उन्नाव में अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए एसपी कार्यालय का घेराव किया। एसपी के अनुपस्थित रहने पर अधिवक्ताओं ने क्षेत्राधिकारी नगर दीपक कुमार से मुलाकात की। उन्होंने विवेचक पर पक्षपातपूर्ण और लापरवाही से जांच करने का आरोप लगाते हुए विवेचना को दूसरे अधिकारी को स्थानांतरित करने की मांग की। यह मामला कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं के लिए निर्मित राजा राव राम बक्श सिंह भवन, चाणक्य भवन और परशुराम भवन के निर्माण में कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। इन भवनों के निर्माण में धांधली के आरोप में पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष सतीश शुक्ला और पूर्व महामंत्री अरविंद कुमार दीक्षित के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। वर्तमान बार कार्यकारिणी ने मुकदमा अपराध संख्या 1052/2025 के तहत दोनों पूर्व पदाधिकारियों पर लगभग 56.22 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया है। हालांकि, आरोपित पूर्व पदाधिकारियों और उनके समर्थक अधिवक्ताओं ने इस मुकदमे को फर्जी और दुर्भावनापूर्ण बताया है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि विवेचक निष्पक्ष जांच करने में विफल रहे हैं और पर्याप्त साक्ष्य के बिना आरोप पत्र दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवेचक ने मौजूदा महामंत्री के भाई अनुराग बाजपेई से कथित रिश्वत लेकर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है। अधिवक्ताओं ने यह भी बताया कि चैंबर आवंटियों और अन्य संबंधित पक्षों के बयान अभी तक दर्ज नहीं किए गए हैं। उनके अनुसार, एकतरफा कार्रवाई कर आरोप पत्र दाखिल करना न्याय प्रक्रिया का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि पहले भवनों की गुणवत्ता और निर्माण कार्य की जांच शासकीय अभियंताओं से कराने की बात कही गई थी, लेकिन अब केवल मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, जिसे वे न्याय के साथ खिलवाड़ मानते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने सीओ से मांग की कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विवेचना किसी अन्य अधिकारी या एजेंसी को सौंपी जाए। इस पर क्षेत्राधिकारी दीपक कुमार ने अधिवक्ताओं को आश्वासन दिया कि विवेचक पर लगाए गए आरोपों की जांच की जाएगी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान अधिवक्ता केशव प्रसाद अवस्थी, अवनीश तिवारी और ललित पांडेय सहित कई अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।


