‘आप जिस नम्बर पर सम्पर्क करना चाहते हैं, वह उपयोग में नहीं है…’

‘आप जिस नम्बर पर सम्पर्क करना चाहते हैं, वह उपयोग में नहीं है…’

नागौर. ‘आप जिस नम्बर पर सम्पर्क करना चाहते हैं, वह उपयोग में नहीं है…’, ‘स्वीच ऑफ…’, ‘द पर्सन यू आर कॉलिंग इज नॉट आंसरिंग…’। जिले में आमजन की सुविधा के लिए जारी किए गए पुलिस के सीयूजी नंबरों पर कॉल करने पर कुछ इसी तरह के जवाब सुनने को मिल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि जिले के अधिकांश थाना अधिकारियों के सरकारी सीयूजी नंबर या तो बंद पड़े हैं या फिर रिसीव ही नहीं किए जाते। ऐसे में आम नागरिकों को पुलिस तक पहुंचने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि ज्यादातर थाना अधिकारियों के सीयूजी नंबर उपयोग में नहीं मिले। कोतवाली, सदर, खाटू बड़ी, श्रीबालाजी, महिला थाना, कुचेरा, भावंडा और सुरपालिया थानों के सरकारी नंबर या तो स्वीच ऑफ मिले या उपयोग में नहीं होने की जानकारी मिली। जायल और पांचौड़ी थाना प्रभारियों के नंबरों पर घंटी बजती रही, लेकिन किसी ने कॉल रिसीव नहीं किया। जिले के 20 थानों में से कुछेक को छोड़ अधिकांश थानों में पुलिस व्यवस्था सरकारी सीयूजी की बजाय निजी मोबाइल नंबरों के भरोसे चल रही है। सवाल यह है कि जब सरकार ने आमजन की त्वरित सहायता के लिए सीयूजी सुविधा उपलब्ध कराई है, तो फिर ये नंबर बंद क्यों हैं और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहे।

रोल थानाधिकारी का फोन चालू, पर थाने में

सबसे चौंकाने वाला मामला रोल थाना का सामने आया, जहां सीयूजी नंबर एक महिला कांस्टेबल ने उठाया। थानाधिकारी से बात कराने की बात कही गई तो जवाब मिला कि ‘यह फोन तो थाने में ही रहता है, आप उनके निजी नंबर पर कॉल कर लो।’ इससे साफ है कि कई थानों में सरकारी नंबर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

निजी नम्बरों का शोक ज्यादा

जानकारी के अनुसार जिले के सभी थानों में दो-दो सीयूजी सिम जारी की गई हैं, एक थाने के लिए और दूसरा थानाधिकारी के लिए, ताकि अधिकारी बदलने पर भी नम्बर नहीं बदले। जिससे आमजन सीधे पुलिस से संपर्क कर सकें। बावजूद इसके अधिकांश थाना प्रभारी निजी मोबाइल नंबरों से ही पूरा कामकाज संचालित कर रहे हैं। अधिकारियों और खास लोगों के लिए अलग निजी नंबर तथा थाने के कामकाज के लिए अलग निजी नंबर उपयोग किए जा रहे हैं। आमजन के लिए जारी सीयूजी नंबर या तो बंद हैं या नेटवर्क से बाहर। इसका खमियाजा सीधे तौर पर पीडि़तों और शिकायतकर्ताओं को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि अधिकांश लोगों के पास थाना प्रभारियों के निजी नंबर उपलब्ध ही नहीं होते।

अस्पताल चौकी का सरकारी फोन ही खराब

जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय अस्पताल की पुलिस चौकी का सीयूजी नम्बर वाला फोन पिछले करीब दो महीने से बंद पड़ा है। जानकारी में आया कि पुलिस विभाग से चौकी के लिए जो फोन उपलब्ध करवाया गया था, वो खराब हो गया। नया मिला नहीं, इसलिए चौकी का सीयूजी नम्बर बंद है।

पता करवाता हूं

थानाधिकारियों के सीयूजी नम्बर बंद होने की जानकारी मुझे नहीं है, मैं पता करवाता हूं।

– जतिन जैन, सहायक पुलिस अधीक्षक, नागौर

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