मधुबनी के सर्किट हाउस सभागार में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्यों और मधुबनी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक के दौरान विवाद हो गया। यह बहस जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई, जिससे सभागार परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आयोग के सदस्य स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान किसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो नोकझोंक और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम आयोग के सदस्यों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंची। सदर एसडीएम चंदन कुमार झा ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया और दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी। इस घटना के बाद, मधुबनी के सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने शुक्रवार शाम करीब 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान आयोग के सदस्यों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की। डॉ. कुमार ने यह भी दावा किया कि पीएचसी प्रभारियों से प्रत्येक प्रभारी के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसके कारण विवाद बढ़ा। सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों और अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा आवेदन तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर मधुबनी नगर थाना में आयोग के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। दूसरी ओर, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य रुबेल रविदास और संजय कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में वे केवल स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे और लापरवाही पाए जाने पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उनके अनुसार, इसी बात से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नाराज हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। मधुबनी के सर्किट हाउस सभागार में शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्यों और मधुबनी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक के दौरान विवाद हो गया। यह बहस जल्द ही धक्का-मुक्की में बदल गई, जिससे सभागार परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आयोग के सदस्य स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और योजनाओं की समीक्षा कर रहे थे। इसी दौरान किसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया, जो नोकझोंक और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम आयोग के सदस्यों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंची। सदर एसडीएम चंदन कुमार झा ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया और दोनों पक्षों को संयम बरतने की सलाह दी। इस घटना के बाद, मधुबनी के सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने शुक्रवार शाम करीब 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान आयोग के सदस्यों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज की। डॉ. कुमार ने यह भी दावा किया कि पीएचसी प्रभारियों से प्रत्येक प्रभारी के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की मांग की गई थी, जिसके कारण विवाद बढ़ा। सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों और अधिकारियों के साथ किसी भी प्रकार की अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों द्वारा आवेदन तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर मधुबनी नगर थाना में आयोग के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। दूसरी ओर, राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य रुबेल रविदास और संजय कुमार ने स्वास्थ्य विभाग के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में वे केवल स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा कर रहे थे और लापरवाही पाए जाने पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी। उनके अनुसार, इसी बात से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नाराज हो गए और हंगामा शुरू कर दिया।


