Ahmedabad. केन्द्रीय युवा कार्य एवं खेल मंत्री डॉ.मनसुख मांडविया ने कहा कि खेल मंत्रालय की ओर से ‘पैरा स्पोर्ट्स के नोडल केंद्र’ के रूप में अधिसूचित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र (एनसीओई) गांधीनगर पैरा खिलाड़ियों के विकास के लिए देश के प्रमुख उच्च-प्रदर्शन केंद्र के रूप में उभर रहा है। केंद्र पैरा एथलेटिक्स, पैरा बैडमिंटन, पैरा टेबल टेनिस, पैरा पावरलिफ्टिंग, पैरा तैराकी तथा पैरा फेंसिंग सहित छह पैरा स्पोर्ट्स विधाओं को सहयोग दे रहा है। यहां हैंडबॉल, कबड्डी और खो-खो का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
वे रविवार को गांधीनगर साइ एनसीओई में कई नई खेल सुविधाओं के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
डॉ. मांडविया ने केंद्र में आयोजित किए जा रहे कबड्डी, पैरा स्पोर्ट्स, वॉलीबॉल और बास्केटबॉल के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों में भाग ले रहे खिलाड़ियों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि उच्च-स्तरीय प्रशिक्षण वातावरण और वैज्ञानिक सहयोग प्रणालियों का निरंतर अनुभव ओलंपिकस, पैरालंपिक में भारत के पदक जीतने की संभावनाओं को सुदृढ़ करेंगे।
यहां उद्घाटित नए बहुउद्देशीय प्रशिक्षण हॉल का मुख्य रूप से कबड्डी प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाएगा। इससे खिलाड़ियों को वर्षभर गहन अभ्यास, मैच सिमुलेशन और खेल-रणनीति संबंधी तैयारी में सहयोग मिलेगा। आधुनिक स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग हॉल को वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियों के माध्यम से खिलाड़ियों के प्रदर्शन, सहनशक्ति, रिकवरी और चोटों की रोकथाम को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यहां पैरा एथलीट छात्रावास और केंद्रीकृत भोजन कक्ष भी शुरू किया गया।
मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन, रिकवरी पर निर्भर है खेल उत्कृष्टता
डॉ. मांडविया ने कहा कि आधुनिक खेल उत्कृष्टता केवल शारीरिक तैयारी पर ही नहीं, बल्कि पोषण, मानसिक कल्याण, अनुशासन और रिकवरी पर भी निर्भर करती है। मेडीटेशन पार्क और केंद्रीकृत भोजन कक्ष जैसी सुविधाएं खिलाड़ियों के लिए एक व्यापक उच्च-प्रदर्शन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
पैरालंपिक 2024 में जीते रेकॉर्ड 29 पदक
डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत ने एशियाई पैरा खेलों में 111 पदक तथा पैरालंपिक 2024 में रिकॉर्ड 29 पदक हासिल किए हैं। यह देश के तेजी से सशक्त हो रहे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को दर्शाता है। यह परिणाम ये खिलाड़ियों में निरंतर निवेश, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, आधुनिक अवसंरचना तथा दृढ़ विश्वास का परिणाम हैं कि भारत वैश्विक खेल महाशक्ति बन सकता है।


