‘दलित अब चुप नहीं बैठेगा, करारा जवाब दिया जाएगा’:ज्योति मांझी के काफिले पर हमला, अतरी विधायक बोले- कोई डराने की कोशिश नहीं कर सकता

‘दलित अब चुप नहीं बैठेगा, करारा जवाब दिया जाएगा’:ज्योति मांझी के काफिले पर हमला, अतरी विधायक बोले- कोई डराने की कोशिश नहीं कर सकता

गयाजी के बाराचट्टी से हम विधायक ज्योति मांझी से बदसलूकी और काफिले पर हमला मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस मामले को लेकर अब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) खुलकर आक्रामक तेवर में दिख रही है। अतरी विधायक रोमित कुमार ने राजद पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अब बिहार का दलित और महादलित समाज कमजोर नहीं रहा। हर अत्याचार का जवाब कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। पार्टी के संरक्षक जीतनराम मांझी ने जो कहा है, वह पूरी तरह सही है। अब दलित समाज जाग चुका है। किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि दलित समाज डरकर चुप बैठ जाएगा। जरूरत पड़ी तो करारा जवाब दिया जाएगा। पिछले कई चुनावों से दलित समाज का झुकाव लगातार एनडीए की ओर बढ़ा है। यही बात विपक्षी दलों को परेशान कर रही है। पहले दबाव और डर की राजनीति के जरिए दलितों का वोट लिया जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। समाज में बहुत बदलाव आया है अतरी विधायक ने आगे कहा कि जब से जीतनराम मांझी ने बिहार में दलित नेतृत्व को मजबूती दी है। तब से समाज में बड़ा बदलाव आया है। अब अगर कोई दलितों पर हमला करेगा या उन्हें डराने की कोशिश करेगा तो उसका मजबूती से जवाब मिलेगा। उनकी पार्टी कानून व संविधान के दायरे में रह कर कार्रवाई में विश्वास करती है। इलाके में डर का माहौल है रोमित कुमार ने टेकारी और अतरी क्षेत्र की पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान भी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए थे। बाराचट्टी की घटना यह बता रही है कि कुछ लोग अब भी इलाके में डर का माहौल बनाना चाहते हैं। बाराचट्टी काफी सुदूर व संवेदनशील इलाका है। वहां विधायक की सुरक्षा और मजबूत किए जाने की जरूरत है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी विधायक ज्योति देवी पर हमला हुआ था। अब फिर ऐसी घटना सामने आई है। अगर उस दिन विधायक गाड़ी से उतर जातीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। अगर एक महिला विधायक के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम दलित समाज की स्थिति क्या होगी, यह सोचने वाली बात है। रविवार को मोहनपुर प्रखंड के गम्भीरा गांव में क्या हुआ था? गयाजी जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर मोहनपुर प्रखंड के बमुआर पंचायत के गम्भीरा गांव की एक सड़क आजादी के बाद से अब तक पक्की नहीं बनी। गम्भीरा गांव तक पहुंचने वाली करीब 20 किलो मीटर लंबी सड़क सरवां से बोधगया बाइपास को जोड़ती है। सड़क पर तीन पुल बनने हैं, जो शिलान्यास के बाद से निर्माणाधीन हैं। इस सड़क पर तीन जगहों पर तीन बरसाती नदियां गुजरती हैं। सरवां से गम्भीरा के बीच दो नदियों पर लोग जान जोखिम में डालकर आम दिनों में निकलते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। महादेव स्थान से गम्भीरा तक पक्की सड़क का नामोनिशान नहीं है। गांव वाले हर साल चंदा करते हैं। श्रमदान करते हैं। मिट्टी डालकर रास्ता बनाते हैं। लेकिन पहली बारिश में सड़क फिर दलदल बन जाती है। यही वह रास्ता है, जहां रविवार को विधायक की गाड़ी फंसी और फिर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। नीतीश के कहने पर पहली बार लड़ी थी चुनाव मांझी की समधन ज्योति देवी भी 2020 विधानसभा चुनाव में HAM की टिकट से बरचट्टी से विधायक बनीं। हालांकि, वे लंबे समय से राजनीति में सक्रिय थीं और पहले भी विधायक रह चुकी थीं। 2010 में सीएम नीतीश कुमार ने उनके सामाजिक कामों से प्रभावित होकर उन्हें पहली बार चुनाव लड़ने के लिए कहा था। ज्योति 2010 में पहली बार विधायक बनीं। हालांकि, 2015 विधानसभा चुनाव से पहले मांझी और नीतीश कुमार के अलग होने से ज्योति को टिकट नहीं दिया गया। 