उपकरण
देवड़ा की शादी फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ी पूजा शेट्टी से हुई है। उनकी शादी काफी सादगी भरी हुई थी। शादी में सिर्फ करीबी लोग ही शामिल थे। उन्होंने किसी भी तरह की भव्यता के बिना सिर्फ 30 मेहमानों के उपस्थिति में शादी की थी। लेकिन देवड़ा ने कुछ ऐसा किया, जिसकी उस समय सब जगह तारीफ हुई थी। शादी में जो रुपये खर्च होने थे, उन्हें गरीबों के लिए मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण खरीदने में लगाया गया। इस तरह करोड़ों रुपयों के ये उपकरण सरकारी अस्पताल में दान किये गए थे।
इधर पुरे गांव को मिला सुरक्षा कवच
मराठवाड़ा की शादी की बात करें, तो इसमें करीब 4500 लोग शामिल हुए थे। बैंड-बाजा, दावत और रस्मों के बीच किसी को अंदाजा नहीं था कि शादी खत्म होते-होते पूरा गांव एक सुरक्षा कवच के दायरे में आ जाएगा। गांव के लोगों के मुताबिक, इस इलाके में सांप काटने, बिजली गिरने और खेतों में हादसे जैसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। कई परिवार अचानक होने वाले हादसों के बाद आर्थिक मुश्किलों में फंस जाते हैं। ऐसे में पेठकर परिवार ने सोचा कि शादी सिर्फ खुशी का मौका नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ करने का जरिया भी बन सकती है।
ग्राम पंचायत के नाम पर खरीदी ग्रुप एक्सीडेंट पॉलिसी
परिवार ने शादी के रिटर्न गिफ्ट के रूप में ग्राम पंचायत के नाम पर ग्रुप एक्सीडेंट पॉलिसी खरीदी। इसके लिए गांव की वोटर लिस्ट बीमा कंपनी को दी गई, ताकि हर पात्र ग्रामीण को बिना किसी भेदभाव और कागजी झंझट के कवर मिल सके। यह पॉलिसी एक साल तक लागू रहेगी। आगे इसे रिन्यू कराने पर भी चर्चा हो सकती है। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि परिवार ने इस काम का प्रचार करने से भी बचने की कोशिश की। सिद्धेश्वर पेठकर ने कहा कि हमारे यहां दान का ढिंढोरा नहीं पीटा जाता। हमें किसी तारीफ की जरूरत नहीं, लोगों का आशीर्वाद ही काफी है।
दूल्हे के बड़े भाई अनुप पेठकर ने कहा कि आसपास के गांवों में दुर्घटनाओं की वजह से कई परिवार टूट जाते हैं। इसलिए उन्होंने तय किया कि शादी की याद सिर्फ फोटो और वीडियो तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि लोगों को सुरक्षा भी मिलनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर मिले ये रिएक्शंस
इस पहल की सोशल मीडिया पर भी खूब तारीफ हो रही है। कई लोगों ने लिखा कि जो काम सरकारों को करना चाहिए, वह एक परिवार ने अपनी खुशी के मौके पर कर दिखाया। एक यूजर ने एक्स पर लिखा कि रील्स और लाइक्स के दौर में भी कुछ लोग बिना दिखावे के समाज के लिए काम कर रहे हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि सोचिए, लोगों को वह सुविधा शादियों के जरिए मिल रही है, जिसका वादा अक्सर सरकारें करती हैं।


