कनाडा के होंगे टुकड़े? अल्बर्टा प्रांत में तेज़ हुई अलग होने की मांग

कनाडा के होंगे टुकड़े? अल्बर्टा प्रांत में तेज़ हुई अलग होने की मांग

कनाडा (Canada) का तेल संपदा से समृद्ध प्रांत अल्बर्टा (Alberta) अब एक अलग देश बनने की राह पर जा सकता है। 2018 से ही अल्बर्टा के लोग कनाडा से अलग होने के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं। अब यह मांग तेज़ हो गई है। ऐसे में कनाडा के टुकड़े होने की नौबत आ गई है। बताया जा रहा है कि अमेरिका (United States of America) का ट्रंप प्रशासन भी पीछे से इस मांग को समर्थन दे रहा है।

जनमत संग्रह के लिए होगी वोटिंग

अल्बर्टा को कनाडा से अलग करने के लिए 3 लाख लोगों ने जनमत संग्रह कराने को लेकर याचिका दाखिल की थी। स्थानीय जनता कनाडा से अलग होने की राय देती है तो एक नए देश का जन्म भी हो सकता है। वहीं अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ (Danielle Smith) ने कहा है कि प्रांत कनाडा से अलग होगा या नहीं, इसके लिए जनमत संग्रह कराने के लिए अब वोटिंग कराई जाएगी। 19 अक्टूबर 2026 को अल्बर्टा में जनमत संग्रह के लिए नॉन-बाइंडिंग रेफरेंडम के तहत वोटिंग होगी।

प्रीमियर कनाडा में ही बने रहने की समर्थक

अल्बर्टा प्रांत की प्रीमियर डेनियल स्मिथ को लेकर माना जाता है कि वह अल्बर्टा के कनाडा में ही बने रहने का समर्थन करती हैं। अल्बर्टा के ज़्यादातर निवासी भी कनाडा में ही बने रहने के पक्ष में हैं। नॉन-बाइंडिंग रेफरेंडम के तहत वोटिंग कराने के पीछे वजह है प्रांत की आबादी के एक हिस्से में बढ़ रहा असंतोष। स्मिथ नहीं चाहती कि यह असंतोष और बढ़े। वहीँ कनाडाई पीएम मार्क कार्नी (Mark Carney) भी मानते हैं कि अल्बर्टा कनाडा के भविष्य के लिए बहुत ज़रूरी है।

अल्बर्टा की कनाडा के तेल उत्पादन में 84% हिस्सेदारी

अल्बर्टा प्रांत की आबादी करीब 50 लाख है। अल्बर्टा में अब तक हुए अलग-अलग सर्वेंक्षणों में पता चला है कि 30% लोग ही प्रांत की आज़ादी के समर्थक हैं। स्थानीय लोगों को इस बात की भी नाराज़गी है कि प्रांत जितना राजस्व देता है उसमें उसे पर्याप्त हिस्सा नहीं मिलता। कनाडा के कुल तेल उत्पादन का 84% हिस्सा इसी प्रांत से आता है। यहाँ लगभग 1.65 लाख बिलियन बैरल तेल भंडार मौजूद है।

क्या है नया देश बनाने की प्रक्रिया?

अल्बर्टा में अगर जनमत संग्रह कनाडा से अलग होने के पक्ष में आता है तो नया देश बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए सबसे पहले बॉर्डर का विभाजन होगा। अल्बर्टा अपना खुद का संविधान और कानून तैयार करेगा। यूएन की सदस्यता के लिए भी आवेदन करेगा। लेकिन यह प्रक्रिया इतनी आसान भी नहीं। कनाडाई पीएम कार्नी भी इसी प्रांत से आते हैं। माना जा रहा है कि कनाडा का प्रयास जनमत संग्रह को विफल कराने का है।

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