2020 में फिर से विधानसभा पहुंची। गयाजी के बाराचट्टी से हम विधायक ज्योति मांझी से बदसलूकी और काफिले पर हमला मामले में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस मामले को लेकर अब हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) खुलकर आक्रामक तेवर में दिख रही है। अतरी विधायक रोमित कुमार ने राजद पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अब बिहार का दलित और महादलित समाज कमजोर नहीं रहा। हर अत्याचार का जवाब कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। पार्टी के संरक्षक जीतनराम मांझी ने जो कहा है, वह पूरी तरह सही है। अब दलित समाज जाग चुका है। किसी को यह नहीं समझना चाहिए कि दलित समाज डरकर चुप बैठ जाएगा। जरूरत पड़ी तो करारा जवाब दिया जाएगा। पिछले कई चुनावों से दलित समाज का झुकाव लगातार एनडीए की ओर बढ़ा है। यही बात विपक्षी दलों को परेशान कर रही है। पहले दबाव और डर की राजनीति के जरिए दलितों का वोट लिया जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। समाज में बहुत बदलाव आया है अतरी विधायक ने आगे कहा कि जब से जीतनराम मांझी ने बिहार में दलित नेतृत्व को मजबूती दी है। तब से समाज में बड़ा बदलाव आया है। अब अगर कोई दलितों पर हमला करेगा या उन्हें डराने की कोशिश करेगा तो उसका मजबूती से जवाब मिलेगा। उनकी पार्टी कानून व संविधान के दायरे में रह कर कार्रवाई में विश्वास करती है। इलाके में डर का माहौल है रोमित कुमार ने टेकारी और अतरी क्षेत्र की पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान भी कार्यकर्ताओं पर हमले हुए थे। बाराचट्टी की घटना यह बता रही है कि कुछ लोग अब भी इलाके में डर का माहौल बनाना चाहते हैं। बाराचट्टी काफी सुदूर व संवेदनशील इलाका है। वहां विधायक की सुरक्षा और मजबूत किए जाने की जरूरत है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी विधायक ज्योति देवी पर हमला हुआ था। अब फिर ऐसी घटना सामने आई है। अगर उस दिन विधायक गाड़ी से उतर जातीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। अगर एक महिला विधायक के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है तो आम दलित समाज की स्थिति क्या होगी, यह सोचने वाली बात है। रविवार को मोहनपुर प्रखंड के गम्भीरा गांव में क्या हुआ था? गयाजी जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर मोहनपुर प्रखंड के बमुआर पंचायत के गम्भीरा गांव की एक सड़क आजादी के बाद से अब तक पक्की नहीं बनी। गम्भीरा गांव तक पहुंचने वाली करीब 20 किलो मीटर लंबी सड़क सरवां से बोधगया बाइपास को जोड़ती है। सड़क पर तीन पुल बनने हैं, जो शिलान्यास के बाद से निर्माणाधीन हैं। इस सड़क पर तीन जगहों पर तीन बरसाती नदियां गुजरती हैं। सरवां से गम्भीरा के बीच दो नदियों पर लोग जान जोखिम में डालकर आम दिनों में निकलते हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। महादेव स्थान से गम्भीरा तक पक्की सड़क का नामोनिशान नहीं है। गांव वाले हर साल चंदा करते हैं। श्रमदान करते हैं। मिट्टी डालकर रास्ता बनाते हैं। लेकिन पहली बारिश में सड़क फिर दलदल बन जाती है। यही वह रास्ता है, जहां रविवार को विधायक की गाड़ी फंसी और फिर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। नीतीश के कहने पर पहली बार लड़ी थी चुनाव मांझी की समधन ज्योति देवी भी 2020 विधानसभा चुनाव में HAM की टिकट से बरचट्टी से विधायक बनीं। हालांकि, वे लंबे समय से राजनीति में सक्रिय थीं और पहले भी विधायक रह चुकी थीं। 2010 में सीएम नीतीश कुमार ने उनके सामाजिक कामों से प्रभावित होकर उन्हें पहली बार चुनाव लड़ने के लिए कहा था। ज्योति 2010 में पहली बार विधायक बनीं। हालांकि, 2015 विधानसभा चुनाव से पहले मांझी और नीतीश कुमार के अलग होने से ज्योति को टिकट नहीं दिया गया। 2020 में फिर से विधानसभा पहुंची।  

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