विधान परिषद की खाली हुई दो सीटों पर उपचुनाव हो गए हैं। मंगल पांडेय की खाली सीट पर BJP के सूर्य कुमार शर्मा शपथ ले चुके हैं। राधा चरण सेठ के विधायक बनने से खाली हुई स्थानीय निकाय की आरा-बक्सर की विधान परिषद सीट पर राजद के सोनू कुमार राय ने कब्जा जमा लिया है। यानी NDA को विधानसभा चुनाव में फायदा और विधानपरिषद चुनाव में घाटा हुआ है। अब इस सप्ताह विधान परिषद की खाली हो रही 9 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा होनी है। इसके लिए NDA की पार्टियों के बीच कागज पर सीट शेयरिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। चुनाव की घोषणा के साथ ही NDA की तरफ से इसकी औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। विपक्षी पार्टियों राजद और कांग्रेस को 1-1 सीट का नुकसान होना तय है। BJP को एक सीट का लाभ होगा। इनके अलावा NDA की दो छोटी पार्टियों RLM और LJP(R) की उपस्थिति भी विधान परिषद में तय मानी जा रही है। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, विधान परिषद की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए NDA की तैयारी कैसी है? जीत का क्या फॉर्मूला है? सबसे पहले NDA की सीट शेयरिंग जानिए विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं। एक सीट पर उपचुनाव होना है। मतलब कुल 10 सीटें हैं। इनमें से 4 पर JDU का कब्जा है। सीट शेयरिंग के तहत ये चारों सीटें JDU के पास रहेंगी। BJP के पास फिलहाल 2 सीट है। इस बार भाजपा के हिस्से में 3 सीट आएगी। बाकी की 2 सीटों में से एक LJP(R) और एक RLM को दी जाएगी। RJD को एक सीट मिल सकती है। क्या राबड़ी के मुंहबोले भाई की MLC सीट बच पाएगी? NDA में जिस तरीके से सीटों के बंटवारे की बात सामने आ रही है, ऐसे में साफ है कि राज्यसभा चुुनाव की तरह NDA के नेता विधान परिषद के चुनाव में वोटिंग नहीं चाहते हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर विपक्ष 3 की जगह एक ही सीट जीत सकता है। RJD के जिस नेता का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उसमें राबड़ी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह की भी सीट है। अगर वोटिंग नहीं होती है तो RJD केवल अपने 25 विधायकों के सपोर्ट से ही इनकी सीट बचाने में सफल हो जाएगा। इस नंबर के आधार पर जीत के समीकरण को समझिए अब इस नंबर को पार्टीवार देखें तो NDA में BJP के पास 2 और जदयू के हिस्से में 4 सीटें हैं। बीजेपी के 89 और जदयू के 85 विधायक हैं। यानी 3-3 सीटों पर इनकी जीत तय है। जदयू के हिस्से नीतीश कुमार वाली सीट भी आ रही है, यानि कि 10 सीटों में 4 सीट पर फिलहाल जदयू के नेता की जीत तय मानी जा रही है। अगर पूरे महागठबंधन को मिला दें तो 41 विधायक हैं। ऐसे में दूसरा प्रत्याशी उतारने के लिए उनके पास नंबर नहीं है। 28 जून को इनका कार्यकाल पूरा हो रहा 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें राजद की 2, जदयू की 3, कांग्रेस व बीजेपी की 1-1 सीट शामिल है। इसके अलावा पूर्व सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने से खाली हुई उनकी सीटों पर उपचुनाव होना है।
बिहार के उच्च सदन में सभी पार्टियों से नए चेहरों की होगी एंट्री BJP की तरफ से तीनों सीटों पर नया नाम जाना तय माना जा रहा है। मौजूदा MLC सम्राट चौधरी पहले ही विधायक बन चुके हैं। संजय मयूख का नाम बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए चल रहा है। इसके अलावा एक एक्स्ट्रा सीट पार्टी को मिलेगी। इस पर भी नए चेहरे का जाना तय माना जा रहा है। JDU से EBC के साथ अल्पसंख्यक की चर्चा JDU से एक नाम निशांत कुमार फाइनल हैं। वह नीतीश कुमार की खाली सीट पर होने वाले उपचुनाव की जगह, नई सीट (जिसका कार्यकाल 6 साल है) से विधान परिषद जाएंगे। जदयू सूत्रों की मानें तो मौजूदा दोनों MLC गुलाम गौस और भीषम सहनी को रिप्लेस किया जाएगा। इनकी जगह नए चेहरे को मौका मिलेगा। अगर उपुचनाव की सीटों को मिला लें तो