अमेरिका के साथ होने वाले शांति समझौते से पहले ही ईरान ने बड़ी घोषणा कर दी है। उसने साफ-साफ कह दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इसको लेकर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पूरी दुनिया के सामने भरोसा दिया है।
राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने आज साफ कहा कि उनका देश परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता। इस बयान के साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों में भी सकारात्मक खबरें आने लगी हैं।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने क्या कहा?
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा- हम दुनिया को आश्वासन देना चाहते हैं कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता। हम इलाके में अशांति भी नहीं फैलाना चाहते।
उन्होंने आरोप लगाया कि अशांति फैलाने वाला असल खिलाड़ी इजराइल है, जो ‘ग्रेटर इजराइल’ का सपना देख रहा है और हर मौके पर तनाव बढ़ाता रहता है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग पहले भी इस बात को दोहराते आए हैं और अब भी दोहरा रहे हैं।
लोगों की जिंदगी सुधारना सबसे बड़ा लक्ष्य
राष्ट्रपति ने अपनी सरकार की प्राथमिकता साफ की। उन्होंने कहा कि सरकार का सबसे महत्वपूर्ण काम लोगों की रोजी-रोटी सुनिश्चित करना है। देश में चुनौतियां भले ही हों, लेकिन अधिकारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऊर्जा और ईंधन के इस्तेमाल में बचत करें। पेजेश्कियन ने कहा- हम देश की इज्जत और गौरव के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे।
फैसले सुप्रीम लीडर की मंजूरी से ही
ईरान के राष्ट्रपति ने साफ किया कि कोई भी बड़ा फैसला सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के बाहर या सुप्रीम लीडर की अनुमति के बिना नहीं लिया जाएगा। उन्होंने आईआरआईबी के मैनेजर्स की बैठक में यह बात कही।
इसी बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
उन्होंने संकेत दिया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर कुछ अच्छी खबरें अगले कुछ घंटों में आ सकती हैं। रुबियो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बिल्कुल साफ है, ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं हासिल कर सकता।
तनाव कम करने की कोशिश
ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इलाके में तनाव चरम पर है।
ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, जबकि इजराइल और अमेरिका इसे लेकर संदेह जताते रहे हैं।
दोनों तरफ से आए इन बयानों से उम्मीद जगी है कि बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकल सकता है। हालांकि, दोनों देश अभी भी एक-दूसरे पर भरोसा करने को तैयार नहीं दिख रहे।




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