मगध विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो.शशि प्रताप शाही हटाए गए:राजभवन से आदेश जारी, 200 करोड़ घोटाले के आरोप; पीएम मोदी तक पहुंची शिकायत

मगध विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो.शशि प्रताप शाही हटाए गए:राजभवन से आदेश जारी, 200 करोड़ घोटाले के आरोप; पीएम मोदी तक पहुंची शिकायत

बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति ने मगध यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को पद से हटा दिया है। उनकी जगह पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर दिलीप कुमार केसरी को नए कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया है। आदेश के अनुसार वे तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी संभालेंगे। नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक या अगले आदेश तक प्रो. (डॉ.) दिलीप ही विश्वविद्यालय का कार्य देखेंगे। राजभवन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और शैक्षणिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राजभवन ने नए कार्यवाहक कुलपति को बिना कुलाधिपति की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से भी रोका है। सुशील सिंह ने पीएम मोदी को लिखा था पत्र कुछ दिन पहले बीजेपी नेता और पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रो. शशि प्रताप शाही पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। पत्र में दावा किया गया था कि प्रो. शाही ने तीन साल से अधिक के कार्यकाल में विश्वविद्यालय कोष से करीब 150 से 200 करोड़ रुपए की निकासी कराई है। पत्र में लगाए गए गंभीर आरोप 13 मई 2026 को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा गया कि मगध विश्वविद्यालय के विभिन्न फंड से बड़े पैमाने पर अनियमितता और लोकधन की लूट हुई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस मामले में पहले भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राजभवन को शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ‘केवल सच’ पत्रिका और हाईकोर्ट याचिका का भी जिक्र पत्र में दावा किया गया कि “केवल सच” पत्रिका के जनवरी 2026 अंक में भी कुलपति पर लगे आरोप प्रकाशित किए गए थे। इसके अलावा पटना उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं भी दायर की गई थीं। प्रिंटिंग प्रेस भुगतान की जांच की मांग शिकायत पत्र में विश्वविद्यालय से जुड़े भुगतान मामलों पर भी सवाल उठाए गए। खास तौर पर “चौधरी प्रिंटिंग प्रेस” को 40 से 50 करोड़ रुपए के भुगतान की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग शिकायतकर्ता ने राज्यपाल से पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराने और जांच पूरी होने तक कुलपति को पद से हटाने की मांग की थी। अब राजभवन के फैसले के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति ने मगध यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को पद से हटा दिया है। उनकी जगह पर विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर दिलीप कुमार केसरी को नए कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया है। आदेश के अनुसार वे तत्काल प्रभाव से जिम्मेदारी संभालेंगे। नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक या अगले आदेश तक प्रो. (डॉ.) दिलीप ही विश्वविद्यालय का कार्य देखेंगे। राजभवन की ओर से आदेश जारी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और शैक्षणिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राजभवन ने नए कार्यवाहक कुलपति को बिना कुलाधिपति की अनुमति के कोई बड़ा नीतिगत फैसला लेने से भी रोका है। सुशील सिंह ने पीएम मोदी को लिखा था पत्र कुछ दिन पहले बीजेपी नेता और पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रो. शशि प्रताप शाही पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। पत्र में दावा किया गया था कि प्रो. शाही ने तीन साल से अधिक के कार्यकाल में विश्वविद्यालय कोष से करीब 150 से 200 करोड़ रुपए की निकासी कराई है। पत्र में लगाए गए गंभीर आरोप 13 मई 2026 को भेजे गए शिकायत पत्र में कहा गया कि मगध विश्वविद्यालय के विभिन्न फंड से बड़े पैमाने पर अनियमितता और लोकधन की लूट हुई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस मामले में पहले भी कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राजभवन को शिकायत भेजी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ‘केवल सच’ पत्रिका और हाईकोर्ट याचिका का भी जिक्र पत्र में दावा किया गया कि “केवल सच” पत्रिका के जनवरी 2026 अंक में भी कुलपति पर लगे आरोप प्रकाशित किए गए थे। इसके अलावा पटना उच्च न्यायालय में दो जनहित याचिकाएं भी दायर की गई थीं। प्रिंटिंग प्रेस भुगतान की जांच की मांग शिकायत पत्र में विश्वविद्यालय से जुड़े भुगतान मामलों पर भी सवाल उठाए गए। खास तौर पर “चौधरी प्रिंटिंग प्रेस” को 40 से 50 करोड़ रुपए के भुगतान की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग शिकायतकर्ता ने राज्यपाल से पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराने और जांच पूरी होने तक कुलपति को पद से हटाने की मांग की थी। अब राजभवन के फैसले के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।  

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