सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को मिली मान्यता:आठवीं कक्षा तक मातृभाषा के रूप में होगी पढ़ाई, सांसद ने मिथिलावासियों के लिए ऐतिहासिक सम्मान बताया

सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को मिली मान्यता:आठवीं कक्षा तक मातृभाषा के रूप में होगी पढ़ाई, सांसद ने मिथिलावासियों के लिए ऐतिहासिक सम्मान बताया

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) के पाठ्यक्रम में पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। जिससे मिथिलांचल में खुशी का माहौल है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डॉ. गोपालजी ठाकुर ने इसे मिथिलावासियों के लिए ऐतिहासिक सम्मान बताया है। गोपालजी ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी की ओर से भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसा के अनुसार कक्षा 5 तक और यथासंभव कक्षा 8 तक विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने की व्यवस्था की जा रही है। इसी दिशा में मैथिली भाषा को भी विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए गए हैं। साथ ही एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद मैथिली समेत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में किया जा रहा है। सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल करने की मांग रखी थी सांसद के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (स्कूल शिक्षा) 2023 के तहत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को भी शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, ताकि मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। डॉ. गोपालजी ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर पर भी मैथिली विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। मैथिली भाषा का पाठ्यक्रम सीबीएसई की अकादमिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने 8 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात कर सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल किए जाने की मांग रखी थी। इसके लिए उन्होंने संबंधित पत्र भी सौंपा था। लगातार प्रयासों और मिथिलावासियों की भावना को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के बाद यह सकारात्मक निर्णय सामने आया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड(सीबीएसई) के पाठ्यक्रम में पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता प्रदान की गई है। जिससे मिथिलांचल में खुशी का माहौल है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डॉ. गोपालजी ठाकुर ने इसे मिथिलावासियों के लिए ऐतिहासिक सम्मान बताया है। गोपालजी ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी की ओर से भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की अनुशंसा के अनुसार कक्षा 5 तक और यथासंभव कक्षा 8 तक विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने की व्यवस्था की जा रही है। इसी दिशा में मैथिली भाषा को भी विद्यालयी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की ओर से मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए गए हैं। साथ ही एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद मैथिली समेत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में किया जा रहा है। सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल करने की मांग रखी थी सांसद के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (स्कूल शिक्षा) 2023 के तहत राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को भी शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, ताकि मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। डॉ. गोपालजी ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर पर भी मैथिली विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। मैथिली भाषा का पाठ्यक्रम सीबीएसई की अकादमिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। उन्होंने 8 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात कर सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल किए जाने की मांग रखी थी। इसके लिए उन्होंने संबंधित पत्र भी सौंपा था। लगातार प्रयासों और मिथिलावासियों की भावना को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के बाद यह सकारात्मक निर्णय सामने आया है।  

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