JDU से 4 MLC बनेंगे। सामाजिक संतुलन के तहत पार्टी अति पिछड़ा (EBC), मुस्लिम और दलित वर्ग से नए चेहरे को विधान परिषद भेजा जा सकता है। नाम को लेकर स्पष्ट तौर पर फिलहाल कोई नेता बोलने से बच रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे के साथ चिराग के भांजे की हो सकती है एंट्री बीजेपी अपने कोटे से एक सीट रालोमो को दे रही है। वहीं, LJP(R) को भी एक सीट BJP कोटे से ही दी जाएगी। RLM कोटे से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय है। वहीं, LJP(R) कोटे से तीन नामों की चर्चा है। इसमें सबसे उपर चिराग पासवान के भांझे सीमांत मृणाल के विधान परिषद जाने की है। वे फिलहाल पार्टी के युवा विंग को लीड कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से उन्हें गरखा से कैंडिडेट बनाया गया था, लेकिन हार गए थे। इनके अलावा चिराग पासवान के करीबी वेद प्रकाश पांडेय और पार्टी के सीनियर लीडर हुलास पांडेय के नाम पर भी चर्चा की जा रही है। चिराग के जीत का फॉर्मूला समझिए राज्यसभा चुनाव के दौरान LJP(R) ने बिना शर्त NDA के कैंडिडेट को समर्थन दिया था। LJP(R) सूत्रों की मानें तो अब BJP और जदयू दोनों उन्हें विधान परिषद की एक सीट पर सपोर्ट करने के लिए राजी है। पार्टी के पास 19 विधायक हैं। इन्हें जीत के लिए 6 विधायक की जरूरत है। अपने 3 सदस्यों को जीताने के बाद भी BJP के 10 विधायक बचते हैं। ऐसे में केवल BJP की मदद से LJP(R) को जीत मिल जाएगी। कब होंगे घोषित चुनाव कार्यक्रम? चुनाव आयोग की तरफ से फिलहाल कोई भी अधिकारी इस पर ऑन रिकॉर्ड जानकारी देने से बच रहे हैं। आयोग के सूत्रों की मानें तो ऐसी संभावना जताई जा रही है कि मई के आखिरी हफ्ते या जून के पहले हफ्ते में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है। 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्यकाल पूरा होने से पहले इनका चुनाव कराना अनिवार्य है। विधान परिषद की खाली हुई दो सीटों पर उपचुनाव हो गए हैं। मंगल पांडेय की खाली सीट पर BJP के सूर्य कुमार शर्मा शपथ ले चुके हैं। राधा चरण सेठ के विधायक बनने से खाली हुई स्थानीय निकाय की आरा-बक्सर की विधान परिषद सीट पर राजद के सोनू कुमार राय ने कब्जा जमा लिया है। यानी NDA को विधानसभा चुनाव में फायदा और विधानपरिषद चुनाव में घाटा हुआ है। अब इस सप्ताह विधान परिषद की खाली हो रही 9 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा होनी है। इसके लिए NDA की पार्टियों के बीच कागज पर सीट शेयरिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। चुनाव की घोषणा के साथ ही NDA की तरफ से इसकी औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। विपक्षी पार्टियों राजद और कांग्रेस को 1-1 सीट का नुकसान होना तय है। BJP को एक सीट का लाभ होगा। इनके अलावा NDA की दो छोटी पार्टियों RLM और LJP(R) की उपस्थिति भी विधान परिषद में तय मानी जा रही है। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए, विधान परिषद की 10 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए NDA की तैयारी कैसी है? जीत का क्या फॉर्मूला है? सबसे पहले NDA की सीट शेयरिंग जानिए विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं। एक सीट पर उपचुनाव होना है। मतलब कुल 10 सीटें हैं। इनमें से 4 पर JDU का कब्जा है। सीट शेयरिंग के तहत ये चारों सीटें JDU के पास रहेंगी। BJP के पास फिलहाल 2 सीट है। इस बार भाजपा के हिस्से में 3 सीट आएगी। बाकी की 2 सीटों में से एक LJP(R) और एक RLM को दी जाएगी। RJD को एक सीट मिल सकती है। क्या राबड़ी के मुंहबोले भाई की MLC सीट बच पाएगी? NDA में जिस तरीके से सीटों के बंटवारे की बात सामने आ रही है, ऐसे में साफ है कि राज्यसभा चुुनाव की तरह NDA के नेता विधान परिषद के चुनाव में वोटिंग नहीं चाहते हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर विपक्ष 3 की जगह एक ही सीट जीत सकता है। RJD के जिस नेता