ट्रंप के दावे के बावजूद आज नहीं होगी अमेरिका-ईरान की डील? परमाणु समझौते पर अभी भी अटकी कई शर्तें

ट्रंप के दावे के बावजूद आज नहीं होगी अमेरिका-ईरान की डील? परमाणु समझौते पर अभी भी अटकी कई शर्तें

US Iran Deal Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही दावा कर रहे हों कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लगभग तय हो चुका है, लेकिन ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार को दोनों देशों के बीच किसी औपचारिक डील पर हस्ताक्षर होने की संभावना बेहद कम है। परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अब भी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि समझौते के कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर अभी बातचीत जारी है। हालांकि ईरान ने सिद्धांत रूप में होर्मुज स्ट्रेट दोबारा खोलने और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करने पर सहमति जताई है, लेकिन इसे लागू कैसे किया जाएगा, इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

ट्रंप बोले- ‘जल्दबाजी नहीं करेंगे’

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि उनकी सरकार ईरान के साथ किसी भी समझौते में जल्दबाजी नहीं करेगी। उन्होंने साफ कहा कि जब तक अंतिम समझौता साइन, प्रमाणित और लागू नहीं हो जाता, तब तक ईरान के खिलाफ अमेरिकी ब्लॉकेड पूरी ताकत से जारी रहेगा।

ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में हुए ईरान परमाणु समझौते को ‘अमेरिका के इतिहास की सबसे खराब डील’ बताते हुए कहा कि मौजूदा वार्ता उससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ने देगी।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरे समझौते का सबसे अहम हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार गुजरता है। प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है।

हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा और किसी भी समझौते में अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत तथा जमे हुए ईरानी फंड्स को खोलना भी शामिल होना चाहिए।

यूरेनियम भंडार और प्रतिबंधों पर फंसी बात

रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह खत्म करे। वहीं ईरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि प्रतिबंधों में वास्तविक राहत मिले और तेल निर्यात पर लगी बाधाएं हटाई जाएं।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम पर अपने वादों को पूरा नहीं करता, तब तक प्रतिबंधों में राहत या संपत्तियों को अनफ्रीज करने पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।

इजरायल भी समझौते को लेकर चिंतित

इजरायल में भी इस संभावित समझौते को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इजरायल को डर है कि ट्रंप प्रशासन जल्दबाजी में ऐसा समझौता कर सकता है, जिसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और उसके क्षेत्रीय नेटवर्क जैसे मुद्दे पूरी तरह शामिल न हों।

अभी जारी रहेगी बातचीत

हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत ‘रचनात्मक’ बताई जा रही है, लेकिन फिलहाल यह साफ है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी और समय लग सकता है। अमेरिकी प्रशासन और मध्यस्थ देशों की कोशिश है कि क्षेत्र में दोबारा सैन्य टकराव न हो और शांति प्रक्रिया आगे बढ़े।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *