जलसंकट अब सिर्फ पानी की कमी का मामला नहीं रह गया, बल्कि पूरा सवाल पानी प्रबंधन पर खड़ा हो गया है। शहरभर में लोग कम प्रेशर, अधूरी सप्लाय और सूखे नलों से परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग विधायकों के दफ्तरों तक पहुंच रहे हैं, जबकि पार्षद अपने क्षेत्रों में टैंकर चलवाने को मजबूर हैं। नर्मदा के तीन चरणों से 540 एमएलडी पानी मिलता है। इसमें से राऊ, महू और आसपास की पंचायतों को भी पानी दिया जाता है। 15 एमएलडी लीकेज और लाइन लॉस माना जाता है। नगर निगम के मुताबिक शहर में बिजलपुर तक रोज करीब औसत 423 एमएलडी पानी मिल रहा है। तय व्यवस्था के तहत हर दूसरे दिन पानी की सप्लाय की जाती है। निगम के मुताबिक शहर की आबादी 35 लाख पार हो गई है। इसमें से 20 फीसदी इलाके में नर्मदा का नेटवर्क नहीं है। यदि माना जाए कि 5 लाख की आबादी नर्मदाविहीन है तो रोजाना निगम को 30 लाख की आबादी तक पानी पहुंचाना है। चूंकि हर दूसरे दिन पानी देना होता है, इसलिए एक दिन में 16 से 17 लाख की आबादी के लिए पानी छोड़ा जाता है। उसी टंकी से दूसरे दिन बची हुई आबादी को पानी दिया जाता है। कई बार एक दिन में दो बार भी टंकियां भरी जाती हैं लेकिन एक परिवार के यहां नल एक दिन छोड़कर ही आते हैं। यानी एक दिन में यह सप्लाय करीब 16 से 17 लाख आबादी के बीच बांटी जा रही है। विरोधाभास : इस हिसाब से देखें तो प्रति व्यक्ति करीब 250 लीटर पानी उपलब्ध होना चाहिए, लेकिन कम प्रेशर और कम देर तक नल आने की शिकायतें निगम तक पहुंच रही हैं। 20 एमएलडी पानी टंकियों से बांटा जा रहा है। दावा है कि नर्मदा विहीन इलाकों में बोरिंग भी सूख चुके हैं, इसलिए उस आबादी तक भी टैंकरों के माध्यम से नर्मदा का पानी पहुंचाया जा रहा है। 1 साल से वॉल्व बंद, जोन पर सुनवाई नहीं
केस 1 दो बाल्टी पानी भी मुश्किल: रहवासी स्वाति साहू ने कहा डेढ़ महीने से नलों में इतना कम पानी आ रहा है कि दो बाल्टी पानी भरना भी मुश्किल है। जोन कार्यालय में सुनवाई नहीं हो रही। सरकारी टैंकर समय पर नहीं पहुंच रहे, जबकि निजी टैंकर 1200 से 1300 रुपए तक वसूल रहे हैं। केस 2 न्याय नगर : न्याय नगर स्थित मारथोमा स्कूल के सामने वाले क्षेत्र में रहवासी एक साल से जलसंकट झेल रहे हैं। यहां नर्मदा पाइप लाइन का वॉल्व बंद पड़ा है, जिस कारण लोगों को नियमित सप्लाय नहीं मिल रही। रहवासियों का कहना है कि निगम का टैंकर मुश्किल से एक मिनट पानी देता है, जबकि निजी टैंकरों के लिए मनमाने दाम चुकाने पड़ रहे हैं। शिकायतों के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। केस 3 स्कीम-78 : स्कीम-78 के ई-सेक्टर में रहवासी ने बताया एक साल पहले साढ़े 8 हजार रुपए देकर नल कनेक्शन करवाया था। पाइप लाइन डाल दी गई, लेकिन आज तक पानी नहीं आया। बूंद-बूंद के लिए संघर्ष, 3 बड़े कारण 1. वितरण और प्रबंधन में गड़बड़ी : पुराने क्षेत्रों में आबादी और कनेक्शन तेजी से बढ़े, पर टंकियों और सप्लाय सिस्टम को उसी हिसाब से अपग्रेड नहीं किया गया। कई इलाकों में 5 साल में 30 फीसदी तक कनेक्शन बढ़ गए, लेकिन टंकी, लाइन और प्रेशर की व्यवस्था जस की तस बनी रही। 2. एक टंकी पर तीन-चार वार्डों का बोझ : पहले जिन टंकियों से एक-दो वार्ड संभलते थे, अब उन्हीं से तीन-चार वार्डों तक पानी भेजा जा रहा है। नई टाउनशिप, मल्टीस्टोरी और बल्क कनेक्शन बढ़ने से सीधे सप्लाय लाइनों पर दबाव बढ़ गया है। नतीजा यह है कि शहर के बीचोबीच भी कम प्रेशर की शिकायतें बढ़ रही हैं। आखिरी छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हालात ज्यादा खराब हैं। 3. नई कॉलोनियां जुड़ीं, लेकिन सिस्टम नहीं बदला : शहर तेजी से फैला, लेकिन सप्लाय नेटवर्क उसी पुराने ढांचे पर चलता रहा। बढ़ते लोड का आकलन कर नई टंकियां, नई लाइनें और अलग वितरण व्यवस्था समय पर तैयार नहीं की गई। 20 फीसदी इलाके अब भी पूरी तरह नर्मदा नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। पहले ये क्षेत्र बोरिंग और ट्यूबवेल पर निर्भर थे, लेकिन इस बार गर्मी में बड़ी संख्या में बोरिंग सूख गए। चिल्ड वाटर एजेंसी को पानी बेच रहा था निगम का टैंकर जोन 18 में अग्रसेन प्रतिमा चौराहे के पास जय मां आराधना इंटरप्राइजेस का ट्रैक्टर टैंकर (MP 67 AB 1494) चिल्ड वाटर एजेंसी को पानी बेच रहा था। यह टैंकर निगम से अनुबंधित है। टैंकर को जब्त कर संबंधित एजेंसी पर 25 हजार रुपए का दंड लगाया गया।