का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उसमें राबड़ी के मुंहबोले भाई सुनील सिंह की भी सीट है। अगर वोटिंग नहीं होती है तो RJD केवल अपने 25 विधायकों के सपोर्ट से ही इनकी सीट बचाने में सफल हो जाएगा। इस नंबर के आधार पर जीत के समीकरण को समझिए अब इस नंबर को पार्टीवार देखें तो NDA में BJP के पास 2 और जदयू के हिस्से में 4 सीटें हैं। बीजेपी के 89 और जदयू के 85 विधायक हैं। यानी 3-3 सीटों पर इनकी जीत तय है। जदयू के हिस्से नीतीश कुमार वाली सीट भी आ रही है, यानि कि 10 सीटों में 4 सीट पर फिलहाल जदयू के नेता की जीत तय मानी जा रही है। अगर पूरे महागठबंधन को मिला दें तो 41 विधायक हैं। ऐसे में दूसरा प्रत्याशी उतारने के लिए उनके पास नंबर नहीं है। 28 जून को इनका कार्यकाल पूरा हो रहा 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटें खाली हो रही हैं। इनमें राजद की 2, जदयू की 3, कांग्रेस व बीजेपी की 1-1 सीट शामिल है। इसके अलावा पूर्व सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने से खाली हुई उनकी सीटों पर उपचुनाव होना है।
बिहार के उच्च सदन में सभी पार्टियों से नए चेहरों की होगी एंट्री BJP की तरफ से तीनों सीटों पर नया नाम जाना तय माना जा रहा है। मौजूदा MLC सम्राट चौधरी पहले ही विधायक बन चुके हैं। संजय मयूख का नाम बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए चल रहा है। इसके अलावा एक एक्स्ट्रा सीट पार्टी को मिलेगी। इस पर भी नए चेहरे का जाना तय माना जा रहा है। JDU से EBC के साथ अल्पसंख्यक की चर्चा JDU से एक नाम निशांत कुमार फाइनल हैं। वह नीतीश कुमार की खाली सीट पर होने वाले उपचुनाव की जगह, नई सीट (जिसका कार्यकाल 6 साल है) से विधान परिषद जाएंगे। जदयू सूत्रों की मानें तो मौजूदा दोनों MLC गुलाम गौस और भीषम सहनी को रिप्लेस किया जाएगा। इनकी जगह नए चेहरे को मौका मिलेगा। अगर उपुचनाव की सीटों को मिला लें तो JDU से 4 MLC बनेंगे। सामाजिक संतुलन के तहत पार्टी अति पिछड़ा (EBC), मुस्लिम और दलित वर्ग से नए चेहरे को विधान परिषद भेजा जा सकता है। नाम को लेकर स्पष्ट तौर पर फिलहाल कोई नेता बोलने से बच रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के बेटे के साथ चिराग के भांजे की हो सकती है एंट्री बीजेपी अपने कोटे से एक सीट रालोमो को दे रही है। वहीं, LJP(R) को भी एक सीट BJP कोटे से ही दी जाएगी। RLM कोटे से उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का विधान परिषद जाना तय है। वहीं, LJP(R) कोटे से तीन नामों की चर्चा है। इसमें सबसे उपर चिराग पासवान के भांझे सीमांत मृणाल के विधान परिषद जाने की है। वे फिलहाल पार्टी के युवा विंग को लीड कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी की तरफ से उन्हें गरखा से कैंडिडेट बनाया गया था, लेकिन हार गए थे। इनके अलावा चिराग पासवान के करीबी वेद प्रकाश पांडेय और पार्टी के सीनियर लीडर हुलास पांडेय के नाम पर भी चर्चा की जा रही है। चिराग के जीत का फॉर्मूला समझिए राज्यसभा चुनाव के दौरान LJP(R) ने बिना शर्त NDA के कैंडिडेट को समर्थन दिया था। LJP(R) सूत्रों की मानें तो अब BJP और जदयू दोनों उन्हें विधान परिषद की एक सीट पर सपोर्ट करने के लिए राजी है। पार्टी के पास 19 विधायक हैं। इन्हें जीत के लिए 6 विधायक की जरूरत है। अपने 3 सदस्यों को जीताने के बाद भी BJP के 10 विधायक बचते हैं। ऐसे में केवल BJP की मदद से LJP(R) को जीत मिल जाएगी। कब होंगे घोषित चुनाव कार्यक्रम? चुनाव आयोग की तरफ से फिलहाल कोई भी अधिकारी इस पर ऑन रिकॉर्ड जानकारी देने से बच रहे हैं। आयोग के सूत्रों की मानें तो ऐसी संभावना जताई जा रही है कि मई के आखिरी हफ्ते या जून के पहले हफ्ते में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो सकती है। 28 जून 2026 को विधान परिषद की 9 सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्यकाल पूरा होने से पहले इनका चुनाव कराना अनिवार्य है।


