Mayawati Untold Story: बहुजन समाज पार्टी (BSP )की सुप्रीमो मायावती (Mayawati) 4 बार देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही हैं। राजनीति में आने से पहले मायावती IAS बनना चाहती थीं। आपको बताते हैं कि उनकी राजनीति में एंट्री कैसे हुई? साथ ही उनसे जुड़े वो 3 किस्से जो शायद ही आपको मालूम हों।
किस्सा 1: लकड़बग्घे के पीछे दौड़ पड़ी थीं मायावती
बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती का राजनीतिक सफर जितना संघर्षों से भरा रहा, उतने ही दिलचस्प उनके जीवन से जुड़े किस्से भी हैं। बचपन से लेकर राजनीति में कदम रखने तक मायावती ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने उन्हें देश की सबसे प्रभावशाली दलित नेताओं में शामिल कर दिया। उनके जीवन से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं।
मायावती के बचपन का एक किस्सा अक्सर सुनाया जाता है, जो उनके निडर स्वभाव को दिखाता है। बताया जाता है कि एक बार वह अपने नाना के गांव सिमरौली गई थीं। गांव के पास बहने वाली काली नदी के किनारे वह अपने नाना के साथ खड़ी थीं। तभी वहां से एक लकड़बग्घा गुजरने लगा। मायावती के नाना ने उन्हें तुरंत पीछे किया और समझाया कि यह खतरनाक जानवर है, इससे दूर रहना चाहिए, नहीं तो यह हमला कर सकता है। यह सुनते ही छोटी मायावती ने कहा कि “ये मुझे खाएगा, उससे पहले मैं इसे खा जाऊंगी।” इतना कहकर वह लकड़बग्घे के पीछे दौड़ पड़ीं। बाद में उनके नाना ने किसी तरह उन्हें रोक लिया। इस घटना को उनके साहसी स्वभाव की मिसाल माना जाता है।
किस्सा-2 1995 का गेस्ट हाउस कांड जिसने बदल दी यूपी की राजनीति
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2 जून 1995 की घटना को आज भी बड़े राजनीतिक मोड़ के रूप में याद किया जाता है। उस समय समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन था और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे, लेकिन BSP ने अचानक सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिससे राजनीतिक संकट खड़ा हो गया। उस दिन मायावती लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस के कमरे में अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी के समर्थक और कुछ विधायक वहां पहुंच गए। माहौल तनावपूर्ण हो गया और मायावती ने खुद को कमरे में बंद कर लिया।
बताया जाता है कि बाहर मौजूद लोग दरवाजा तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। बाद में प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई। काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और हालात नियंत्रित किए गए। इसके बाद मायावती सुरक्षित बाहर निकलीं। इस घटना ने यूपी की राजनीति की दिशा बदल दी और इसके बाद सपा-बसपा रिश्तों में लंबी दूरी आ गई।
किस्सा-3 मायावती का सपना था IAS बनने का
बहुत कम लोग जानते हैं कि मायावती शुरू में राजनीति में नहीं आना चाहती थीं। उनका सपना IAS अधिकारी बनने का था। वह पढ़ाई में काफी मेहनती थीं और प्रशासनिक सेवा के जरिए समाज के लिए काम करना चाहती थीं।
उन्होंने साल 1975 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में बीए किया। इसके बाद बीएड की पढ़ाई पूरी कर स्कूल में शिक्षिका बन गईं। नौकरी के साथ-साथ वह UPSC की तैयारी भी करती थीं। बाद में उन्होंने एलएलबी की डिग्री भी हासिल की। हालांकि मायावती की जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात बहुजन आंदोलन के नेता कांशीराम से हुई। एक दिन कांशीराम उनके घर पहुंचे और उनसे पूछा कि वह क्या बनना चाहती हैं। मायावती ने जवाब दिया कि वह IAS बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं। इस पर कांशीराम ने उनसे कहा कि वह उन्हें ऐसी जगह पहुंचा सकते हैं, जहां कई IAS अधिकारी उनके सामने खड़े होंगे। उन्होंने मायावती को राजनीति और सामाजिक आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। यही मुलाकात मायावती के राजनीतिक जीवन की शुरुआत बन गई।
राजनीति के लिए छोड़ दिया था घर
कांशीराम के आंदोलन से जुड़ने का फैसला मायावती के लिए आसान नहीं था। उनके पिता नहीं चाहते थे कि वह राजनीति में जाएं। परिवार के विरोध के बावजूद मायावती ने अपना रास्ता चुना और राजनीति के लिए घर तक छोड़ दिया। उस दौर में उनके पास ज्यादा पैसे भी नहीं थे। वह संगठन के दफ्तर में रहकर आंदोलन और राजनीति में सक्रिय रहीं। संघर्ष और मेहनत के दम पर मायावती आगे बढ़ीं और बाद में उत्तर प्रदेश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं।


